वरुथिनी एकादशी का महत्व
हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। वरुथिनी एकादशी चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में आती है और यह भगवान विष्णु को समर्पित है। इस व्रत को करने से व्यक्ति के सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस वर्ष वरुथिनी एकादशी 10 अप्रैल 2025, गुरुवार को मनाई जाएगी।
वरुथिनी एकादशी व्रत के लाभ
- पापों से मुक्ति: इस व्रत को करने से जीवन के सभी पाप धुल जाते हैं।
- धन-समृद्धि: भगवान विष्णु की कृपा से आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।
- स्वास्थ्य लाभ: शारीरिक और मानसिक शुद्धि होती है।
- मोक्ष की प्राप्ति: इस व्रत के प्रभाव से मृत्यु के बाद मोक्ष मिलता है।
वरुथिनी एकादशी व्रत विधि
वरुथिनी एकादशी का व्रत रखने के लिए निम्न विधि का पालन करें:
व्रत से पहले की तैयारी
- दशमी के दिन सात्विक भोजन करें और रात्रि में ब्रह्मचर्य का पालन करें।
- स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- भगवान विष्णु के मंत्र “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जाप करें।
व्रत के दिन क्या करें?
- प्रातःकाल सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें।
- भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर को गंगाजल से शुद्ध करके स्थापित करें।
- तुलसी दल, फूल, धूप-दीप से पूजा करें।
- व्रत कथा का पाठ करें और आरती करें।
- पूरे दिन निर्जला व्रत रखें या फलाहार करें।
व्रत का पारण (समापन)
- द्वादशी के दिन सुबह स्नान करके ब्राह्मण को भोजन कराएं।
- भगवान विष्णु को भोग लगाकर स्वयं प्रसाद ग्रहण करें।
वरुथिनी एकादशी व्रत कथा
प्राचीन काल में मान्धाता नाम के एक धर्मात्मा राजा थे। वे बहुत ही धार्मिक और न्यायप्रिय थे। एक बार वे शिकार के लिए वन में गए, जहाँ उन्होंने एक हिरणी को देखा और उस पर बाण चला दिया। बाण लगते ही हिरणी गिर पड़ी और उसके पेट से एक बालक निकला। राजा को बहुत पश्चाताप हुआ और उन्होंने उस बालक को अपने महल में ले जाकर पालन-पोषण किया।
कुछ समय बाद राजा को ज्ञात हुआ कि वह बालक वास्तव में एक ऋषि का पुत्र था। राजा ने ऋषि से क्षमा मांगी और पूछा कि इस पाप से मुक्ति कैसे मिलेगी? ऋषि ने उन्हें वरुथिनी एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। राजा ने पूरी श्रद्धा से इस व्रत को किया और उनके सभी पापों का नाश हो गया।
वरुथिनी एकादशी के विशेष मंत्र
इस दिन निम्न मंत्रों का जाप करने से विशेष लाभ मिलता है:
- “ॐ नमो नारायणाय” – 108 बार जाप करें।
- “श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे, हे नाथ नारायण वासुदेवा” – भजन करें।
- “विष्णु सहस्रनाम” का पाठ करें।
वरुथिनी एकादशी का व्रत भक्ति और विश्वास के साथ करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं। भगवान विष्णु की कृपा से मनुष्य को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस व्रत को करके आप अपने जीवन को पवित्र और सुखमय बना सकते हैं।
हरि ॐ तत्सत्।

