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सर्वपितृ अमावस्या पर पितरों की विदाई

Published June 26, 2026
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5 Min Read

पितरों के प्रति श्रद्धा का महापर्व

हिंदू धर्म में सर्वपितृ अमावस्या का विशेष महत्व है। यह वह पावन तिथि है जब हम अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनकी आत्मा की शांति के लिए विधि-विधान से तर्पण, श्राद्ध और दान करते हैं। इस दिन पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए विशेष पूजा-अनुष्ठान किए जाते हैं।

Contents
पितरों के प्रति श्रद्धा का महापर्वक्या है सर्वपितृ अमावस्या का महत्व?सर्वपितृ अमावस्या 2024: तिथि और शुभ मुहूर्तसर्वपितृ अमावस्या की पूजन विधिसुबह की तैयारीतर्पण की विधिक्यों जरूरी है सर्वपितृ अमावस्या का श्राद्ध?सर्वपितृ अमावस्या पर क्या दान करें?पितरों को प्रसन्न करने के उपायघर में करें ये छोटे-छोटे प्रयाससर्वपितृ अमावस्या की कथाअंतिम विदाई: पितरों को कैसे करें विदा?

क्या है सर्वपितृ अमावस्या का महत्व?

  • पितृपक्ष का समापन: यह दिन पितृपक्ष के अंतिम दिन के रूप में मनाया जाता है, जब सभी पितरों को विदाई दी जाती है।
  • अनाम पितरों का तर्पण: जिन पूर्वजों की मृत्यु की तिथि याद नहीं है, उनके लिए इस दिन विशेष तर्पण किया जाता है।
  • मोक्ष प्राप्ति का मार्ग: शास्त्रों के अनुसार, इस दिन किए गए दान और श्राद्ध से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

सर्वपितृ अमावस्या 2024: तिथि और शुभ मुहूर्त

इस वर्ष सर्वपितृ अमावस्या 12 अक्टूबर 2024, शनिवार को पड़ रही है।

  • अमावस्या तिथि प्रारंभ: 11 अक्टूबर की रात्रि 09:50 बजे से
  • अमावस्या तिथि समापन: 12 अक्टूबर की रात्रि 11:25 बजे तक
  • तर्पण का शुभ समय: प्रातः 06:15 बजे से 11:40 बजे तक

सर्वपितृ अमावस्या की पूजन विधि

सुबह की तैयारी

  • प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पितरों का स्मरण करते हुए गंगाजल से आचमन करें।
  • घर के मंदिर में दीपक जलाएं और पितृ देवता को फूल अर्पित करें।

तर्पण की विधि

  1. कुशा के आसन पर बैठकर काले तिल, जौ और जल से तर्पण करें।
  2. दक्षिण दिशा की ओर मुख करके निम्न मंत्र का उच्चारण करें:

    “ॐ पितृभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः, अद्य अमुक गोत्रस्य पितृ/पितामह/प्रपितामह (नाम) शर्मणः तिलोदकं समर्पयामि।”

  3. पिंडदान करें और ब्राह्मण को भोजन कराएं।

क्यों जरूरी है सर्वपितृ अमावस्या का श्राद्ध?

शास्त्रों में कहा गया है कि जो व्यक्ति श्राद्ध कर्म नहीं करता, उसके पितर असंतुष्ट रहते हैं और उसे पितृ दोष का सामना करना पड़ता है। इसके प्रभाव से:

  • धन-संपत्ति में बाधा आती है।
  • पारिवारिक कलह बढ़ती है।
  • संतान प्राप्ति में कठिनाई होती है।

सर्वपितृ अमावस्या पर क्या दान करें?

इस दिन निम्नलिखित वस्तुओं का दान करने से पितर प्रसन्न होते हैं:

  • वस्त्र दान: सफेद या पीले रंग के वस्त्र ब्राह्मण को दें।
  • अन्न दान: चावल, गेहूं, दाल आदि का दान करें।
  • तिल दान: काले तिल और गुड़ का दान विशेष फलदायी माना जाता है।

पितरों को प्रसन्न करने के उपाय

घर में करें ये छोटे-छोटे प्रयास

  • तुलसी के पौधे के नीचे प्रतिदिन दीपक जलाएं।
  • पीपल के वृक्ष की जड़ में जल चढ़ाएं और “ॐ नमः पितृभ्यः” मंत्र का जाप करें।
  • गाय को रोटी खिलाने से पितरों को तृप्ति मिलती है।

सर्वपितृ अमावस्या की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, महाभारत काल में जब कर्ण की मृत्यु हुई, तो उनकी आत्मा स्वर्ग पहुंची। वहां उन्हें सोने-चांदी के भोजन परोसे गए, लेकिन वे तृप्त नहीं हुए। जब उन्होंने यमराज से इसका कारण पूछा, तो उन्हें बताया गया कि उन्होंने जीवनभर दान तो किया, लेकिन पितरों को अन्न दान नहीं किया। तब कर्ण को पृथ्वी पर वापस भेजा गया और उन्होंने 15 दिनों तक पितरों का श्राद्ध किया। तभी से पितृपक्ष की परंपरा शुरू हुई।

अंतिम विदाई: पितरों को कैसे करें विदा?

शाम के समय दीपक जलाकर पितरों से प्रार्थना करें:

“हे पितृदेव, आपकी कृपा से हम सुखपूर्वक जीवन व्यतीत कर रहे हैं। आज हम आपको विदाई देते हैं, कृपया हमें आशीर्वाद देते हुए अपने लोक प्रस्थान करें।”

सर्वपितृ अमावस्या हमें अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर देती है। इस दिन श्रद्धापूर्वक किए गए तर्पण और दान से न केवल पितरों को शांति मिलती है, बल्कि हमारे जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग भी प्रशस्त होता है। पितृ ऋण से मुक्ति पाने के लिए इस पर्व को पूरी श्रद्धा के साथ मनाएं।

ॐ देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च।
नमः स्वधायै स्वाहायै नित्यमेव नमो नमः॥

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