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Chhath Puja 2025 छठ पूजा के बारे में सबकुछ

Published June 26, 2026
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4 Min Read

सूर्य देव की अर्चना का महापर्व

छठ पूजा, भारत के सबसे पवित्र और आस्था से परिपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह पर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में अत्यंत श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष (2025) में छठ पूजा का विशेष महत्व है, क्योंकि यह पर्व तीन दिनों तक चलने वाला एक संपूर्ण आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है।

Contents
सूर्य देव की अर्चना का महापर्वछठ पूजा का धार्मिक महत्वसूर्योपासना का प्राचीन संस्कारपौराणिक कथाछठ पूजा के चार दिनों का विस्तृत विवरण1. नहाय-खाय (पहला दिन)2. खरना (दूसरा दिन)3. संध्या अर्घ्य (तीसरा दिन)4. उषा अर्घ्य (चौथा दिन)छठ पूजा की विधिपूजा सामग्रीपूजा विधानछठ पूजा का वैज्ञानिक महत्वनिष्कर्ष: आस्था और विज्ञान का संगम

छठ पूजा का धार्मिक महत्व

सूर्योपासना का प्राचीन संस्कार

छठ पूजा का उल्लेख प्राचीन वेदों और पुराणों में भी मिलता है। यह पर्व सूर्य देव और छठी मैया (षष्ठी देवी) को समर्पित है। मान्यता है कि सूर्य देव की आराधना से:

  • स्वास्थ्य और दीर्घायु की प्राप्ति होती है।
  • परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
  • संतान सुख की प्राप्ति होती है।

पौराणिक कथा

छठ पूजा से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा है कि राजा प्रियव्रत और रानी मालिनी को संतान प्राप्ति के लिए ऋषि कश्यप ने इस व्रत का पालन करने की सलाह दी थी। इसके बाद उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई।

छठ पूजा के चार दिनों का विस्तृत विवरण

1. नहाय-खाय (पहला दिन)

इस दिन व्रती स्नान करके शुद्ध शाकाहारी भोजन ग्रहण करते हैं। घर की सफाई की जाती है और पूजा की तैयारी शुरू होती है।

2. खरना (दूसरा दिन)

इस दिन व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखते हैं और शाम को गुड़ की खीर, रोटी और फल का भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करते हैं।

3. संध्या अर्घ्य (तीसरा दिन)

यह छठ पूजा का सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है। शाम के समय नदी या तालाब के किनारे जाकर सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है। इस समय यह मंत्र पढ़ा जाता है:

“ॐ सूर्याय नमः, ॐ छठी मैया नमः”

4. उषा अर्घ्य (चौथा दिन)

सुबह सूर्योदय से पहले व्रती फिर से नदी किनारे पहुँचते हैं और उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन करते हैं।

छठ पूजा की विधि

पूजा सामग्री

  • सूप (बांस की टोकरी)
  • गन्ना, नारियल, केला, सेब
  • दीपक, अगरबत्ती, फूल
  • मिठाई (ठेकुआ, खजूर, लड्डू)

पूजा विधान

  1. स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. सूप में फल, मिठाई और फूल सजाएँ।
  3. जल में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य दें।
  4. छठी मैया की कथा सुनें और आरती करें।

छठ पूजा का वैज्ञानिक महत्व

इस पर्व का केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक महत्व भी है:

  • सूर्य की किरणों से विटामिन डी मिलता है।
  • नदी के जल में खड़े होने से पैरों के एक्यूप्रेशर पॉइंट्स सक्रिय होते हैं।
  • उपवास से पाचन तंत्र को आराम मिलता है।

निष्कर्ष: आस्था और विज्ञान का संगम

छठ पूजा न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह प्रकृति और मनुष्य के बीच गहरा संबंध स्थापित करता है। इस पर्व के माध्यम से हम सूर्य देव का आभार व्यक्त करते हैं, जो हमें जीवनदायिनी ऊर्जा प्रदान करते हैं।

छठ मइया की कृपा सभी पर बनी रहे! 🙏

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