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Anant Chaturdashi 2025 अनंत चतुर्दशी पूजा महत्व और 14 गांठ सूत्र

अनंत चतुर्दशी 2025 पर जानें 14 गांठ वाले सूत्र का रहस्य, पूजाविधि और महत्व। इस पावन पर्व की तैयारी कैसे करें और क्यों है यह विशेष, जानिए सरल तरीके से।

Published July 2, 2026
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4 Min Read

अनंत चतुर्दशी 2025: प्रभु अनंत की कृपा पाने का पावन पर्व

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाने वाली अनंत चतुर्दशी हिंदू धर्म में विशेष आस्था का प्रतीक है। यह पर्व भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप को समर्पित है, जहां 14 गांठों वाला सूत्र (अनंत सूत्र) बांधकर भक्त जीवन में सुख, समृद्धि और दीर्घायु की कामना करते हैं। 2025 में यह पर्व 7 सितंबर को मनाया जाएगा। आइए जानते हैं इसकी पूजन विधि, महत्व और रहस्यमयी परंपराओं के बारे में…

Contents
अनंत चतुर्दशी 2025: प्रभु अनंत की कृपा पाने का पावन पर्वअनंत चतुर्दशी का पौराणिक महत्वक्यों बांधा जाता है 14 गांठ वाला सूत्र?अनंत चतुर्दशी 2025 की पूजन विधिसामग्री तैयार करेंविस्तृत पूजा विधिअनंत चतुर्दशी व्रत कथाविशेष परंपराएं और मान्यताएंअनंत सूत्र बांधने के 5 आध्यात्मिक लाभवैज्ञानिक दृष्टिकोणसावधानियां और विशेष निर्देशनिष्कर्ष: अनंत की अनुकंपा पाने का सर्वोत्तम अवसर

अनंत चतुर्दशी का पौराणिक महत्व

स्कन्द पुराण और भविष्य पुराण में वर्णित कथा के अनुसार, इस दिन भगवान कृष्ण ने अनंत रूप धारण कर अर्जुन को अपना विराट स्वरूप दिखाया था। एक अन्य कथा के अनुसार, सत्यभामा और रुक्मिणी के विवाद को सुलझाने के लिए श्रीकृष्ण ने अनंत सूत्र का महत्व बताया था।

क्यों बांधा जाता है 14 गांठ वाला सूत्र?

  • 14 गांठें 14 लोकों (भू:, भुव:, स्व:… आदि) का प्रतीक हैं
  • हर गांठ में निवास करते हैं भगवान विष्णु के 14 अवतार
  • सूत्र बांधने से टूटती है दरिद्रता की श्रृंखला
  • 14 पीढ़ियों तक मिलता है पुण्य का लाभ

अनंत चतुर्दशी 2025 की पूजन विधि

सामग्री तैयार करें

  • कुमकुम, चंदन, अक्षत, फूल
  • 14 गांठ वाला लाल या पीला सूत्र (रेशमी/सूती)
  • भगवान विष्णु की प्रतिमा/तस्वीर
  • मिष्ठान्न (खीर, पूरी, फल)

विस्तृत पूजा विधि

प्रात:काल स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल पर कलश स्थापित करके गणेश जी का आवाहन करें। इसके बाद “ॐ अनंताय नम:” मंत्र का जाप करते हुए अनंत सूत्र पर 14 गांठें बांधें। प्रत्येक गांठ बांधते समय यह मंत्र बोलें:

“अनंत संसार महासमुद्रे मग्नं समभ्युद्धर वासुदेव”

सूत्र को भगवान विष्णु को अर्पित करके प्रसाद चढ़ाएं। अंत में इसे दाएं हाथ की कलाई पर बांध लें। पुरुष दाएं तथा महिलाएं बाएं हाथ में भी बांध सकती हैं।

अनंत चतुर्दशी व्रत कथा

प्राचीन समय में सुमंत नामक ऋषि की पुत्री सुशीला ने अपने पति कौण्डिन्य ऋषि के साथ यह व्रत रखा था। व्रत के प्रभाव से उन्हें समस्त कष्टों से मुक्ति मिली और दीर्घायु प्राप्त हुई। तभी से यह परंपरा चली आ रही है।

विशेष परंपराएं और मान्यताएं

  • महाराष्ट्र में गणेश विसर्जन: इसी दिन गणेशोत्सव का समापन होता है
  • गुजरात में अनंत पूजन: स्त्रियां समृद्धि के लिए समूह में पूजा करती हैं
  • दक्षिण भारत में अनंत पद्मनाभ स्वामी: तिरुवनंतपुरम मंदिर में विशेष उत्सव

अनंत सूत्र बांधने के 5 आध्यात्मिक लाभ

  1. कर्मबंधन से मुक्ति: संसारिक बंधनों से मिलती है मुक्ति
  2. आयुवृद्धि: दीर्घायु और स्वास्थ्य लाभ
  3. धनागमन: आर्थिक संकटों का निवारण
  4. कुल परंपरा की रक्षा: पितृदोष से मिलती है मुक्ति
  5. मोक्ष का मार्ग: अंत समय में विष्णुलोक की प्राप्ति

वैज्ञानिक दृष्टिकोण

आयुर्वेद के अनुसार, कलाई पर बंधा सूत्र नाड़ी संतुलन बनाए रखता है। 14 गांठों का दबाव एक्यूप्रेशर पॉइंट्स को सक्रिय करके स्वास्थ्य लाभ देता है। सूत्र में निहित मंत्रों की ध्वनि तरंगें मन को शांत करती हैं।

सावधानियां और विशेष निर्देश

  • सूत्र केवल नए कपड़े का ही बनाएं
  • गांठें बांधते समय मन में नकारात्मक विचार न लाएं
  • सूत्र को 40 दिन तक धारण करें, फिर किसी पवित्र नदी में विसर्जित कर दें
  • व्रत के दिन क्रोध, झूठ और हिंसा से बचें

निष्कर्ष: अनंत की अनुकंपा पाने का सर्वोत्तम अवसर

अनंत चतुर्दशी का पर्व हमें सिखाता है कि भगवान का अनंत स्वरूप ही संसार का आधार है। यह सूत्र केवल कलाई पर नहीं, बल्कि मन के बंधनों को खोलने का प्रतीक है। 2025 में इस पावन दिन पूर्ण श्रद्धा से अनंत सूत्र धारण करें और जीवन के हर क्षेत्र में अनंत सफलता प्राप्त करें।

ॐ अनंताय नम:

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