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Ganga Saptami 2025 Date: गंगा सप्तमी शुभ मुहूर्त महत्व कथा पूजा विधि

गंगा सप्तमी 2025 की तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और पौराणिक कथा जानें। इस पावन पर्व का महत्व समझें और गंगा जी की कृपा पाने के लिए सही तरीके से पूजा करें।

Published July 2, 2026
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5 Min Read

गंगा सप्तमी 2025: पावन पर्व की पूर्ण जानकारी

माँ गंगा हिंदू धर्म में पवित्रता, मोक्ष और दिव्य शक्ति का प्रतीक हैं। गंगा सप्तमी का पर्व माँ गंगा के पृथ्वी पर अवतरण के रूप में मनाया जाता है। यह त्योहार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को आता है। 2025 में, गंगा सप्तमी 5 मई, सोमवार को मनाई जाएगी। इस लेख में हम शुभ मुहूर्त, पूजन विधि, पौराणिक कथा और इस पर्व के महत्व को विस्तार से जानेंगे।

Contents
गंगा सप्तमी 2025: पावन पर्व की पूर्ण जानकारीगंगा सप्तमी 2025 का शुभ मुहूर्ततिथि और समयपूजा का शुभ समयगंगा सप्तमी का धार्मिक महत्वमहत्वपूर्ण तथ्यगंगा अवतरण की पौराणिक कथाकथा का संक्षिप्त विवरणगंगा सप्तमी पूजा विधिपूजन सामग्रीविस्तृत पूजा विधिविशेष मंत्रगंगा सप्तमी पर विशेष उपायगंगा घाटों पर आयोजननिष्कर्ष

गंगा सप्तमी 2025 का शुभ मुहूर्त

तिथि और समय

  • गंगा सप्तमी तिथि: 5 मई 2025, सोमवार
  • सप्तमी तिथि प्रारंभ: 4 मई 2025 को रात 09:14 बजे
  • सप्तमी तिथि समाप्त: 5 मई 2025 को रात 11:44 बजे

पूजा का शुभ समय

  • प्रातःकाल पूजा: 05:30 AM से 10:30 AM
  • मध्याह्न पूजा: 12:00 PM से 03:00 PM
  • स्नान का महत्व: सूर्योदय से पहले गंगा स्नान करना सर्वाधिक फलदायी माना जाता है

गंगा सप्तमी का धार्मिक महत्व

शास्त्रों के अनुसार, गंगा सप्तमी के दिन ही माँ गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। इस दिन को “गंगा जयंती” भी कहा जाता है। पुराणों में वर्णित है कि:

  • गंगा स्नान से सभी पापों का नाश होता है
  • इस दिन गंगा जल का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है
  • गंगा आरती में भाग लेने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है

महत्वपूर्ण तथ्य

त्रिवेणी संगम: गंगा सप्तमी के दिन प्रयागराज में त्रिवेणी संगम पर स्नान का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन यहाँ स्नान करने से सात जन्मों के पाप धुल जाते हैं।

गंगा अवतरण की पौराणिक कथा

पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार, राजा भगीरथ ने घोर तपस्या कर माँ गंगा को पृथ्वी पर लाने का वरदान प्राप्त किया। भगीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर माँ गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर आईं, लेकिन उनके वेग को संभालने के लिए भगवान शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में धारण किया।

कथा का संक्षिप्त विवरण

  • सगर राजा के 60,000 पुत्रों को कपिल मुनि के श्राप से मुक्ति दिलाने की कथा
  • भगीरथ की कठिन तपस्या और गंगा को पृथ्वी पर लाने का संकल्प
  • भगवान शिव द्वारा गंगा को अपनी जटाओं में बाँधना
  • गंगा का पृथ्वी पर अवतरण और पापों का नाश

गंगा सप्तमी पूजा विधि

पूजन सामग्री

  • गंगा जल या सामान्य जल
  • लाल वस्त्र, फूल, फल, धूप, दीप
  • तिल, चावल, मिष्ठान्न
  • गंगा माता की प्रतिमा या चित्र

विस्तृत पूजा विधि

1. प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
2. पूजा स्थल को गंगा जल से शुद्ध करें
3. लाल कपड़े पर माँ गंगा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें
4. “ॐ नमो गंगायै विश्वरूपिण्यै नम:” मंत्र का जाप करते हुए फूल अर्पित करें
5. धूप-दीप दिखाकर गंगा आरती करें
6. गरीबों को भोजन और दान देकर पूजा समाप्त करें

विशेष मंत्र

गंगा स्तोत्र:
“देवि सुरेश्वरि भगवति गंगे त्रिभुवनतारिणि तरलतरंगे।
शंकरमौलिविहारिणि विमले मम मतिरास्तां तव पदकमले॥”

गंगा सप्तमी पर विशेष उपाय

  • दान का महत्व: इस दिन गरीबों को जल से भरा कलश, छाता या वस्त्र दान करना चाहिए
  • व्रत विधि: संभव हो तो पूरे दिन उपवास रखकर केवल फलाहार करें
  • पितृ तर्पण: पितरों की शांति के लिए गंगा जल से तर्पण करना शुभ माना जाता है

गंगा घाटों पर आयोजन

भारत के प्रमुख गंगा घाटों पर इस दिन विशेष आयोजन होते हैं:

  • हरिद्वार: हर की पौड़ी पर महा आरती
  • वाराणसी: दशाश्वमेध घाट पर भव्य पूजन
  • प्रयागराज: त्रिवेणी संगम पर स्नान महोत्सव
  • पटना: गांधी घाट पर भक्ति संगीत कार्यक्रम

निष्कर्ष

गंगा सप्तमी का पर्व हमें प्रकृति और धार्मिक विरासत से जोड़ता है। माँ गंगा के प्रति श्रद्धा प्रकट करने का यह श्रेष्ठ अवसर है। इस दिन गंगा स्नान, दान और पूजन से जीवन में पवित्रता आती है तथा दुःखों का नाश होता है। 5 मई 2025 को गंगा सप्तमी के इस पावन पर्व पर हम सभी मिलकर गंगा संरक्षण का संकल्प लें और इस दिव्य नदी की पवित्रता बनाए रखने में योगदान दें।

ध्यान दें: सभी तिथियाँ और मुहूर्त भारतीय समयानुसार (IST) दिए गए हैं। स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है।

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