अनंत चतुर्दशी 2025: पूजा विधि और महत्व
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाने वाली अनंत चतुर्दशी हिंदू धर्म में विशेष आस्था का पर्व है। वर्ष 2025 में यह पावन तिथि 19 सितंबर, शुक्रवार को पड़ रही है। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और दीर्घायु की प्राप्ति होती है। आइए जानें इस पर्व की पूजन विधि, मंत्र और गहन आध्यात्मिक महत्व।
अनंत चतुर्दशी का धार्मिक महत्व
पुराणों के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु ने अनंत रूप धारण कर ब्रह्मांड की रक्षा का संकल्प लिया था। यह व्रत सुख-समृद्धि देने वाला और संकटों को दूर करने वाला माना जाता है।
- महाभारत काल में युधिष्ठिर ने इस व्रत से राजपाट पाया था
- अनंत सूत्र बांधने की परंपरा सदियों से चली आ रही है
- 14 लोकों के स्वामी भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है
अनंत चतुर्दशी पूजा विधि (2025)
सुबह की तैयारी
- प्रातः ब्रह्म मुहूर्त (4:30 से 5:30 बजे) में उठकर स्नान करें
- साफ वस्त्र धारण कर पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें
- लकड़ी की चौकी पर पीला वस्त्र बिछाएं
मुख्य पूजन विधि
- भगवान विष्णु की मूर्ति/तस्वीर स्थापित करें
- अनंत सूत्र (14 गांठों वाला डोरा) को केसर से रंगें
- निम्न मंत्र से पूजन आरंभ करें: “ॐ अनंताय नमः”
- फूल, अक्षत, चंदन, धूप-दीप से आरती करें
- अनंत सूत्र को दाहिने हाथ में बांधें (पुरुष) या साड़ी में (महिलाएं)
अनंत चतुर्दशी व्रत कथा
कथा के अनुसार, सत्ययुग में एक ब्राह्मण कुमार सुमंत ने 14 वर्ष तक इस व्रत का पालन किया। उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उसे अनंत लोक का स्वामी बना दिया। तभी से यह व्रत मोक्ष प्रदायक माना जाता है।
विशेष पूजन सामग्री
- 14 गांठों वाला लाल/पीला डोरा (सूत्र)
- भगवान विष्णु के प्रिय तुलसी दल और केले के पत्ते
- पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)
- 14 प्रकार के फल या मिठाई
अनंत चतुर्दशी मंत्र
पूजा में इन मंत्रों का जाप विशेष फलदायी माना गया है:
- मूल मंत्र: “ॐ अनंताय नमः” (108 बार)
- विष्णु स्तोत्र: “शान्ताकारं भुजगशयनं…”
- अनंत व्रत कथा का श्रवण अवश्य करें
पारंपरिक व्यंजन और भोग
इस दिन 14 प्रकार के व्यंजन बनाने की परंपरा है। मुख्यतः:
- केले की पकौड़ी
- नारियल की बर्फी
- साबुदाना खीर
- 14 फलों का भोग
अनंत चतुर्दशी का आधुनिक संदर्भ
आज के युग में यह पर्व हमें जीवन में संयम, सात्विकता और धैर्य का संदेश देता है। अनंत सूत्र बांधना हमें प्रकृति से जोड़ने का प्रतीक है।
निष्कर्ष
19 सितंबर 2025 को मनाई जाने वाली अनंत चतुर्दशी हमें भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप से जोड़ती है। यह व्रत न केवल मोक्ष प्रदान करता है, बल्कि पारिवारिक सुख और आर्थिक समृद्धि का भी मार्ग प्रशस्त करता है। सही विधि से पूजन कर इस पर्व का पूर्ण लाभ उठाएं।
ध्यान रखें: पूजन में प्रयुक्त सामग्री को यथासंभव प्राकृतिक और शुद्ध रखें। अनंत सूत्र को 14 दिनों तक धारण करने के बाद किसी पवित्र नदी में विसर्जित कर दें।
