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रमज़ान 2025: 18 अप्रैल को सहरी और इफ्तार का समय
रमज़ान का पवित्र महीना मुसलमानों के लिए आत्मशुद्धि, इबादत और सब्र का समय होता है। इस दौरान सहरी और इफ्तार के समय का विशेष महत्व होता है। 18 अप्रैल 2025 को रोज़े की शुरुआत सहरी से होगी और सूर्यास्त के बाद इफ्तार के साथ समाप्त होगी। आइए जानते हैं इस दिन के समय और रमज़ान की फज़ीलत के बारे में।
18 अप्रैल 2025 के लिए सहरी और इफ्तार का समय
- सहरी का समय: भोर से पहले (लगभग 04:45 AM)
- इफ्तार का समय: सूर्यास्त पर (लगभग 06:32 PM)
- रोज़े की अवधि: लगभग 14 घंटे 47 मिनट
नोट: यह समय भारत के उत्तरी क्षेत्रों (दिल्ली, लखनऊ, जयपुर) के लिए है। अन्य शहरों में समय थोड़ा भिन्न हो सकता है।
रमज़ान के महीने की फज़ीलत
इस्लाम में रमज़ान को अल्लाह का महीना कहा जाता है। हदीस में आता है: “जब रमज़ान आता है, तो जन्नत के दरवाज़े खोल दिए जाते हैं और जहन्नम के दरवाज़े बंद कर दिए जाते हैं।” इस महीने में नेकियों का सवाब 70 गुना बढ़ा दिया जाता है।
रोज़े के फायदे
- आत्मिक शुद्धि और तक़वा (ईश्वर-भय) बढ़ता है
- शरीर को डिटॉक्सीफाई करने में मदद मिलती है
- ग़रीबों की भूख समझने का अवसर मिलता है
- सब्र और संयम की आदत विकसित होती है
सहरी के समय का महत्व
पैगंबर मोहम्मद (स.अ.व.) ने फरमाया: “सहरी खाना बरकत है, इसलिए इसे न छोड़ें।” सहरी के समय हल्का पौष्टिक आहार लेना चाहिए जो पूरे दिन ऊर्जा दे सके।
सहरी के लिए स्वस्थ आहार सुझाव
- पूरी गेहूं की रोटी या दलिया
- प्रोटीन के लिए अंडे, दही या दाल
- ताज़े फल और ड्राई फ्रूट्स
- पर्याप्त मात्रा में पानी
इफ्तार के समय की अहमियत
इफ्तार का समय खुशी और शुक्राने का होता है। हदीस में है: “रोज़ेदार के लिए दो खुशियाँ हैं – एक इफ्तार के समय और दूसरी अपने रब से मिलने के समय।”
सुन्नत के अनुसार इफ्तार कैसे करें?
- खजूर या पानी से इफ्तार खोलें
- मग़रिब की नमाज़ से पहले हल्का नाश्ता लें
- ज्यादा तला-भुना या भारी भोजन न करें
- परिवार और ग़रीबों के साथ बाँटकर खाएँ
18 अप्रैल 2025 के विशेष दुआओं का समय
रमज़ान में तरावीह की नमाज़ और तहज्जुद का विशेष महत्व है। सहरी के बाद और इफ्तार से पहले के समय में दुआओं की क़ुबूलियत बढ़ जाती है।
इस दिन पढ़ने वाली दुआएँ
- रोज़े की नियत की दुआ
- इफ्तार की दुआ: “अल्लाहुम्मा लक़ा सुम्तु व अला रिज़्क़िका अफ्तरतु”
- क़ुरआन की आखिरी 10 सूरतों का पाठ
निष्कर्ष
18 अप्रैल 2025 का रोज़ा हमें अल्लाह की रहमत और बरकत प्राप्त करने का सुनहरा अवसर देगा। सहरी और इफ्तार के इन पवित्र समयों का सदुपयोग करके हम अपनी आत्मा को शुद्ध कर सकते हैं। याद रखें, रमज़ान सिर्फ भूखा-प्यासा रहने का नहीं, बल्कि अपने आचरण, विचार और कर्मों को शुद्ध करने का महीना है।
आप सभी को रमज़ान मुबारक! माय अल्लाह हमें इस पवित्र महीने की सच्ची रूहानियत समझने और उस पर अमल करने की तौफ़ीक़ अता फरमाए। आमीन!
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