21 सितंबर से शुरू होगी नवरात्रि: कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
माँ दुर्गा के नौ दिवसीय पावन पर्व नवरात्रि का आगमन होने वाला है। 21 सितंबर से शुरू हो रही इस नवरात्रि में भक्तजन माँ के नौ रूपों की आराधना करेंगे। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है, जिससे घर में दिव्य ऊर्जा का प्रवाह होता है। आइए, जानते हैं इस बार की नवरात्रि के शुभ मुहूर्त, कलश स्थापना की सरल विधि और माँ दुर्गा को प्रसन्न करने के उपाय।
नवरात्रि 2023: तिथि और महत्व
इस वर्ष शारदीय नवरात्रि 21 सितंबर से 29 सितंबर तक मनाई जाएगी। नवरात्रि के नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है, जो शक्ति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक हैं।
- प्रतिपदा (21 सितंबर): कलश स्थापना, माँ शैलपुत्री की पूजा
- द्वितीया (22 सितंबर): माँ ब्रह्मचारिणी की आराधना
- तृतीया (23 सितंबर): माँ चंद्रघंटा का पूजन
- चतुर्थी (24 सितंबर): माँ कुष्मांडा की उपासना
- पंचमी (25 सितंबर): माँ स्कंदमाता की पूजा
- षष्ठी (26 सितंबर): माँ कात्यायनी का आह्वान
- सप्तमी (27 सितंबर): माँ कालरात्रि की आराधना
- अष्टमी (28 सितंबर): माँ महागौरी पूजन और कन्या पूजन
- नवमी (29 सितंबर): माँ सिद्धिदात्री की पूजा, हवन और विसर्जन
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस वर्ष कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त निम्नलिखित है:
- तिथि: 21 सितंबर 2023 (गुरुवार)
- प्रातःकाल मुहूर्त: 06:23 AM से 07:32 AM
- अभिजीत मुहूर्त: 11:50 AM से 12:39 PM (सर्वोत्तम समय)
- चौघड़िया मुहूर्त: 01:27 PM से 03:05 PM
ध्यान रखें: कलश स्थापना हमेशा दिन के शुभ चौघड़िया या अभिजीत मुहूर्त में ही करें। संभव न हो तो प्रातःकाल के समय भी कर सकते हैं।
कलश स्थापना की सरल विधि
कलश स्थापना के लिए निम्न सामग्री तैयार करें:
- मिट्टी का कलश या तांबे का कलश
- जौ के बीज या मिट्टी
- लाल कपड़ा, कलावा, सुपारी, सिक्का
- आम के पत्ते, नारियल
- गंगाजल, फूल, अक्षत, धूप-दीप
विधि:
- सबसे पहले पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
- एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर जौ बोएँ या मिट्टी रखें।
- कलश में गंगाजल, सिक्का, सुपारी और कलावा डालकर ढक्कन लगाएँ।
- ढक्कन पर नारियल रखकर लाल कपड़े से लपेटें और कलावा बाँधें।
- कलश के गले में आम के पत्ते लगाएँ और उस पर स्वास्तिक बनाएँ।
- अब निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए कलश की स्थापना करें:
मंत्र:
“ॐ आगच्छ वरदे देवि त्रैलोक्यं पूरयामि ते।
गृहाणार्घ्यं नमस्तुभ्यं कलशस्थापनं कुरु।।”
नवरात्रि पूजा के विशेष टिप्स
- अखंड दीप: नौ दिनों तक अखंड दीप जलाए रखें। यह घर में सुख-समृद्धि का प्रतीक है।
- व्रत और सात्विक आहार: नवरात्रि में सात्विक भोजन करें। फलाहार या एक समय का भोजन लें।
- दुर्गा सप्तशती का पाठ: प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती के अध्याय का पाठ करने से माँ प्रसन्न होती हैं।
- घटस्थापना के दिन: नवरात्रि के पहले दिन कन्या पूजन भी कर सकते हैं। छोटी कन्याओं को भोजन कराएँ।
माँ दुर्गा को प्रसन्न करने के उपाय
नवरात्रि में इन छोटे-छोटे उपायों से माँ दुर्गा की कृपा पाई जा सकती है:
- प्रतिदिन सुबह स्नान के बाद लाल रंग के वस्त्र पहनकर माँ की पूजा करें।
- माँ को लाल फूल, हल्दी, कुमकुम और मिष्ठान्न अर्पित करें।
- नवरात्रि में “ॐ दुं दुर्गायै नमः” मंत्र का जाप करें।
- अष्टमी या नवमी के दिन नौ कन्याओं को भोजन कराकर उनके पैर छुएँ।
निष्कर्ष
नवरात्रि का पावन पर्व हमें आंतरिक शक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है। 21 सितंबर से शुरू हो रही इस नवरात्रि में कलश स्थापना के शुभ मुहूर्त का लाभ उठाएँ और माँ दुर्गा की कृपा पाने के लिए सच्चे मन से पूजा-अर्चना करें। माँ की भक्ति से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का आगमन होता है। जय माता दी!
