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Papankusha Ekadashi 2025 दशहरा के अगले दिन पापंकुशा एकादशी व्रत शुभ मुहूर्त

पापंकुशा एकादशी 2025 का शुभ मुहूर्त, व्रत पूजा विधि और महत्व जानें। दशहरा के अगले दिन इस पावन व्रत को करने से मिलता है पापों से मुक्ति और मोक्ष का लाभ।

Published July 2, 2026
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6 Min Read

पापंकुशा एकादशी 2025: दशहरा के अगले दिन है यह पावन व्रत

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व होता है। इनमें से पापंकुशा एकादशी एक ऐसा पावन दिन है जो सभी पापों को नष्ट करने वाला माना जाता है। सन् 2025 में यह व्रत दशहरा के अगले दिन यानी 12 अक्टूबर को पड़ रहा है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं इस व्रत का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व।

Contents
पापंकुशा एकादशी 2025: दशहरा के अगले दिन है यह पावन व्रतपापंकुशा एकादशी का महत्वपौराणिक कथापापंकुशा एकादशी 2025 का शुभ मुहूर्तविशेष नोट:पापंकुशा एकादशी व्रत विधिव्रत से पहले की तैयारीपूजा विधिव्रत नियमपापंकुशा एकादशी की विशेष पूजा सामग्रीव्रत पारण (समापन) विधिमहत्वपूर्ण सावधानी:पापंकुशा एकादशी का आध्यात्मिक लाभनिष्कर्ष

पापंकुशा एकादशी का महत्व

शास्त्रों में पापंकुशा एकादशी को “पापों का नाश करने वाली” कहा गया है। यह व्रत आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की आराधना करने से:

  • जाने-अनजाने हुए पापों से मुक्ति मिलती है
  • पितृ दोष शांत होता है
  • आर्थिक संकट दूर होते हैं
  • मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं

पौराणिक कथा

ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, एक बार महर्षि वशिष्ठ ने भगवान कृष्ण से पापंकुशा एकादशी का महत्व पूछा। तब श्रीकृष्ण ने बताया कि इस व्रत के प्रभाव से राजा मान्धाता ने अपने पापों को नष्ट किया था। जो भक्त श्रद्धापूर्वक यह व्रत करता है, उसे स्वर्ग की प्राप्ति होती है।

पापंकुशा एकादशी 2025 का शुभ मुहूर्त

  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 11 अक्टूबर 2025, शाम 07:14 बजे
  • एकादशी तिथि समाप्त: 12 अक्टूबर 2025, शाम 05:15 बजे
  • व्रत पर्व: 12 अक्टूबर 2025 (दशहरा के अगले दिन)
  • पारण समय: 13 अक्टूबर सुबह 06:32 से 08:47 तक

विशेष नोट:

चूंकि एकादशी तिथि 12 अक्टूबर को सूर्योदय तक रहेगी, अतः व्रत 12 अक्टूबर को ही रखा जाएगा। पारण (व्रत तोड़ने) का समय 13 अक्टूबर को द्वादशी तिथि में ही किया जाएगा।

पापंकुशा एकादशी व्रत विधि

व्रत से पहले की तैयारी

  • दशमी (11 अक्टूबर) की रात्रि से ही ब्रह्मचर्य का पालन करें
  • सात्विक भोजन ग्रहण करें और मन को शांत रखें
  • एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें
  • साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें (पीले या सफेद रंग को प्राथमिकता दें)

पूजा विधि

  1. सबसे पहले घर के मंदिर को गंगाजल से शुद्ध करें
  2. लकड़ी के आसन पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की मूर्ति/तस्वीर स्थापित करें
  3. भगवान को पीले फूल, तुलसी दल और फल अर्पित करें
  4. दीपक जलाकर इस मंत्र का उच्चारण करें:
    “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
  5. विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें या “पापंकुशा एकादशी व्रत कथा” सुनें
  6. शाम को फिर से आरती करें और भजन-कीर्तन करें

व्रत नियम

  • पूरे दिन निर्जला व्रत (बिना पानी के) रखने का विशेष महत्व है
  • यदि संभव न हो तो फलाहार कर सकते हैं, पर अनाज न खाएं
  • क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से बचें
  • गरीबों को भोजन या दान देना शुभ माना जाता है

पापंकुशा एकादशी की विशेष पूजा सामग्री

इस दिन विशेष रूप से इन वस्तुओं का उपयोग करें:

  • तुलसी दल: भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है
  • केले के पत्ते: भोग लगाने के लिए उपयोग करें
  • पंचामृत: दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बना मिश्रण
  • खीर या फलाहार: भोग के रूप में अर्पित करें

व्रत पारण (समापन) विधि

13 अक्टूबर को द्वादशी तिथि में सुबह स्नान के बाद:

  1. सबसे पहले भगवान सूर्य को जल अर्पित करें
  2. फिर भगवान विष्णु की पूजा करें और प्रसाद ग्रहण करें
  3. किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन कराएं
  4. अन्न दान करना विशेष फलदायी माना गया है

महत्वपूर्ण सावधानी:

कभी भी एकादशी तिथि समाप्त होने से पहले व्रत न तोड़ें। यदि द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाए तो व्रत तोड़ने से पहले विद्वान ब्राह्मण से सलाह लें।

पापंकुशा एकादशी का आध्यात्मिक लाभ

यह व्रत केवल शारीरिक उपवास नहीं, बल्कि मन और आत्मा की शुद्धि का पर्व है। इस दिन:

  • मन से सभी प्रकार के विकार दूर होते हैं
  • आत्मबल बढ़ता है और निर्णय क्षमता सुधरती है
  • पारिवारिक सदस्यों के बीच प्रेम बढ़ता है
  • कुंडली के अशुभ योगों का प्रभाव कम होता है

निष्कर्ष

पापंकुशा एकादशी हमें सिखाती है कि पाप और पुण्य हमारे कर्मों का फल है। इस व्रत के माध्यम से हम न केवल भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करते हैं, बल्कि आत्मशुद्धि का मार्ग भी अपनाते हैं। सन् 2025 में यह व्रत दशहरा पर्व के ठीक अगले दिन आ रहा है, जो इसे और भी विशेष बना देता है। आइए, हम सभी इस पावन अवसर पर भगवान विष्णु की शरण में जाएं और जीवन को पवित्र बनाने का संकल्प लें।

श्री हरि विष्णु की कृपा से सभी के जीवन में शांति, समृद्धि और आनंद की वर्षा हो।

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