चंद्र कैलेंडर का अनोखा समय
हिंदू पंचांग में अधिकमास या मलमास एक विशेष समय होता है जो हर 32-33 महीने में आता है। 2025 में यह पवित्र माह 18 जुलाई से 16 अगस्त तक रहेगा। इस अवधि को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, क्योंकि भगवान विष्णु ने स्वयं इस महीने की रक्षा का भार लिया था।
अधिकमास क्या है? खगोल विज्ञान और धर्म का संगम
चंद्र-सौर तालमेल की गणना
- हिंदू कैलेंडर चंद्रमा और सूर्य दोनों की गतिविधियों पर आधारित है।
- चंद्र वर्ष (~354 दिन) और सौर वर्ष (~365 दिन) के बीच ~11 दिन का अंतर होता है।
- इस अंतर को पाटने के लिए हर तीसरे साल एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है।
क्यों कहते हैं पुरुषोत्तम मास?
पौराणिक कथा के अनुसार, अन्य महीनों ने अधिकमास को अपना नाम देने से इनकार कर दिया था। तब भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम (“पुरुषोत्तम”) दिया और कहा: “अब से यह महीना मेरी विशेष कृपा प्राप्त करेगा।”
धार्मिक महत्व: मोक्ष का स्वर्णिम अवसर
विशेष पूजा-अनुष्ठान के लाभ
- भागवत पुराण में कहा गया है कि इस माह में किया गया एक भजन सामान्य दिनों के हजारों जप के बराबर होता है।
- गीता पाठ, विष्णु सहस्रनाम और दान का विशेष फल मिलता है।
- पुराणों में वर्णित है कि इस माह में की गई तपस्या से तीन जन्मों के पाप धुल जाते हैं।
व्रत एवं उपवास की विधि
इस महीने में एकादशी, पूर्णिमा जैसे पर्व विशेष फलदायी होते हैं। कई भक्त पुरुषोत्तम मास व्रत रखते हैं जिसमें:
- प्रतिदिन तुलसी के पास दीपक जलाना
- श्री हरि के मंत्रों का जाप (ॐ नमो भगवते वासुदेवाय)
- सात्विक भोजन और मौन रहने का प्रयास
पौराणिक कथाएं: देवताओं ने क्यों चुना यह मास?
देवर्षि नारद की शंका का समाधान
एक बार नारद जी ने भगवान विष्णु से पूछा: “हे प्रभु! अधिकमास में किए गए पुण्य का फल अन्य महीनों से अधिक क्यों माना जाता है?” तब श्री हरि ने उत्तर दिया:
“जैसे गंगा में स्नान करने से सभी तीर्थों का फल मिलता है, वैसे ही इस माह में किया गया प्रत्येक पुण्य कर्म अनंत गुना हो जाता है।”
राजा बलि की कथा
महान दानवीर बलि ने इसी महीने में यज्ञ करके तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया था। बाद में भगवान वामन ने उसे पाताल लोक का राज्य दिया, किंतु अधिकमास के पुण्य के कारण बलि को सुतल लोक का स्वामी बनाया गया जहाँ स्वयं विष्णु उसके द्वारपाल बने।
आधुनिक जीवन में कैसे मनाएँ? (व्यस्त जीवन के लिए टिप्स)
- डिजिटल उपाय: मोबाइल में श्रीमद्भागवत की ऑडियो सुनें (यात्रा के दौरान)
- घर पर सरल पूजा: प्रतिदिन 5 मिनट तुलसी के पास दीप जलाकर मंत्र उच्चारण
- सामाजिक सेवा: अन्नदान या वृक्षारोपण को इस माह से जोड़ें
वैज्ञानिक दृष्टिकोण: ऋतु संतुलन का समय
आयुर्वेद के अनुसार, अधिकमास वर्षा ऋतु में आता है जब प्रकृति डिटॉक्स करती है। इसीलिए सात्विक आहार और आध्यात्मिक प्रयास शरीर-मन के लिए हितकर माने गए हैं।
समय का सदुपयोग करें
2025 का अधिकमास हमें 18 जुलाई से 16 अगस्त तक आंतरिक शुद्धि का अवसर दे रहा है। भले ही आप पूरा माह व्रत न रख पाएँ, किंतु प्रतिदिन 10 मिनट का ध्यान या “हरे कृष्ण” का जप भी आपके जीवन में दिव्य प्रकाश ला सकता है।
जैसे कृषक बादलों के आगमन पर बीज बो देता है, वैसे ही इस पुरुषोत्तम मास में बोए गए आध्यात्मिक बीज भविष्य में मोक्ष रूपी फल देंगे।
लेख में उल्लेखित मंत्रों और कथाओं का स्रोत: गरुड़ पुराण, भागवत पुराण एवं स्कन्द पुराण। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान से पूर्व अपने गुरु या पंडित से परामर्श अवश्य लें।

