हरियाली अमावस्या हिंदू धर्म में एक विशेष स्थान रखती है। यह त्योहार वर्षा ऋतु के आगमन और प्रकृति के हरे-भरे रूप का प्रतीक है। श्रावण मास की अमावस्या को मनाया जाने वाला यह पर्व भगवान शिव और प्रकृति की पूजा का संगम है।
हरियाली अमावस्या 2025 की तिथि और समय
- तिथि: 25 जुलाई 2025, रविवार
- अमावस्या प्रारंभ: 24 जुलाई 2025 को रात 10:42 बजे
- अमावस्या समाप्त: 25 जुलाई 2025 को रात 08:42 बजे
2025 में बन रहे हैं 3 शुभ योग
1. अमृत सिद्धि योग
इस योग में किए गए सभी पुण्य कर्म फलदायी माने जाते हैं। पूजा-पाठ और दान का विशेष महत्व है।
2. रवि योग
सूर्य देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस दिन सूर्योदय के समय जल अर्पित करने से आरोग्य लाभ मिलता है।
3. सर्वार्थ सिद्धि योग
यह योग सभी मनोकामनाओं की पूर्ति में सहायक है। इस दिन पीपल के वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व है।
हरियाली अमावस्या से जुड़ी 9 महत्वपूर्ण बातें
1. प्रकृति पूजन का पर्व
इस दिन वृक्षारोपण और पौधों की देखभाल को धार्मिक महत्व दिया जाता है।
2. पितृ तर्पण का विशेष अवसर
अमावस्या तिथि पर पितरों को जल अर्पित करने से उन्हें शांति मिलती है।
3. शिव पूजन का महत्व
श्रावण मास होने के कारण भगवान शिव की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।
4. गंगा स्नान का पुण्य
इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है।
5. दान का विशेष महत्व
- काले तिल का दान
- कम्बल या वस्त्र दान
- नमक और गुड़ का दान
6. व्रत विधि
इस दिन उपवास रखकर शाम को चंद्रमा के दर्शन के बाद ही भोजन करना चाहिए।
7. मंत्र साधना
इस दिन निम्न मंत्र का जाप विशेष फलदायी है:
“ॐ नमः शिवाय” (108 बार जाप)
“ॐ पितृ देवाय नमः” (पितृ तर्पण के समय)
8. पीपल पूजन
पीपल के वृक्ष की परिक्रमा करने और दीपक जलाने से घर में सुख-समृद्धि आती है।
9. घर में सुख-शांति के उपाय
- तुलसी के पौधे में जल अर्पित करें
- घर के मुख्य द्वार पर आम के पत्तों का तोरण लगाएं
- गाय को हरा चारा खिलाएं
हरियाली अमावस्या की कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन माता पार्वती ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की थी। प्रकृति ने उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर हरियाली का वरदान दिया था।
हरियाली अमावस्या पर विशेष पूजा विधि
- प्रातःकाल सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें
- साफ वस्त्र धारण कर पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें
- भगवान शिव, माता पार्वती और पितृ देवताओं की पूजा करें
- पीपल के वृक्ष को जल अर्पित कर दीपक जलाएं
- ब्राह्मण को भोजन कराएं और दान दें
हरियाली अमावस्या के शुभ रंग
इस दिन हरा रंग धारण करना शुभ माना जाता है। यह रंग प्रकृति और समृद्धि का प्रतीक है।
हरियाली अमावस्या का पर्व हमें प्रकृति से जुड़ने और पितृ ऋण से मुक्त होने का अवसर प्रदान करता है। इस दिन किए गए पुण्य कर्मों से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि का आगमन होता है। आइए, हम सभी इस पावन अवसर पर प्रकृति की रक्षा का संकल्प लें और धार्मिक परंपराओं का पालन करें।
ध्यान दें: सभी धार्मिक कार्य विद्वान ब्राह्मणों की देखरेख में ही करने चाहिए। मंत्रों का उच्चारण सही उच्चारण के साथ ही करें।
