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Dussehra 2025: दशहरा पर शुभ संयोग तिथि महत्व शुभ मुहूर्त

इस बार दशहरा 2025 पर बन रहा है खास संयोग, जानें सही तिथि, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और इस पर्व का महत्व। समृद्धि के लिए पढ़ें पूरी जानकारी।

Published July 2, 2026
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6 Min Read

Dussehra 2025: इस बार दशहरा पर बन रहा शुभ संयोग, जानिए तिथि, महत्व और शुभ मुहूर्त

दशहरा, जिसे विजयदशमी के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म के सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और भगवान राम द्वारा रावण का वध करने की घटना को याद कराता है। साल 2025 में दशहरा का पर्व और भी खास होने वाला है, क्योंकि इस बार कुछ अद्भुत शुभ संयोग बन रहे हैं। आइए जानते हैं दशहरा 2025 की तिथि, इसके महत्व और शुभ मुहूर्त के बारे में विस्तार से।

Contents
Dussehra 2025: इस बार दशहरा पर बन रहा शुभ संयोग, जानिए तिथि, महत्व और शुभ मुहूर्तदशहरा 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्तदशहरा 2025 का शुभ मुहूर्तदशहरा 2025 का शुभ संयोगदशहरा का धार्मिक महत्व1. बुराई पर अच्छाई की जीत2. शक्ति की उपासना3. नया कार्य प्रारंभ करने का शुभ दिनदशहरा पूजा विधिसुबह की पूजारावण दहन के समयदशहरा पर विशेष उपायदेशभर में दशहरा उत्सव1. उत्तर भारत2. पूर्वी भारत3. दक्षिण भारतनिष्कर्ष

दशहरा 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त

साल 2025 में दशहरा 2 अक्टूबर, गुरुवार को मनाया जाएगा। इस दिन विजयदशमी का पर्व पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार, इस बार दशहरा पर कुछ विशेष योग बन रहे हैं, जो इसे और भी शुभ बना रहे हैं।

दशहरा 2025 का शुभ मुहूर्त

  • विजय मुहूर्त: दोपहर 01:58 बजे से 02:44 बजे तक (46 मिनट)
  • अपराह्न पूजा समय: दोपहर 01:13 बजे से 03:29 बजे तक
  • दशमी तिथि प्रारंभ: 1 अक्टूबर 2025 को रात 09:42 बजे
  • दशमी तिथि समाप्त: 2 अक्टूबर 2025 को रात 11:46 बजे

दशहरा 2025 का शुभ संयोग

इस बार दशहरा का पर्व कुछ खास शुभ संयोगों के साथ आ रहा है, जो इसे और भी विशेष बना रहे हैं:

  • गांधी जयंती के साथ संयोग: 2 अक्टूबर को ही महात्मा गांधी की जयंती भी मनाई जाएगी, जिससे यह दिन दोहरी खुशी लेकर आएगा।
  • शुक्रवार से पहले गुरुवार: दशहरा गुरुवार को पड़ रहा है, जो भगवान विष्णु का दिन माना जाता है। यह संयोग शुभ माना जाता है।
  • अश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी: यह तिथि स्वयं में ही विजय और सफलता का प्रतीक मानी जाती है।

दशहरा का धार्मिक महत्व

दशहरा न केवल एक सांस्कृतिक त्योहार है, बल्कि इसका गहरा धार्मिक महत्व भी है। यह पर्व हमें जीवन के कई महत्वपूर्ण पाठ सिखाता है:

1. बुराई पर अच्छाई की जीत

दशहरा भगवान राम द्वारा रावण के वध की घटना को याद कराता है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस दिन रावण के पुतले जलाए जाते हैं, जो हमारे अंदर की बुराइयों को नष्ट करने का संकेत देता है।

2. शक्ति की उपासना

दशहरा नवरात्रि के नौ दिनों की समाप्ति पर मनाया जाता है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है, जो शक्ति और साहस का प्रतीक हैं।

3. नया कार्य प्रारंभ करने का शुभ दिन

हिंदू शास्त्रों के अनुसार, विजयदशमी का दिन नया कार्य प्रारंभ करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। प्राचीन काल में राजा इसी दिन विजय यात्रा के लिए प्रस्थान करते थे।

दशहरा पूजा विधि

दशहरा के दिन विशेष पूजा-अर्चना करने का विधान है। आइए जानते हैं सही पूजा विधि:

सुबह की पूजा

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • घर के मंदिर में दीपक जलाएं और भगवान राम, मां दुर्गा और हनुमान जी की पूजा करें।
  • इस मंत्र का जाप करें: “ॐ श्री रामाय नमः” या “ॐ दुं दुर्गायै नमः”

रावण दहन के समय

  • रावण दहन के समय निम्न मंत्र का जाप करें: “ॐ नमो भगवते रामचंद्राय, सीतायै स्वाहा, लक्ष्मणाय स्वाहा, हनुमते स्वाहा”
  • रावण के पुतले को जलाते समय अपने मन से सभी बुराइयों को नष्ट करने का संकल्प लें।
  • पुतला जलने के बाद प्रसाद वितरित करें और आरती करें।

दशहरा पर विशेष उपाय

दशहरा के इस पावन अवसर पर कुछ विशेष उपाय करने से आपको जीवन में सफलता और समृद्धि प्राप्त हो सकती है:

  • शमी वृक्ष की पूजा: इस दिन शमी वृक्ष की पूजा करने और उसकी पत्तियों को अपने पास रखने से धन लाभ होता है।
  • अपराजिता पूजा: इस दिन मां दुर्गा के अपराजिता स्वरूप की पूजा करने से जीवन में हर परेशानी से विजय मिलती है।
  • अस्त्र-शस्त्र पूजन: प्राचीन काल में इस दिन राजा अपने अस्त्र-शस्त्रों की पूजा करते थे। आज के समय में आप अपने कार्यस्थल के उपकरणों की पूजा कर सकते हैं।

देशभर में दशहरा उत्सव

भारत के विभिन्न हिस्सों में दशहरा अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है:

1. उत्तर भारत

उत्तर भारत में रामलीला का आयोजन किया जाता है और बड़े-बड़े रावण के पुतले जलाए जाते हैं। दिल्ली का रामलीला मैदान और मैसूर का दशहरा विशेष रूप से प्रसिद्ध है।

2. पूर्वी भारत

पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम में दुर्गा पूजा के रूप में मनाया जाता है, जहां मां दुर्गा की मूर्तियों का विसर्जन किया जाता है।

3. दक्षिण भारत

तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में इसे गोलू या बोम्मई कोलू के रूप में मनाया जाता है, जहां घरों में देवी-देवताओं की मूर्तियों को सजाया जाता है।

निष्कर्ष

दशहरा का पर्व हमें यह संदेश देता है कि अंततः सत्य की हमेशा जीत होती है। साल 2025 का दशहरा विशेष शुभ संयोगों के साथ आ रहा है, जो इसे और भी महत्वपूर्ण बना रहा है। इस पावन अवसर पर हम सभी को अपने अंदर की बुराइयों को त्यागने और अच्छाई का मार्ग अपनाने का संकल्प लेना चाहिए। दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं!

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