तुलसी विवाह 2025: पूजन विधि और संपूर्ण सामग्री
हिंदू धर्म में तुलसी विवाह का विशेष महत्व है। यह पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। 2025 में तुलसी विवाह नवंबर 9, रविवार को पड़ रहा है। इस लेख में हम आपको तुलसी विवाह की संपूर्ण पूजन सामग्री और विधि बताएंगे, जिससे आप इस पावन पर्व को श्रद्धापूर्वक मना सकें।
तुलसी विवाह का महत्व
शास्त्रों के अनुसार, तुलसी जी भगवान विष्णु की परम भक्त हैं। तुलसी विवाह के दिन भगवान शालिग्राम (विष्णु जी का स्वरूप) का विवाह तुलसी जी के साथ संपन्न कराया जाता है। यह पर्व भक्ति और समर्पण का प्रतीक है।
- तुलसी विवाह से घर में सुख-समृद्धि आती है
- पारिवारिक कलह दूर होती है
- संतान सुख की प्राप्ति होती है
- पापों से मुक्ति मिलती है
तुलसी विवाह 2025 की तिथि और मुहूर्त
तिथि
9 नवंबर 2025, रविवार (कार्तिक शुक्ल एकादशी)
शुभ मुहूर्त
- प्रातःकाल: 6:30 AM से 8:45 AM
- मध्याह्न: 11:15 AM से 12:30 PM
- सायंकाल: 4:00 PM से 5:30 PM
तुलसी विवाह की पूजन सामग्री
तुलसी विवाह पूजा के लिए निम्नलिखित सामग्री तैयार करें:
- तुलसी का पौधा (गमले में लगा हुआ)
- शालिग्राम शिला या भगवान विष्णु की मूर्ति
- लाल चुनरी (तुलसी जी के लिए)
- पीला वस्त्र (शालिग्राम जी के लिए)
- मौली (कलावा)
- चावल, फूल, फल
- दीपक, घी, कपूर
- पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)
- सुपारी, लौंग, इलायची
- हल्दी, कुमकुम, चंदन
- मिष्ठान (मीठे व्यंजन)
तुलसी विवाह पूजा विधि
1. स्नान और शुद्धिकरण
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
2. मंडप सज्जा
तुलसी के पौधे के पास एक छोटा मंडप बनाएं। इसे फूलों और रंगोली से सजाएं। तुलसी जी और शालिग्राम जी को सिंहासन पर विराजमान करें।
3. कलश स्थापना
मंडप के पास कलश स्थापित करें। कलश पर नारियल रखें और मौली बांधें। कलश में गंगाजल, सुपारी, सिक्का और अक्षत डालें।
4. वर-वधू का श्रृंगार
- तुलसी जी को लाल चुनरी पहनाएं
- शालिग्राम जी को पीला वस्त्र पहनाएं
- दोनों को फूलों की माला पहनाएं
- हल्दी, कुमकुम और चंदन का तिलक लगाएं
5. विवाह संस्कार
पंडित जी या घर के बड़े बुजुर्ग निम्न मंत्रों के साथ विवाह संपन्न कराएं:
मंत्र:
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः”
“ॐ तुलस्यै नमः”
इसके बाद वर-वधू के हाथ में मौली बांधकर फेरे करवाएं। अंत में तुलसी जी और शालिग्राम जी की आरती उतारें।
6. भोग लगाएं
तुलसी जी और शालिग्राम जी को पंचामृत से स्नान कराएं। फिर मिष्ठान का भोग लगाएं। प्रसाद सभी परिवारजनों में बांटें।
तुलसी विवाह के विशेष मंत्र
- तुलसी स्तोत्र: “यन्मूले सर्वतीर्थानि यन्मध्ये सर्वदेवताः। यदग्रे सर्ववेदाश्च तुलसी त्वां नमाम्यहम्॥”
- विष्णु मंत्र: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
- मंगल आरती: “जय तुलसी माता, मैया जय तुलसी माता…”
तुलसी विवाह की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, तुलसी जी पहले वृंदा नामक दैत्य कन्या थीं। उन्होंने कठोर तपस्या कर भगवान विष्णु को प्रसन्न किया। भगवान ने उन्हें वरदान दिया कि वे तुलसी के रूप में पूजी जाएंगी और कार्तिक एकादशी के दिन उनका विवाह शालिग्राम रूप में स्वयं के साथ होगा।
निष्कर्ष
तुलसी विवाह हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है। 2025 में यह पर्व 9 नवंबर को मनाया जाएगा। इस लेख में दी गई पूजन विधि और सामग्री की सूची से आप इस पावन पर्व को पूरी श्रद्धा के साथ मना सकते हैं। तुलसी जी और शालिग्राम जी का विवाह कराने से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
आशा है यह लेख आपके लिए उपयोगी सिद्ध होगा। हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं। तुलसी माता आप सभी पर कृपा बनाए रखें
