“`html
यशोदा के गर्भ से इस स्थान पर जन्मी थीं देवी योगमाया: एक दिव्य आख्यान
हिंदू धर्म के पवित्र ग्रंथों में देवी योगमाया का उल्लेख एक रहस्यमयी और शक्तिशाली देवी के रूप में मिलता है। भगवान श्रीकृष्ण की बहन के रूप में प्रसिद्ध योगमाया देवी का जन्म यशोदा मैया के गर्भ से हुआ था, जिन्होंने विष्णु जी की माया से संसार को चमत्कृत किया। आइए जानते हैं इस दिव्य जन्म की पावन कथा और उनके पूजन का महत्व।
देवी योगमाया कौन हैं?
योगमाया विष्णु भगवान की अदृश्य शक्ति हैं, जिन्होंने कंस के वध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार:
- वे भगवान कृष्ण की अलौकिक बहन हैं
- माता यशोदा ने इन्हें गोकुल में जन्म दिया
- इनका दूसरा नाम विंध्यवासिनी भी है
- ये दुर्गा का ही एक रूप मानी जाती हैं
योगमाया जन्म की पौराणिक कथा
कथा के अनुसार जब कंस ने देवकी-वसुदेव की आठवीं संतान को मारने का प्रयास किया, तब विष्णु जी की माया ने योगमाया के रूप में अवतार लिया:
- मथुरा में जन्मी योगमाया को कंस ने पत्थर पर पटकना चाहा
- देवी ने आकाश में विलीन होकर कंस को चेतावनी दी
- उन्होंने घोषणा की कि उसका वध करने वाला गोकुल में पल रहा है
- इसके बाद देवी विंध्याचल पर्वत पर प्रकट हुईं
योगमाया के प्रमुख मंदिर
भारत में देवी योगमाया के कई प्राचीन मंदिर हैं जहां उनकी विशेष पूजा होती है:
- योगमाया मंदिर, मथुरा – मान्यता है कि यहीं कंस ने योगमाया को पटका था
- विंध्यवासिनी मंदिर, मिर्जापुर – यहाँ देवी स्थायी रूप से निवास करती हैं
- योगमाया मंदिर, दिल्ली – महाभारत कालीन माना जाने वाला प्राचीन मंदिर
योगमाया पूजन का महत्व
नवरात्रि में देवी योगमाया की विशेष पूजा की जाती है। इनकी उपासना से:
- भक्तों को मायाजाल से मुक्ति मिलती है
- शत्रु बाधाओं का नाश होता है
- आध्यात्मिक शक्ति की प्राप्ति होती है
- कृष्ण भक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है
योगमाया स्तोत्र
देवी की कृपा पाने के लिए यह संक्षिप्त स्तोत्र पढ़ें:
“या देवी सर्वभूतेषु योगमाया रूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥”
निष्कर्ष
देवी योगमाया का जन्म भगवान कृष्ण के अवतार काल की एक महत्वपूर्ण घटना थी। यशोदा मैया के गर्भ से जन्मी यह दिव्य शक्ति आज भी भक्तों को माया के बंधनों से मुक्ति दिलाती हैं। इनकी कृपा पाने के लिए निष्काम भाव से पूजन करना चाहिए।
“`
