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Sawan Last Somwar 2025: प्रदोष काल में पूजा करें महादेव की कृपा पाएं

Sawan Last Somwar 2025 में प्रदोष काल में पूजा करने का विशेष महत्व। जानें कैसे करें शिव आराधना और पाएं महादेव की असीम कृपा। मिस न करें यह अवसर!

Published July 2, 2026
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4 Min Read

Sawan Last Somwar 2025: प्रदोष काल में पूजा करने का विशेष महत्व

सावन का आखिरी सोमवार (Sawan Last Somwar 2025) भक्तों के लिए अत्यंत पावन अवसर होता है। यदि आज किसी कारणवश आप दिन में पूजा नहीं कर पाए हैं, तो घबराइए नहीं! प्रदोष काल में की गई पूजा भी महादेव की असीम कृपा दिलाती है। इस लेख में जानिए कैसे प्रदोष काल में साधना करने से मिलता है विशेष फल।

Contents
Sawan Last Somwar 2025: प्रदोष काल में पूजा करने का विशेष महत्वप्रदोष काल क्या है?सावन के अंतिम सोमवार में प्रदोष पूजा के लाभप्रदोष काल में पूजन विधिआवश्यक सामग्रीविशेष मंत्र जापपूजा की संक्षिप्त विधिप्रदोष काल के विशेष नियमकथा: प्रदोष व्रत का महत्वनिष्कर्ष: शिव कृपा का सरल मार्ग

प्रदोष काल क्या है?

हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रदोष काल सूर्यास्त से ठीक पहले और बाद का समय होता है। यह वह पवित्र अवधि है जब भगवान शिव की उपासना करने से अतिशीघ्र फल प्राप्त होता है। सावन के सोमवार को इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।

  • सुबह का प्रदोष: सूर्योदय से ठीक पहले (ब्रह्म मुहूर्त)
  • शाम का प्रदोष: सूर्यास्त के ±1 घंटे का समय (सबसे प्रभावी)

सावन के अंतिम सोमवार में प्रदोष पूजा के लाभ

शास्त्रों में बताया गया है कि सावन का आखिरी सोमवार समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला होता है। प्रदोष काल में पूजन करने से ये विशेष लाभ मिलते हैं:

  • कुंडली के सभी ग्रह दोष शांत होते हैं
  • आर्थिक संकटों से मुक्ति मिलती है
  • विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं
  • संतान सुख की प्राप्ति होती है

प्रदोष काल में पूजन विधि

आवश्यक सामग्री

  • बिल्व पत्र: 108 या 11 पत्ते (महादेव को अत्यंत प्रिय)
  • जल: कुशा युक्त कलश का जल
  • धूप-दीप: घी का दीपक एवं गुग्गल धूप
  • प्रसाद: सफेद तिल के लड्डू या फल

विशेष मंत्र जाप

प्रदोष काल में इन मंत्रों का जाप अवश्य करें:

  • मूल मंत्र: “ॐ नमः शिवाय” (108 बार)
  • महामृत्युंजय मंत्र: “ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्…” (11 बार)

पूजा की संक्षिप्त विधि

  1. स्नानादि से निवृत्त होकर साफ वस्त्र धारण करें
  2. पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन बिछाएं
  3. शिवलिंग/प्रतिमा पर जल, बिल्वपत्र अर्पित करें
  4. धूप-दीप दिखाकर आरती उतारें
  5. अंत में शिव चालीसा या स्तोत्र का पाठ करें

प्रदोष काल के विशेष नियम

इस पावन समय में इन बातों का विशेष ध्यान रखें:

  • भोजन: एक समय फलाहार या सात्विक भोजन लें
  • वाणी: मीठा बोलें, किसी का अपमान न करें
  • दान: काले तिल या सफेद वस्त्र दान करना शुभ
  • सावधानी: इस दिन क्रोध एवं नकारात्मक विचारों से बचें

कथा: प्रदोष व्रत का महत्व

पुराणों में वर्णित है कि एक गरीब ब्राह्मण ने प्रदोष काल में शिव पूजा की थी। उसकी निष्ठा से प्रसन्न होकर भोलेनाथ ने उसे अक्षय धन-धान्य प्रदान किया। मान्यता है कि सावन में इस व्रत का पालन करने वाले को जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलती है।

निष्कर्ष: शिव कृपा का सरल मार्ग

सावन के इस अंतिम सोमवार पर प्रदोष काल में साधना करना सौभाग्यशाली माना जाता है। यदि आप दिनभर व्यस्त रहे हैं, तो सूर्यास्त के समय थोड़ी सी भी श्रद्धा से की गई पूजा महादेव को अति प्रिय है। याद रखें: शिव भक्ति के लिए बड़े उपक्रम नहीं, शुद्ध भावना चाहिए। हर हर महादेव!

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