MSHBMSHBMSHB
  • MSHB.IN
  • Latest News
  • Sarkari Yojana
Reading: तुलसी विवाह: वृंदा से आंगन की तुलसी बनने की कहानी
Share
Notification Show More
MSHBMSHB
  • MSHB.IN
  • Latest News
  • Sarkari Yojana
© 2024 MSHB.in. All Rights Reserved.

तुलसी विवाह: वृंदा से आंगन की तुलसी बनने की कहानी

तुलसी विवाह की पूरी कहानी जानें: देखिए कैसे वृंदा बनी आपके आंगन की पवित्र तुलसी और क्यों है यह परंपरा खास। रोचक तथ्यों के साथ पढ़ें!

Published July 2, 2026
Share
4 Min Read

तुलसी विवाह: वृंदा कैसे बनी हमारे आंगन की तुलसी?

हिंदू धर्म में तुलसी केवल एक पौधा नहीं, बल्कि देवी स्वरूप हैं। उनका विवाह भगवान शालिग्राम (श्रीविष्णु) से कराने की परंपरा तुलसी विवाह के नाम से प्रसिद्ध है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि वृंदावन की वृंदा देवी कैसे हमारे घर-आंगन की पूज्य तुलसी माता बनीं? आइए जानें यह पौराणिक कथा…

Contents
तुलसी विवाह: वृंदा कैसे बनी हमारे आंगन की तुलसी?तुलसी विवाह का पौराणिक महत्ववृंदा से तुलसी बनने की अद्भुत कथावृंदा का तुलसी पौधे में रूपांतरणतुलसी विवाह की रस्में और विधितुलसी पूजन के लाभनिष्कर्ष: तुलसी हैं भक्ति और शुद्धि की प्रतीक

तुलसी विवाह का पौराणिक महत्व

शास्त्रों के अनुसार, तुलसी विवाह का आयोजन देवउठनी एकादशी (कार्तिक शुक्ल एकादशी) को होता है। यह पर्व भगवान विष्णु के चातुर्मास्य शयन के बाद जागरण का प्रतीक भी है।

  • धार्मिक मान्यता: तुलसी-शालिग्राम विवाह से घर में सुख-समृद्धि आती है।
  • कथा संदर्भ: पद्म पुराण, स्कंद पुराण व ब्रह्मवैवर्त पुराण में तुलसी की उत्पत्ति की कथा मिलती है।
  • वैज्ञानिक पक्ष: तुलसी विवाह के बाद शीतल हवाओं के साथ इसका औषधीय प्रभाव बढ़ जाता है।

वृंदा से तुलसी बनने की अद्भुत कथा

वृंदा का जन्म और विष्णु भक्ति

पौराणिक कथाओं के अनुसार, वृंदा राक्षस कुल में जन्मी थीं, किंतु उनका हृदय शुद्ध भक्ति से परिपूर्ण था। उन्होंने कठोर तपस्या कर भगवान विष्णु को प्रसन्न किया और उन्हें पति रूप में पाने का वरदान माँगा।

जालंधर का अहंकार और वृंदा की पतिव्रता शक्ति

वृंदा का विवाह जालंधर नामक राक्षस से हुआ। उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मदेव ने उसे वरदान दिया कि “जब तक तुम्हारी पत्नी की पतिव्रता धर्म अटूट रहेगा, तुम्हें कोई नहीं मार सकता”। इस वरदान के बल पर जालंधर ने देवताओं को परेशान करना शुरू कर दिया।

विष्णु जी की लीला और वृंदा का श्राप

देवताओं की प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने जालंधर का रूप धारण कर वृंदा की पतिव्रता धर्म भंग किया। जब वृंदा को सत्य का पता चला, तो उन्होंने क्रोधित होकर विष्णु जी को “पत्थर का बनने” का श्राप दे दिया। इसी श्राप के फलस्वरूप विष्णु जी शालिग्राम शिला के रूप में प्रकट हुए।

वृंदा का तुलसी पौधे में रूपांतरण

अपने पति के विनाश के बाद वृंदा ने प्राण त्याग दिए। भगवान विष्णु ने उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर वरदान दिया:

  • तुम्हारे केशों से तुलसी का पौधा उत्पन्न होगा।
  • तुम सदैव मेरे सिर पर विराजमान रहोगी।
  • तुम्हारा विवाह मेरे शालिग्राम रूप से प्रतिवर्ष किया जाएगा।

तभी से वृंदा तुलसी देवी के रूप में पूजी जाने लगीं।

तुलसी विवाह की रस्में और विधि

विवाह की तैयारी

  • मंडप सज्जा: तुलसी के पास चौकी पर शालिग्राम स्थापित करें।
  • सामग्री: हल्दी, कुमकुम, अक्षत, मौली, फल-फूल व वस्त्र।
  • मंत्रोच्चार: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” के साथ पूजन।

विवाह संस्कार

पंडित जी द्वारा निम्न मंत्र पढ़कर विवाह कराया जाता है:

“यथा त्वं कृष्ण संयुक्ता, भक्तैस्तुच्छामि सर्वदा।
तथा मां पातु सर्वत्र, विष्णुप्रिया नमोऽस्तु ते॥”

तुलसी पूजन के लाभ

  • मोक्ष प्राप्ति: तुलसी के पत्तों के बिना विष्णु पूजन अधूरा माना जाता है।
  • स्वास्थ्य लाभ: तुलसी का नियमित सेवन रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।
  • वातावरण शुद्धि: तुलसी हानिकारक कीटाणुओं को नष्ट करती है।

निष्कर्ष: तुलसी हैं भक्ति और शुद्धि की प्रतीक

तुलसी विवाह की यह कथा हमें सिखाती है कि सच्ची भक्ति कभी व्यर्थ नहीं जाती। वृंदा के रूप में तुलसी ने पतिव्रता धर्म का पालन किया और देवी रूप में सभी के लिए पूज्य बनीं। आज भी हमारे घरों में तुलसी के रूप में वृंदा देवी विराजमान हैं, जो नित्य हमें शुद्धता, भक्ति और समर्पण का संदेश देती हैं।

You Might Also Like

Religion: अध्यात्म के बिना मानव जीवन अधूरा

Navratri Day 3 Chandraghanta Devi Puja Ka Rahasya

Jai Dev Jai Dev Jai Mangal Murti Lyrics जयदेव जयदेव जय मंगलमूर्ति

Ganga Saptami 2025 मां गंगा स्तोत्रम पाठ से पाप मुक्ति

Shabari Jayanti 2025: शबरी ने पशु बलि के खिलाफ बड़ा कदम उठाया

Share

Latest News

Hanuman Chalisa: हनुमान चालीसा पाठ का सही समय और विधि
Religion Spirituality July 2, 2026
राधा कृष्णा का युगल रूप हैं बांके बिहारी
Religion Spirituality July 2, 2026
Kheer Bhawani Temple: कश्मीर के चमत्कारी खीर भवानी मंदिर की परंपराएं
Religion Spirituality July 2, 2026
Durga Puja 2025 आज से शुरू जानें कल्पारंभ पूजा का शुभ मुहूर्त
Religion Spirituality July 2, 2026

You Might also Like

Mauni Amavasya 2025: मौनी अमावस्या महत्व कथा शुभ मुहूर्त

July 2, 2026

कालरात्रि और मां काली में समानता क्या है? | Similarity Between Kalaratri and Maa Kali

July 2, 2026

Pitru Paksha 2025: पंडित न हो तो पिंडदान कैसे करें? जानें नियम

July 2, 2026
MshbMshb

MSHB.in is your reliable source for the latest news in Government Schemes, Sarkari Yojana, Govt Jobs, Spirituality, lifestyle, and more.

Quick Link

  • MSHB.IN
  • About Us
  • Blogs
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Terms and Conditions
  • My Bookmarks
  • Contact Us

Category

  • Religion
  • Latest News
  • Sarkari Yojana

Recent Post

  • Hanuman Chalisa: हनुमान चालीसा पाठ का सही समय और विधि
  • राधा कृष्णा का युगल रूप हैं बांके बिहारी
  • Kheer Bhawani Temple: कश्मीर के चमत्कारी खीर भवानी मंदिर की परंपराएं
© 2025 MSHB. All Rights Reserved. | Website Designed By Dinox Tech HTML sitemap
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?