भाद्रपद मास, जिसे भादो भी कहा जाता है, हिंदू पंचांग का एक अत्यंत पवित्र महीना है। यह मास श्रावण मास के बाद आता है और इसकी शुरुआत 19 अगस्त 2025 से हो रही है। इस महीने में भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव जन्माष्टमी, हरतालिका तीज, गणेश चतुर्थी जैसे प्रमुख त्योहार मनाए जाते हैं।
धार्मिक मान्यताएं और व्रत-त्योहार
इस माह में व्रत-त्योहारों का विशेष महत्व है। मान्यता है कि भाद्रपद मास में किए गए धार्मिक अनुष्ठानों से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
- जन्माष्टमी: भगवान श्रीकृष्ण का जन्मदिन, जो इस वर्ष 24 अगस्त को मनाया जाएगा।
- हरतालिका तीज: भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का पर्व, 30 अगस्त को।
- गणेश चतुर्थी: भगवान गणेश की आराधना का महापर्व, 31 अगस्त से शुरू होगा।
- ऋषि पंचमी: ऋषियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन, 1 सितंबर को।
- राधाष्टमी: राधा जी के जन्मोत्सव का पर्व, 5 सितंबर को।
भाद्रपद मास के प्रमुख व्रत और उनका विधान
1. जन्माष्टमी व्रत – 24 अगस्त 2025
जन्माष्टमी भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन भगवान कृष्ण के भक्त उपवास रखते हैं और मध्यरात्रि में उनके जन्म की खुशी में कीर्तन-भजन करते हैं।
व्रत विधि:
- सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें।
- दिनभर निर्जला या फलाहार व्रत रखें।
- रात्रि में भगवान कृष्ण की झांकी सजाएं और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
- मध्यरात्रि में पंचामृत से अभिषेक करें और भोग लगाएं।
2. हरतालिका तीज – 30 अगस्त 2025
यह पर्व विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं द्वारा मनाया जाता है। इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा की जाती है।
व्रत विधि:
- सुबह स्नानादि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लें।
- मिट्टी या बालू से शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाकर पूजा करें।
- रात्रि जागरण कर भजन-कीर्तन करें।
- अगले दिन सुबह पूजा के बाद व्रत खोलें।
3. गणेश चतुर्थी – 31 अगस्त से 9 सितंबर 2025
गणेश चतुर्थी का पर्व 10 दिनों तक मनाया जाता है। इस दिन भगवान गणेश की स्थापना की जाती है और अंत में विसर्जन किया जाता है।
पूजा विधि:
- सुबह स्नान करके घर में गणेश जी की मूर्ति स्थापित करें।
- लाल चंदन, दूर्वा, मोदक आदि से पूजा करें।
- “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें।
- अनंत चतुर्दशी (9 सितंबर) को विसर्जन करें।
भाद्रपद मास में करने योग्य धार्मिक कार्य
इस पवित्र महीने में निम्नलिखित कार्य करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है:
- पितृ तर्पण: इस माह में पितरों को जल देने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है।
- गीता पाठ: भगवान कृष्ण के उपदेशों का पाठ करना शुभ माना जाता है।
- दान-पुण्य: गरीबों को अन्न, वस्त्र, फल आदि दान करना चाहिए।
निष्कर्ष
भाद्रपद मास आध्यात्मिक उन्नति और भक्ति का महीना है। इस महीने में व्रत-त्योहारों के साथ-साथ दान-पुण्य और सत्कर्मों का विशेष महत्व है। हम सभी को इस पवित्र माह का लाभ उठाकर अपने जीवन को धन्य बनाना चाहिए।
आप सभी को भाद्रपद मास की हार्दिक शुभकामनाएं!
