हिंदू धर्म में अधिकमास या मलमास का विशेष स्थान है। यह वह पवित्र समय है जब भगवान विष्णु स्वयं इस मास के स्वामी बनते हैं, इसीलिए इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। 2025 में यह माह 18 जुलाई से 16 अगस्त तक रहेगा। इस दौरान तुलसी और शालिग्राम की पूजा करने से अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है।
तुलसी और शालिग्राम: भगवान विष्णु के प्रतीक
तुलसी का धार्मिक महत्व
तुलसी को हिंदू धर्म में “विष्णुप्रिया” कहा गया है। शास्त्रों के अनुसार:
- तुलसी के पत्तों के बिना भगवान विष्णु की पूजा अधूरी मानी जाती है।
- इसकी पूजा से घर में सुख-समृद्धि आती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
- तुलसी के नियमित सेवन से रोगों से मुक्ति मिलती है।
शालिग्राम: भगवान विष्णु का स्वरूप
शालिग्राम भगवान विष्णु का पवित्र पाषाण स्वरूप है, जो गंडकी नदी से प्राप्त होता है।
- शालिग्राम की पूजा से वैकुंठ की प्राप्ति होती है।
- इसे घर में रखने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
- यह घर के वास्तु दोषों को भी दूर करता है।
अधिकमास में तुलसी-शालिग्राम पूजा का विधान
पूजा की तैयारी
- सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
- साफ वस्त्र धारण करके पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
- तुलसी के पौधे और शालिग्राम को लाल या पीले वस्त्र से सजाएं।
पूजन विधि
- सर्वप्रथम भगवान गणेश का स्मरण करें।
- तुलसी के समक्ष दीपक जलाएं और इस मंत्र का जाप करें:
“महाप्रसाद जननी, सर्व सौभाग्यवर्धिनी।
आधि व्याधि हरा नित्यं, तुलसी त्वं नमोस्तुते॥” - शालिग्राम को पंचामृत से स्नान कराएं और यह मंत्र बोलें:
“शालिग्रामं सदा पूज्यं, सर्वपापहरं परम्।
यस्य स्पर्शेन मुक्तिः स्यात्, तस्मै विष्णवे नमः॥” - अंत में आरती करके प्रसाद वितरित करें।
अधिकमास में तुलसी-शालिग्राम पूजा के लाभ
- मोक्ष की प्राप्ति: इस मास में की गई पूजा से जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है।
- संतान सुख: संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वालों के लिए यह पूजा विशेष फलदायी है।
- धन समृद्धि: नियमित पूजा से घर में धन की कभी कमी नहीं होती।
- स्वास्थ्य लाभ: तुलसी की पूजा से रोगों से मुक्ति मिलती है।
पुराणों में वर्णित कथाएं
तुलसी की उत्पत्ति की कथा
पद्म पुराण के अनुसार, तुलसी वृंदा नामक भक्त महिला का रूप थीं, जिन्होंने भगवान विष्णु की कठोर तपस्या की थी। प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें तुलसी के रूप में पूजित होने का वरदान दिया।
शालिग्राम की महिमा
स्कंद पुराण में कहा गया है कि जो व्यक्ति शालिग्राम की नियमित पूजा करता है, उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और अंत समय में वह भगवान विष्णु के धाम को प्राप्त करता है।
निष्कर्ष: पुरुषोत्तम मास का सदुपयोग करें
अधिकमास 2025 में तुलसी और शालिग्राम की पूजा करके आप अपने जीवन को धन्य बना सकते हैं। यह मास भक्ति और साधना के लिए सर्वोत्तम समय है। इस अवसर का लाभ उठाकर अपने आध्यात्मिक जीवन को नई दिशा दें।
“पुरुषोत्तम मासे यः पूजयेत तुलसीश्वरम्।
स याति परमं स्थानं, यत्र गत्वा न शोचति॥”
(जो पुरुषोत्तम मास में तुलसी और शालिग्राम की पूजा करता है, वह परम धाम को प्राप्त करता है, जहां जाने के बाद कभी दुःख नहीं होता।)
