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Pongal 2025: चार दिनों तक चलता है पोंगल पर्व महत्व

पोंगल 2025 के चार दिवसीय पर्व का महत्व जानें। हर दिन की विशेष रीति-रिवाज़ और पूजा विधि समझें, इस खास त्योहार की पूरी जानकारी पाएं।

Published July 2, 2026
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5 Min Read

Pongal 2025: चार दिनों तक चलता है पोंगल पर्व, जानिए हर दिन का महत्व

पोंगल दक्षिण भारत का एक प्रमुख त्योहार है, जिसे फसलों और सूर्य देवता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए मनाया जाता है। यह चार दिनों तक चलने वाला उत्सव है, जिसमें प्रत्येक दिन का अपना विशेष महत्व होता है। 2025 में पोंगल 14 जनवरी से 17 जनवरी तक मनाया जाएगा। आइए, इस लेख में हम पोंगल के हर दिन के महत्व और परंपराओं को विस्तार से जानते हैं।

Contents
Pongal 2025: चार दिनों तक चलता है पोंगल पर्व, जानिए हर दिन का महत्वपोंगल का महत्व और इतिहासपोंगल के चार दिन और उनका महत्व1. भोगी पोंगल (14 जनवरी 2025)2. सूर्य पोंगल (15 जनवरी 2025)3. मट्टू पोंगल (16 जनवरी 2025)4. कन्या पोंगल (17 जनवरी 2025)पोंगल से जुड़ी विशेष परंपराएँपोंगल बनाने की विधिपोंगल गीत और नृत्यनिष्कर्ष

पोंगल का महत्व और इतिहास

पोंगल तमिलनाडु का प्रसिद्ध त्योहार है, जो तमिल महीने थाई के पहले दिन से शुरू होता है। यह त्योहार किसानों की मेहनत और प्रकृति की उदारता का प्रतीक है। पोंगल शब्द का अर्थ है “उबालना”, जो नए चावल को दूध और गुड़ के साथ पकाने की परंपरा को दर्शाता है।

  • धार्मिक महत्व: सूर्य देवता, इंद्र देव और गाय-बैलों की पूजा की जाती है।
  • सांस्कृतिक महत्व: नृत्य, संगीत और पारंपरिक पकवानों के साथ मनाया जाता है।
  • सामाजिक महत्व: परिवार और समुदाय के साथ मिलकर उत्सव मनाने की परंपरा।

पोंगल के चार दिन और उनका महत्व

1. भोगी पोंगल (14 जनवरी 2025)

पोंगल का पहला दिन भोगी पोंगल के नाम से जाना जाता है। इस दिन लोग पुरानी वस्तुओं को जलाकर नए सिरे से शुरुआत करते हैं।

  • इंद्र देव की पूजा: बारिश और फसलों के देवता के प्रति आभार व्यक्त किया जाता है।
  • भोगी मंटलु: घरों के आंगन में रंगोली बनाई जाती है।
  • अलाव जलाना: पुराने सामान को जलाकर नकारात्मकता दूर की जाती है।

इस दिन लोग “भोगी पल्लु” नामक विशेष व्यंजन बनाते हैं, जिसमें चावल, दाल और गुड़ का उपयोग होता है।

2. सूर्य पोंगल (15 जनवरी 2025)

दूसरा दिन सूर्य पोंगल होता है, जो इस त्योहार का मुख्य दिन माना जाता है। इस दिन सूर्य देवता की विशेष पूजा की जाती है।

  • पोंगल बनाना: नए मिट्टी के बर्तन में चावल, दूध और गुड़ को उबालकर सूर्य देव को अर्पित किया जाता है।
  • कोलम: घर के प्रवेश द्वार पर रंगीन रंगोली बनाई जाती है।
  • विशेष मंत्र: “सूर्याय नमः” का जाप करते हुए पूजा की जाती है।

इस दिन महिलाएं “वेन पोंगल” और “सक्कराई पोंगल” जैसे पारंपरिक व्यंजन बनाती हैं।

3. मट्टू पोंगल (16 जनवरी 2025)

तीसरा दिन मट्टू पोंगल के नाम से जाना जाता है। इस दिन गाय और बैलों की पूजा की जाती है, क्योंकि ये किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

  • पशु पूजा: गाय-बैलों को स्नान कराकर, उनके सींगों को रंगा जाता है।
  • जल्लीकट्टू: तमिलनाडु में बैलों के साथ खेलने की प्रतियोगिता आयोजित की जाती है।
  • भोजन: पशुओं को विशेष भोजन दिया जाता है।

इस दिन लोग “वेल्लम पोंगल” बनाते हैं, जो नमकीन पोंगल का एक प्रकार है।

4. कन्या पोंगल (17 जनवरी 2025)

चौथा और अंतिम दिन कन्या पोंगल कहलाता है। इस दिन परिवार के सदस्य एक-दूसरे से मिलते हैं और आशीर्वाद लेते हैं।

  • भाई-बहन का बंधन: बहनें भाइयों की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करती हैं।
  • सामुदायिक भोज: गाँव और मोहल्ले में सामूहिक भोज का आयोजन किया जाता है।
  • दान-पुण्य: गरीबों को भोजन और वस्त्र दान किए जाते हैं।

इस दिन “पायसम” और “अवियल” जैसे मिठाइयाँ बनाई जाती हैं।

पोंगल से जुड़ी विशेष परंपराएँ

पोंगल बनाने की विधि

पोंगल बनाने की परंपरा इस त्योहार का मुख्य आकर्षण है। इसे बनाने के लिए नए चावल, दूध, गुड़ और घी का उपयोग किया जाता है। जब पोंगल उबलता है और बर्तन से बाहर आता है, तो इसे “पोंगलो पोंगल” कहकर आशीर्वाद दिया जाता है।

पोंगल गीत और नृत्य

इस त्योहार पर कोलाट्टम और कुम्मी जैसे पारंपरिक नृत्य किए जाते हैं। गाँवों में लोग मिलकर पोंगल गीत गाते हैं, जो फसल और प्रकृति की सुंदरता का वर्णन करते हैं।

निष्कर्ष

पोंगल न केवल एक फसल उत्सव है, बल्कि यह प्रकृति, पशुधन और मानवीय संबंधों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का पर्व है। 2025 में पोंगल के इन चार दिनों को मनाकर हम प्राचीन परंपराओं को जीवित रख सकते हैं। आइए, इस पोंगल पर सूर्य देवता का आशीर्वाद प्राप्त करें और नए उत्साह के साथ आगे बढ़ें।

पोंगलो पोंगल!

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