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Nirjala Ekadashi 2025 31 मई व्रत महत्व पूजाविधि जलदान मंत्र

Published June 26, 2026
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Contents
निर्जला एकादशी 2025: 31 मई को है यह पावन व्रतनिर्जला एकादशी का महत्वपौराणिक कथानिर्जला एकादशी व्रत विधिव्रत की तैयारीपूजन विधिजलदान का महत्वविशेष सावधानियाँनिर्जला एकादशी का पारणनिष्कर्ष

निर्जला एकादशी 2025: 31 मई को है यह पावन व्रत

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, और इनमें से निर्जला एकादशी सबसे कठिन और फलदायी मानी जाती है। 2025 में यह व्रत 31 मई, शनिवार को पड़ रहा है। इस दिन भक्त बिना जल ग्रहण किए पूरे दिन उपवास रखते हैं और भगवान विष्णु की आराधना करते हैं। आइए जानते हैं इस व्रत का महत्व, पूजा विधि और जलदान से जुड़े विशेष मंत्र।

निर्जला एकादशी का महत्व

शास्त्रों में निर्जला एकादशी को “भीमसेनी एकादशी” भी कहा जाता है, क्योंकि महाभारत के भीम ने इसी व्रत से सभी एकादशियों का फल प्राप्त किया था। इसका महत्व इस प्रकार है:

  • सभी एकादशियों का फल: मान्यता है कि निर्जला एकादशी का व्रत रखने से वर्ष की सभी 24 एकादशियों का पुण्य मिलता है।
  • मोक्ष की प्राप्ति: इस व्रत से पितृदोष शांत होता है और मनुष्य को मोक्ष मार्ग प्रशस्त होता है।
  • सुख-समृद्धि: जल दान और व्रत से घर में सुख, शांति और धन की वृद्धि होती है।

पौराणिक कथा

महर्षि वेदव्यास ने भीम को बताया कि भोजनप्रिय होने के कारण वे अन्य एकादशियों का व्रत नहीं रख सकते, परंतु निर्जला एकादशी का व्रत करके सभी का फल प्राप्त कर सकते हैं। तभी से यह परंपरा चली आ रही है।

निर्जला एकादशी व्रत विधि

व्रत की तैयारी

  • दशमी की रात से ही सात्विक भोजन ग्रहण करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
  • सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • घर के मंदिर को गंगाजल से शुद्ध करके तुलसी और श्रीखंडी चंदन स्थापित करें।

पूजन विधि

  • भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र पर पीले फूल, तुलसी दल अर्पित करें।
  • दीपक जलाकर इस मंत्र से आरती करें:
    “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः”
  • विष्णु सहस्रनाम या “ॐ नमो नारायण” मंत्र का जाप करें।

जलदान का महत्व

व्रत के अगले दिन द्वादशी को सुबह ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को जल से भरा कलश दान करें। जलदान करते समय यह मंत्र बोलें:

“गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती।
नर्मदे सिंधु कावेरी जलेऽस्मिन् संनिधिं कुरु॥”

विशेष सावधानियाँ

  • व्रत में निर्जल (बिना पानी) रहने का विधान है, परंतु स्वास्थ्य कारणों से वृद्ध या रोगी फलाहार ले सकते हैं।
  • व्रत के दिन क्रोध, झूठ और निंदा से बचें।
  • रात में भूमि पर शयन करें और विष्णु भजन में मन लगाएँ।

निर्जला एकादशी का पारण

द्वादशी तिथि पर सूर्योदय के बाद जल, फल या मीठे चावल से व्रत खोलें। पारण से पहले भगवान विष्णु को जल अर्पित करें और इस मंत्र का उच्चारण करें:

“माधवाय नमस्तुभ्यं नमस्ते जलशायिने।
निर्जलं निराहारं च कृत्वा तुष्टो जनार्दनः॥”

निष्कर्ष

निर्जला एकादशी का व्रत शारीरिक संयम और आध्यात्मिक शुद्धि का अनूठा संगम है। यह हमें संसाधनों के महत्व का बोध कराते हुए जलदान जैसे पुण्य कर्म की प्रेरणा देता है। 31 मई 2025 को इस व्रत को श्रद्धापूर्वक करने से भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त होगी।

ध्यान रखें: व्रत करने से पूर्व अपने स्वास्थ्य और शारीरिक क्षमता का आकलन अवश्य कर लें।

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