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Adhik Mas 2025: 18 सितंबर से मलमास 160 साल बाद संयोग

Adhik Mas 2025 में 18 सितंबर से शुरू होगा मलमास, 160 साल बाद बना यह दुर्लभ संयोग। जानें इसका धार्मिक महत्व, पूजा विधि और क्या करें-क्या न करें।

Published July 2, 2026
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4 Min Read

Adhik Maas 2025: 18 सितंबर से शुरू होगा मलमास, 160 साल बाद बना यह अद्भुत संयोग

हिंदू पंचांग में अधिक मास या मलमास का विशेष महत्व है। साल 2025 में यह अद्वितीय संयोग बन रहा है जब 18 सितंबर से अधिक मास प्रारंभ होगा और यह 160 वर्षों के बाद ऐसा दुर्लभ योग बना है। इस पवित्र समय में भक्ति, व्रत और दान का विशेष फल प्राप्त होता है। आइए जानते हैं इसके रहस्य, महत्व और पूजा विधि के बारे में विस्तार से।

Contents
Adhik Maas 2025: 18 सितंबर से शुरू होगा मलमास, 160 साल बाद बना यह अद्भुत संयोगअधिक मास क्या है?160 साल बाद क्यों है खास?मलमास का धार्मिक महत्वपौराणिक कथाक्या करें और क्या न करेंअधिक मास 2025 में पूजा विधिसुबह का नित्यकर्मविशेष पूजा विधिमहामंत्र जापदान और पुण्य के विशेष अवसरविशेष सलाहनिष्कर्ष

अधिक मास क्या है?

हिंदू कैलेंडर चंद्रमा की गति पर आधारित है, जबकि अंग्रेजी कैलेंडर सूर्य की गति पर। इन दोनों के बीच संतुलन बनाने के लिए हर 32-33 महीने में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास या पुरुषोत्तम मास कहते हैं।

  • इस वर्ष अधिक मास 18 सितंबर 2025 से प्रारंभ होगा
  • यह 16 अक्टूबर 2025 तक रहेगा
  • इस दौरान सूर्य सिंह राशि से कन्या राशि में संक्रमण करेगा

160 साल बाद क्यों है खास?

ज्योतिषियों के अनुसार, 2025 का अधिक मास इसलिए विशेष है क्योंकि:

  • यह 1865 के बाद पहली बार ऐसा संयोग बना है
  • इस दौरान शनि की महादशा और चंद्रमा की अंतर्दशा चल रही होगी
  • अधिक मास के साथ पितृ पक्ष भी संयुक्त होगा

मलमास का धार्मिक महत्व

शास्त्रों में अधिक मास को पुरुषोत्तम मास कहा गया है। मान्यता है कि इस समय किए गए पुण्य कर्मों का फल अनंत गुना बढ़ जाता है।

पौराणिक कथा

स्कंद पुराण के अनुसार, जब चंद्र वर्ष में अतिरिक्त मास की उत्पत्ति हुई तो अन्य 12 महीनों ने उसे अपनाने से इनकार कर दिया। तब भगवान विष्णु ने इस मास को अपना नाम “पुरुषोत्तम” दिया और कहा कि अब से यह मास मेरा प्रिय होगा।

क्या करें और क्या न करें

  • करने योग्य कार्य: भगवान विष्णु की पूजा, दान, व्रत, मंत्र जाप
  • वर्जित कार्य: शुभ संस्कार (विवाह, गृहप्रवेश आदि)

अधिक मास 2025 में पूजा विधि

इस पवित्र मास में निम्न विधि से पूजा करने पर विशेष फल की प्राप्ति होती है:

सुबह का नित्यकर्म

  • प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें
  • साफ वस्त्र धारण कर “ॐ नमो नारायणाय” मंत्र का जाप करें
  • तुलसी के पौधे में जल अर्पित करें

विशेष पूजा विधि

  • लाल कपड़े पर भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें
  • पंचामृत से स्नान कराएं
  • पुरुष सूक्त का पाठ करें
  • केसर युक्त खीर का भोग लगाएं

महामंत्र जाप

इस मास में निम्न मंत्रों का जाप विशेष फलदायी है:

  • “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” (विष्णु मंत्र)
  • “हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे
    हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे”
    (महामंत्र)

दान और पुण्य के विशेष अवसर

अधिक मास में दान का विशेष महत्व है। निम्न वस्तुओं का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है:

  • वस्त्र दान: गरीबों को नए वस्त्र दान करें
  • अन्न दान: भूखों को भोजन कराएं
  • तिल दान: काले तिल का दान पितृ दोष शांति के लिए श्रेष्ठ है

विशेष सलाह

इस मास में श्रीमद्भागवत गीता का पाठ करना चाहिए। यदि संभव हो तो एक माह में सात या नौ परायण करें। इससे जीवन के सभी संकट दूर होते हैं।

निष्कर्ष

160 वर्षों के बाद आया 2025 का अधिक मास भक्तों के लिए स्वर्णिम अवसर है। 18 सितंबर से 16 अक्टूबर तक के इस पवित्र समय में भगवान विष्णु की भक्ति, दान और सत्कर्म करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं। यह समय आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति के लिए सर्वोत्तम है। आइए, हम सभी इस दुर्लभ संयोग का लाभ उठाएं और जीवन को धन्य बनाएं।

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