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Dhanteras 2025 धनतेरस पूजा विधि कथा व महत्व

धनतेरस 2025 की पूजा विधि कथा और महत्व जानें यह त्योहार दिवाली के पांच दिवसीय उत्सव की शुरुआत करता है

Published July 2, 2026
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5 Min Read

धनतेरस, जिसे धनत्रयोदशी भी कहा जाता है, दिवाली के पंचदिवसीय पर्व का प्रथम दिन है। यह त्योहार कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। 2025 में, धनतेरस 21 अक्टूबर को पड़ रहा है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा का विशेष महत्व है।

Contents
धनतेरस पूजा विधि: विधि-विधान से संपूर्ण आराधनापूजा की तैयारीपूजा विधानधनतेरस की पौराणिक कथा: समृद्धि और आरोग्य का संदेशकथा: प्राणरक्षक दीपकधनतेरस का महत्व: क्यों मनाया जाता है यह पर्व?1. आरोग्य का आशीर्वाद2. समृद्धि का प्रतीक3. अंधकार पर प्रकाश की विजयधनतेरस पर क्या खरीदें? शुभ वस्तुओं की सूचीधनतेरस का संदेश

धनतेरस केवल धन-संपत्ति का पर्व नहीं, बल्कि आरोग्य, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक है। इस दिन नया बर्तन, सोना-चांदी या कोई भी शुभ वस्तु खरीदने की परंपरा है, जो समृद्धि का संकेत मानी जाती है।

धनतेरस पूजा विधि: विधि-विधान से संपूर्ण आराधना

धनतेरस की पूजा सही विधि से करने पर घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। यहां पूजा की सरल और प्रभावी विधि बताई जा रही है:

पूजा की तैयारी

  • सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • घर के मुख्य द्वार पर रंगोली बनाएं और दीपक जलाएं।
  • लक्ष्मी, कुबेर और धन्वंतरि की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
  • पूजा थाली में कुमकुम, अक्षत, फूल, धूप, दीपक और मिठाई रखें।

पूजा विधान

  1. सबसे पहले भगवान गणेश का स्मरण करें।
  2. फिर धन्वंतरि जी को जल अर्पित करते हुए यह मंत्र बोलें:

    “ॐ नमो भगवते धन्वंतरये अमृतकलश हस्ताय सर्वभय विनाशाय सर्वरोग निवारणाय त्रैलोक्यनाथाय श्री महाविष्णवे स्वाहा।”

  3. माता लक्ष्मी और कुबेर को फूल, अक्षत अर्पित करें और इस मंत्र का जाप करें:

    “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः”

  4. अंत में आरती करें और प्रसाद वितरित करें।

धनतेरस की पौराणिक कथा: समृद्धि और आरोग्य का संदेश

धनतेरस से जुड़ी कई कथाएं प्रचलित हैं, लेकिन सबसे प्रसिद्ध कथा राजा हिमा के पुत्र की है।

कथा: प्राणरक्षक दीपक

एक बार राजा हिमा के पुत्र की कुंडली में यह भविष्यवाणी हुई कि उसकी शादी के चौथे दिन सर्पदंश से उसकी मृत्यु हो जाएगी। जब उसका विवाह हुआ, तो उसकी पत्नी ने उस दिन रात भर जागकर अपने पति को बचाने का निश्चय किया।

उसने द्वार पर सोने-चांदी के सिक्के और कीमती वस्तुएं रख दीं और कई दीपक जलाए। जब यमराज सर्प का रूप धारण करके आए, तो चमकती वस्तुओं और दीपकों की रोशनी से उनकी आंखें चौंधिया गईं। वह वहीं बैठ गए और रात भर कथा सुनते रहे। सुबह होते ही वे चले गए और राजकुमार की जान बच गई।

इसी घटना के बाद से धनतेरस पर दीपदान और धन-संपत्ति की पूजा की परंपरा शुरू हुई।

धनतेरस का महत्व: क्यों मनाया जाता है यह पर्व?

धनतेरस का महत्व केवल धन कमाने तक सीमित नहीं है। यह पर्व हमें तीन प्रमुख संदेश देता है:

1. आरोग्य का आशीर्वाद

इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है, जो आयुर्वेद के प्रणेता माने जाते हैं। उनकी कृपा से घर-परिवार में स्वास्थ्य और सुख बना रहता है।

2. समृद्धि का प्रतीक

माता लक्ष्मी और कुबेर की पूजा से धन-धान्य की प्राप्ति होती है। इस दिन नया सामान खरीदने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

3. अंधकार पर प्रकाश की विजय

दीप जलाकर हम अज्ञानता के अंधकार को दूर करने का संकल्प लेते हैं। यह त्योहार आत्मिक प्रकाश का भी प्रतीक है।

धनतेरस पर क्या खरीदें? शुभ वस्तुओं की सूची

धनतेरस पर कुछ विशेष वस्तुएं खरीदने से शुभ फल की प्राप्ति होती है:

  • सोना-चांदी: धातुएं समृद्धि का प्रतीक हैं।
  • नए बर्तन: विशेष रूप से तांबे या पीतल के बर्तन।
  • दीपक: मिट्टी या धातु के दीपक खरीदें।
  • लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति: घर में स्थापित करने से शुभता आती है।
  • उड़द की दाल या चावल: इन्हें खरीदकर दान करने का भी विधान है।

धनतेरस का संदेश

धनतेरस हमें सिखाता है कि सच्चा धन केवल पैसा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, सुख और आध्यात्मिक संपदा है। इस दिन हमें न केवल धन कमाने, बल्कि उसे सही तरीके से उपयोग करने का संकल्प लेना चाहिए।

आप सभी को धनतेरस की हार्दिक शुभकामनाएं! माता लक्ष्मी आपके घर में धन-धान्य, सुख-शांति और आरोग्य की वर्षा करें।

“यस्यां दिशि प्रकाशते सूर्यः, यस्यां दिशि विद्योतते चन्द्रः।
तस्यां दिशि त्वं प्रकाशय, हे दीप! त्वं प्रकाशय॥”

(जिस दिशा में सूर्य और चंद्रमा प्रकाशित होते हैं, हे दीपक! तुम भी उसी दिशा में प्रकाश फैलाओ।)

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