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ज्येष्ठ माह जून में साल का पहला सूर्यग्रहण जानिए महत्व और व्रत

ज्येष्ठ माह में लगने वाला साल का पहला सूर्यग्रहण और इस पवित्र महीने का महत्व, व्रत-त्योहार व उपाय जानें। ज्योतिष अनुसार जानिए इस माह की खास बातें और आध्यात्मिक लाभ।

Published July 2, 2026
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5 Min Read

ज्येष्ठ माह: जून में लगेगा साल का पहला सूर्यग्रहण, जानिए ज्येष्ठ माह का महत्व और व्रत-त्योहार

हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह का विशेष धार्मिक और खगोलीय महत्व है। इस वर्ष जून माह में साल का पहला सूर्यग्रहण भी लगने वाला है, जो इस माह की महत्ता को और बढ़ा देता है। ज्येष्ठ माह में कई प्रमुख व्रत, त्योहार और पूजा-अनुष्ठान किए जाते हैं, जिनका वर्णन हमारे शास्त्रों में मिलता है। आइए, जानते हैं इस पावन माह का महत्व, ग्रहण का समय और धार्मिक विधियाँ।

Contents
ज्येष्ठ माह: जून में लगेगा साल का पहला सूर्यग्रहण, जानिए ज्येष्ठ माह का महत्व और व्रत-त्योहारज्येष्ठ माह का धार्मिक महत्वसाल का पहला सूर्यग्रहण: तिथि और समयसूर्यग्रहण के दौरान धार्मिक विधियाँज्येष्ठ माह के प्रमुख व्रत और त्योहारज्येष्ठ माह में करने योग्य दान-पुण्यज्येष्ठ माह की विशेष पूजा विधिसारांश

ज्येष्ठ माह का धार्मिक महत्व

ज्येष्ठ माह को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना गया है। यह माह भगवान विष्णु और शिवजी की उपासना के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। शास्त्रों में कहा गया है:

“ज्येष्ठे मासि दिवारात्रौ यः स्नानं समाचरेत्।
सर्वपापविनिर्मुक्तो विष्णुलोकं स गच्छति॥”

अर्थात, जो व्यक्ति ज्येष्ठ माह में दिन-रात स्नान करता है, वह सभी पापों से मुक्त होकर विष्णुलोक को प्राप्त करता है। इस माह में निम्नलिखित पौराणिक महत्वपूर्ण घटनाएँ हुईं:

  • भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया था
  • गंगा का धरती पर अवतरण हुआ
  • महाभारत का युद्ध प्रारंभ हुआ

साल का पहला सूर्यग्रहण: तिथि और समय

इस वर्ष 10 जून, 2024 को साल का पहला सूर्यग्रहण लगेगा। यह ग्रहण भारत में आंशिक रूप से दिखाई देगा। ग्रहण का समय और विवरण निम्नलिखित है:

  • ग्रहण प्रारंभ: दोपहर 01:42 बजे (IST)
  • ग्रहण समाप्ति: शाम 06:41 बजे (IST)
  • अधिकतम ग्रहण: शाम 04:11 बजे (IST)
  • दृश्यता: उत्तर-पूर्व भारत में आंशिक

सूर्यग्रहण के दौरान धार्मिक विधियाँ

हिंदू शास्त्रों में ग्रहण काल को अत्यंत संवेदनशील माना गया है। इस दौरान निम्नलिखित सावधानियाँ और पूजा विधियाँ बताई गई हैं:

  • ग्रहण के 12 घंटे पहले से ही उपवास रखने का विधान है
  • ग्रहण काल में तुलसी के पत्ते डालकर पीने का जल शुद्ध रखें
  • ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान-दान अवश्य करें
  • मंत्र जप: “ॐ आदित्याय विद्महे दिवाकराय धीमहि तन्न: सूर्य: प्रचोदयात्”

ज्येष्ठ माह के प्रमुख व्रत और त्योहार

ज्येष्ठ माह में कई महत्वपूर्ण व्रत और पर्व मनाए जाते हैं, जिनमें से प्रमुख हैं:

1. निर्जला एकादशी

यह व्रत ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। इस दिन बिना जल ग्रहण किए व्रत रखने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस व्रत से सभी एकादशियों का फल प्राप्त होता है।

2. वट सावित्री व्रत

ज्येष्ठ अमावस्या के दिन मनाया जाने वाला यह व्रत सुहागिनों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं वट वृक्ष की पूजा कर अपने पति की दीर्घायु की कामना करती हैं।

3. गंगा दशहरा

ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को गंगा अवतरण के उपलक्ष्य में मनाया जाने वाला यह पर्व अत्यंत पावन माना जाता है। इस दिन गंगा स्नान करने से दस प्रकार के पापों का नाश होता है।

ज्येष्ठ माह में करने योग्य दान-पुण्य

इस माह में दान का विशेष महत्व बताया गया है। निम्नलिखित दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है:

  • जल दान: प्याऊ लगवाना या पानी की व्यवस्था करना
  • छत्र दान: धूप से बचाव के लिए छत्र देना
  • फल दान: मौसमी फलों का दान करना
  • वस्त्र दान: सूती वस्त्र देना श्रेष्ठ माना गया है

ज्येष्ठ माह की विशेष पूजा विधि

इस माह में निम्नलिखित पूजा विधियाँ विशेष फलदायी मानी गई हैं:

  • प्रात:काल सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें
  • सूर्यदेव को लाल फूल और अर्घ्य अर्पित करें
  • निम्न मंत्र का जप करें: “ॐ घृणि सूर्याय नम:”
  • शाम के समय तुलसी के पास दीपक जलाएँ

सारांश

ज्येष्ठ माह हिंदू धर्म में एक पवित्र और फलदायी माह माना जाता है। इस वर्ष इस माह में पड़ने वाला सूर्यग्रहण और विभिन्न व्रत-त्योहार इसकी महत्ता को और बढ़ा देते हैं। ग्रहण काल में सावधानियाँ बरतने और शास्त्रोक्त विधियों का पालन करने से अशुभ प्रभावों से बचा जा सकता है। ज्येष्ठ माह में किए गए दान, पूजा और व्रत से मनुष्य को धार्मिक और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं।

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