हनुमान अष्टक: संकटमोचन का पावन मंत्र
आज हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर पर, हर संकट से मुक्ति पाने के लिए संकटमोचन हनुमान अष्टक का पाठ करना विशेष फलदायी माना जाता है। यह अष्टक भगवान हनुमान की असीम कृपा प्राप्त करने का सरल मार्ग है। आइए जानें इस पावन स्तोत्र के महत्व, लाभ और मूल पाठ…
हनुमान अष्टक का महत्व
हनुमान अष्टक तुलसीदास जी द्वारा रचित एक प्रसिद्ध स्तोत्र है जिसमें 8 श्लोकों के माध्यम से हनुमान जी की महिमा का वर्णन किया गया है। इसका नियमित पाठ:
- सभी प्रकार के भय और संकटों से मुक्ति दिलाता है
- नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करता है
- आत्मविश्वास और साहस बढ़ाता है
- कुंडली के सभी दोषों का निवारण करता है
हनुमान अष्टक का पूरा पाठ (हिंदी अर्थ सहित)
प्रथम श्लोक
बाल समय रवि भक्षी लियो, तब तीनहुं लोक भयो अंधियारो॥
ताहि सों त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सों जात न टारो॥
अर्थ: बाल्यावस्था में सूर्य को निगल लेने से तीनों लोक अंधकारमय हो गए। इससे संसार को भय हुआ, ऐसे संकट को कोई नहीं टाल सकता।
द्वितीय श्लोक
देवन आनि करी बिनती तब, छाड़ि दियो रवि कष्ट निवारो॥
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥
अर्थ: देवताओं की प्रार्थना पर सूर्य को छोड़कर कष्ट हर लिया। संसार में कौन नहीं जानता कि आपका नाम ही संकटमोचन है।
हनुमान अष्टक पाठ की विधि
सरल पूजन विधि
- सुबह स्नानादि से निवृत्त होकर लाल वस्त्र धारण करें
- हनुमान जी की मूर्ति/चित्र के समक्ष आसन लगाएं
- सिंदूर और लाल फूल अर्पित करें
- धूप-दीप जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें
- अंत में हनुमान अष्टक का 11 बार जाप करें
विशेष टिप्स
मंगलवार और शनिवार को इस पाठ का विशेष महत्व है। संकट निवारण हेतु 21 दिनों तक नियमित पाठ करना चाहिए।
हनुमान अष्टक के आध्यात्मिक लाभ
मानसिक शांति
इस पाठ से मन की चंचलता दूर होती है और एकाग्रता बढ़ती है। विद्यार्थियों के लिए यह विशेष लाभकारी है।
कालसर्प दोष निवारण
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हनुमान अष्टक का नियमित पाठ कालसर्प दोष के प्रभाव को कम करता है।
हनुमान जन्मोत्सव पर विशेष
चैत्र मास की पूर्णिमा को मनाए जाने वाले हनुमान जयंती पर इस अष्टक का पाठ करने से आजीवन संकटों से रक्षा होती है। इस दिन:
- हनुमान मंदिर में घी का दीपक जलाएं
- बजरंगबली को बेसन के लड्डू का भोग लगाएं
- संकटमोचन कीर्तन करें
निष्कर्ष
हनुमान अष्टक भक्ति और शक्ति का अद्भुत संगम है। यह स्तोत्र न केवल संकटों से मुक्ति दिलाता है, बल्कि आत्मबल भी प्रदान करता है। हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर पर इस पाठ को अपनी दिनचर्या में अवश्य सम्मिलित करें। जय हनुमान, जय संकटमोचन!
