दिवाली 2025 लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: शुभ समय, पूजा विधि और आरती
दिवाली का त्योहार धन, समृद्धि और आध्यात्मिक ज्ञान की देवी माँ लक्ष्मी के आगमन का प्रतीक है। लक्ष्मी पूजा इस पर्व का सबसे महत्वपूर्ण क्षण होता है, जिसमें शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व होता है। 2025 में दिवाली पर माँ लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए जानिए शुभ समय, सरल पूजा विधि, मंत्र और आरती का पावन संगम।
दिवाली 2025 में लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, दिवाली 2025 में 21 अक्टूबर, मंगलवार को मनाई जाएगी। लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त इस प्रकार रहेगा:
- प्रदोष काल: शाम 5:32 बजे से 8:10 बजे तक
- निशीथ काल: रात 11:39 बजे से 12:32 बजे तक (22 अक्टूबर)
- अमावस्या तिथि: 21 अक्टूबर सुबह 6:53 बजे से 22 अक्टूबर सुबह 5:27 बजे तक
सर्वोत्तम समय: शाम 6:17 बजे से 8:10 बजे के बीच पूजा करने से माँ लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
लक्ष्मी पूजा की तैयारी: सामग्री और वातावरण
- मुख्य सामग्री: लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति/चित्र, कलश, रोली, अक्षत, फूल, दीपक, घी, कुमकुम, चंदन, सुपारी, सिक्के, फल और मिठाई
- सफाई: पूजा से पहले घर की गहरी सफाई करें और गंगाजल छिड़कें
- रंगोली: द्वार पर स्वस्तिक या पद्मचिह्न बनाएं
- दीपक: मुख्य द्वार, तुलसी चौरा और पूजा स्थल पर 11 दीपक जलाएं
लक्ष्मी पूजा विधि: सरल चरणों में
प्रारंभिक क्रियाएँ
- स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
- लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं
- कलश स्थापित कर उसमें सिक्के, सुपारी और अक्षत डालें
मुख्य पूजा
- सर्वप्रथम गणेश जी की पूजा करें: “ॐ गं गणपतये नमः”
- फिर माँ लक्ष्मी को फूल, अक्षत और मिठाई अर्पित करें
- निम्न मंत्र का उच्चारण करें: “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिभुवन महालक्ष्म्यै नमः”
- कुमकुम से स्वस्तिक बनाएं और सिक्कों की वर्षा करें
लक्ष्मी आरती: संपूर्ण पाठ
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता
तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता
सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥
दुर्गा रूप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥
तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥
जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता
सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥
शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधि-जाता
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥
महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥
विशेष मंत्र और उनका महत्व
- धन प्राप्ति मंत्र: “ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः” (108 बार जपें)
- व्यापार वृद्धि मंत्र: “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै स्वाहा”
- निर्धनता निवारण मंत्र: “ॐ नमो भगवति महालक्ष्म्यै दरिद्र्य नाशय नाशय”
पूजा के बाद के संस्कार
- आरती के बाद प्रसाद वितरण करें
- पूजा स्थल पर रात भर दीपक जलाए रखें
- अगले दिन सुबह पूजा सामग्री को साफ जल में विसर्जित करें
- दान-पुण्य अवश्य करें: अनाज, वस्त्र या दक्षिणा
लक्ष्मी पूजा की विशेष बातें
- गणेश जी के बिना अधूरी है लक्ष्मी पूजा – सर्वप्रथम गणपति का आवाहन करें
- पूजा में सोने-चाँदी के सिक्के अवश्य रखें
- माँ लक्ष्मी को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से स्नान कराएं
- पूजा के समय क्रोध या नकारात्मक विचार न लाएँ
निष्कर्ष: आध्यात्मिक समृद्धि का पर्व
दिवाली की लक्ष्मी पूजा केवल भौतिक सम्पत्ति की कामना नहीं, बल्कि आत्मिक प्रकाश का आह्वान है। 2025 के इस शुभ अवसर पर माँ लक्ष्मी के इन मंत्रों, आरती और पूजा विधि का पालन कर आप सच्ची समृद्धि प्राप्त कर सकते हैं। याद रखें, श्रद्धा और विश्वास से की गई पूजा ही सफल होती है। दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएँ!
