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Vishwakarma Puja 2025 विश्वकर्मा पूजा विधि और महत्व

विश्वकर्मा पूजा 2025 की पूरी जानकारी: भगवान विश्वकर्मा की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व जानें। इस विशेष दिन पर सही तरीके से पूजा करके आशीर्वाद प्राप्त करें।

Published July 2, 2026
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6 Min Read

विश्वकर्मा पूजा 2025: विश्वकर्मा जयंती आज, जानिए भगवान विश्वकर्मा की पूजाविधि और धार्मिक महत्व

भारतीय संस्कृति में विश्वकर्मा पूजा का विशेष महत्व है। यह पर्व हर वर्ष कन्या संक्रांति के दिन मनाया जाता है, जो इस बार 17 सितंबर 2025 को पड़ रहा है। भगवान विश्वकर्मा को शिल्प, वास्तु और निर्माण कला का देवता माना जाता है। इस दिन कारखानों, कार्यालयों और कारीगरों के घरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। आइए जानते हैं इस पावन पर्व की पूजन विधि, मंत्र और इसके धार्मिक महत्व के बारे में विस्तार से।

Contents
विश्वकर्मा पूजा 2025: विश्वकर्मा जयंती आज, जानिए भगवान विश्वकर्मा की पूजाविधि और धार्मिक महत्वभगवान विश्वकर्मा कौन हैं?विश्वकर्मा के पांच स्वरूपविश्वकर्मा पूजा 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्तविश्वकर्मा पूजा की विधिपूजा की तैयारीपूजन विधिविश्वकर्मा पूजा के मंत्रविश्वकर्मा पूजा का धार्मिक महत्वविश्वकर्मा पूजा से जुड़ी विशेष परंपराएंपश्चिम बंगाल और ओडिशाउत्तर भारतदक्षिण भारतविश्वकर्मा पूजा का आधुनिक संदर्भनिष्कर्ष

भगवान विश्वकर्मा कौन हैं?

हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि का प्रथम शिल्पकार माना जाता है। इन्हें देवताओं के वास्तुकार के रूप में जाना जाता है। पुराणों में इनके द्वारा निर्मित कई अद्भुत स्थानों का वर्णन मिलता है:

  • द्वापर युग में इंद्रप्रस्थ नगरी का निर्माण
  • लंका नगरी का निर्माण जो बाद में रावण की राजधानी बनी
  • देवताओं के लिए स्वर्गलोक का निर्माण
  • यमपुरी, वरुणपुरी और कुबेरपुरी का निर्माण

विश्वकर्मा के पांच स्वरूप

भगवान विश्वकर्मा के पांच प्रमुख स्वरूप माने जाते हैं:

  • विराट विश्वकर्मा – सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के निर्माता
  • धाता विश्वकर्मा – धातुओं के ज्ञाता
  • विद्या विश्वकर्मा – विद्याओं के दाता
  • कर्म विश्वकर्मा – कर्मों के नियंता
  • योग विश्वकर्मा – योग शक्ति के प्रदाता

विश्वकर्मा पूजा 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त

2025 में विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर, बुधवार को मनाई जाएगी। इस दिन कन्या संक्रांति भी है। पूजन के लिए शुभ मुहूर्त इस प्रकार है:

  • सूर्योदय: सुबह 06:15 बजे
  • पूजा का शुभ मुहूर्त: सुबह 07:00 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:45 से 12:30 बजे तक (सर्वोत्तम समय)

विश्वकर्मा पूजा की विधि

विश्वकर्मा पूजा का विधान बहुत ही सरल है। यहां बताई गई विधि का पालन कर आप भी घर या कार्यस्थल पर पूजा संपन्न कर सकते हैं:

पूजा की तैयारी

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
  • पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें
  • लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं
  • भगवान विश्वकर्मा की मूर्ति या चित्र स्थापित करें
  • पूजा सामग्री तैयार करें: रोली, चावल, फूल, धूप, दीप, फल, मिठाई, पान के पत्ते, नारियल

पूजन विधि

  • सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा करें
  • फिर विश्वकर्मा जी के चित्र/मूर्ति पर रोली से तिलक लगाएं
  • चावल, पुष्प अर्पित करें
  • धूप-दीप जलाकर आरती करें
  • निम्न मंत्रों का उच्चारण करें:

विश्वकर्मा पूजा के मंत्र

मूल मंत्र:
“ॐ आधारशक्तयै नमः, ॐ कुम्भाय नमः, ॐ अनन्तमूर्तये नमः, ॐ विश्वकर्मणे नमः, ॐ विश्वधारिणे नमः”

आरती मंत्र:
“जय विश्वकर्मा भगवान, जय शिल्पी महाराज।
तुम ही हो विधाता सबके, तुम ही हो विश्वकाज॥”

विश्वकर्मा पूजा का धार्मिक महत्व

विश्वकर्मा पूजा का हमारे जीवन में बहुत गहरा महत्व है। यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि हमारी कार्य संस्कृति का अभिन्न अंग है:

  • कर्म की प्रतिष्ठा: यह पूजा हमें अपने कर्म के प्रति समर्पण और ईमानदारी सिखाती है
  • नवीनता का प्रतीक: इस दिन कार्यस्थलों में नए उपकरणों का शुभारंभ किया जाता है
  • सामूहिकता: कारखानों और कार्यालयों में सामूहिक पूजा से टीम भावना मजबूत होती है
  • सुरक्षा का आशीर्वाद: मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से कार्यस्थल पर दुर्घटनाओं से रक्षा होती है

विश्वकर्मा पूजा से जुड़ी विशेष परंपराएं

भारत के विभिन्न क्षेत्रों में विश्वकर्मा पूजा को लेकर अलग-अलग परंपराएं प्रचलित हैं:

पश्चिम बंगाल और ओडिशा

  • इस दिन कारीगर अपने औजारों की पूजा करते हैं
  • नए औजार खरीदने का शुभ दिन माना जाता है

उत्तर भारत

  • कारखानों और औद्योगिक इकाइयों में बड़े स्तर पर पूजा का आयोजन
  • कर्मचारियों को प्रसाद और उपहार वितरित किए जाते हैं

दक्षिण भारत

  • इसे विश्वकर्मा जयंती के रूप में मनाया जाता है
  • वास्तु शास्त्र के अनुसार नए भवनों का शिलान्यास किया जाता है

विश्वकर्मा पूजा का आधुनिक संदर्भ

आज के डिजिटल युग में भी विश्वकर्मा पूजा की प्रासंगिकता बनी हुई है:

  • IT कंपनियां अपने सर्वर और कंप्यूटर सिस्टम की पूजा करती हैं
  • नए सॉफ्टवेयर और एप्लिकेशन का लोकार्पण इसी दिन किया जाता है
  • आर्किटेक्ट और इंजीनियर अपने डिजाइन टूल्स की पूजा करते हैं
  • फैक्ट्रियों में मशीनों का विशेष रखरखाव और पूजन किया जाता है

निष्कर्ष

विश्वकर्मा पूजा 2025 हमें यह संदेश देती है कि हमारे कर्म ही हमारी सच्ची पूजा हैं। चाहे वह शारीरिक श्रम हो या बौद्धिक, हर प्रकार के कार्य में देवत्व की अनुभूति करना ही इस पर्व का मूल उद्देश्य है। इस पावन अवसर पर हम सभी को अपने कार्यक्षेत्र में नवीनता, सृजनात्मकता और ईमानदारी के साथ कार्य करने का संकल्प लेना चाहिए।

भगवान विश्वकर्मा की कृपा से हमारे सभी कार्य निर्विघ्न संपन्न हों, यही इस पूजा का वास्तविक उद्देश्य है। आप सभी को विश्वकर्मा पूजा 2025 की हार्दिक शुभकामनाएं!

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