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Kaal Bhairav Jayanti 2025 काल भैरव जयंती आज पाठ भैरव चालीसा

काल भैरव जयंती 2025 पर बाबा काल भैरव की कृपा पाने के लिए भैरव चालीसा का पाठ करें। जानें पूजा विधि, मंत्र और महत्व। आज ही आशीर्वाद प्राप्त करें!

Published October 31, 2026
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5 Min Read

Kaal Bhairav Jayanti 2025: काल भैरव जयंती की महिमा और पूजा विधि

आज का दिन भक्तों के लिए अत्यंत पावन और विशेष है क्योंकि आज काल भैरव जयंती मनाई जा रही है। यह पर्व भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव की जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भैरव चालीसा का पाठ करने से बाबा काल भैरव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और सभी प्रकार के भय व संकटों से मुक्ति मिलती है। आइए जानते हैं इस पावन पर्व की महिमा, पूजा विधि और भैरव चालीसा के महत्व के बारे में विस्तार से।

Contents
Kaal Bhairav Jayanti 2025: काल भैरव जयंती की महिमा और पूजा विधिकाल भैरव जयंती का महत्वकाल भैरव जयंती पूजा विधिभैरव चालीसा का महत्वभैरव चालीसा (संक्षिप्त अंश)काल भैरव जयंती की कथाकाल भैरव जयंती पर विशेष उपायनिष्कर्ष

काल भैरव जयंती का महत्व

हिंदू पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को काल भैरव जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष यह पर्व 2025 में [तिथि डालें] को मनाया जा रहा है। शास्त्रों में काल भैरव को काशी का कोतवाल और शिव का गण माना गया है। इनकी उपासना से न केवल भक्तों को आत्मिक शांति मिलती है बल्कि जीवन के सभी कष्टों का नाश भी होता है।

  • काल भैरव की कृपा से भक्तों को भूत-प्रेत बाधा से मुक्ति मिलती है
  • इनकी पूजा से काले जादू और नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव खत्म होता है
  • न्याय के देवता के रूप में काल भैरव भक्तों को अन्याय से सुरक्षा प्रदान करते हैं

काल भैरव जयंती पूजा विधि

इस दिन प्रातःकाल स्नान आदि से निवृत्त होकर भक्तों को साफ-सुथरे वस्त्र धारण करने चाहिए। पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करके लाल या काले रंग का कपड़ा बिछाएं। काल भैरव की मूर्ति या यंत्र स्थापित करें और निम्न विधि से पूजा करें:

  • सर्वप्रथम भगवान गणेश का स्मरण करें
  • काल भैरव को काले तिल, उड़द की दाल और सरसों का तेल अर्पित करें
  • धूप, दीप, फल, फूल और मिष्ठान से पूजा करें
  • भैरव चालीसा और काल भैरव अष्टक का पाठ करें
  • रात्रि में भैरव कथा सुनें और जागरण करें

भैरव चालीसा का महत्व

काल भैरव जयंती के पावन अवसर पर भैरव चालीसा का पाठ विशेष फलदायी माना जाता है। यह चालीसा भगवान काल भैरव की महिमा और उनके भक्तों पर कृपा का वर्णन करती है। नियमित रूप से इस चालीसा का पाठ करने से:

  • जीवन के सभी संकट दूर होते हैं
  • धन-धान्य की कमी नहीं रहती
  • शत्रुओं का भय समाप्त होता है
  • मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं

भैरव चालीसा (संक्षिप्त अंश)

॥ दोहा ॥
नमो श्री कालभैरवाय, भक्तन हितकारी।
दुष्ट दलन दीननाथ, करहु मम उधारी॥

॥ चौपाई ॥
जय जय काल भैरव देवा, करहु सदा भक्तन सेवा।
भूत प्रेत पिशाच बाधा, दूर करहु हरहु सब व्याधा॥

(यहां पूर्ण भैरव चालीसा जोड़ें या पाठकों को विस्तृत चालीसा के लिए लिंक प्रदान करें)

काल भैरव जयंती की कथा

पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार, एक बार ब्रह्मा और विष्णु के बीच श्रेष्ठता को लेकर विवाद हो गया। तब भगवान शिव ने काल भैरव के रूप में अवतार लेकर ब्रह्मा के पांचवें सिर को काट दिया। ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए काल भैरव को काशी में आकर प्रायश्चित करना पड़ा। तभी से काल भैरव काशी के कोतवाल कहलाए और भक्तों के रक्षक बन गए।

काल भैरव जयंती पर विशेष उपाय

इस पावन दिन पर कुछ विशेष उपाय करने से बाबा काल भैरव की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है:

  • काले कुत्ते को रोटी खिलाएं – काल भैरव का वाहन काले कुत्ते को माना जाता है
  • मंदिर में काले वस्त्र या उड़द की दाल का दान करें
  • शिवलिंग पर काले तिल और जल से अभिषेक करें
  • किसी गरीब को भोजन कराएं

निष्कर्ष

काल भैरव जयंती का पर्व भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस दिन पूरे विधि-विधान से बाबा काल भैरव की पूजा-अर्चना करने और भैरव चालीसा का पाठ करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं। बाबा काल भैरव अपने भक्तों पर सदैव कृपा बनाए रखते हैं और उन्हें हर प्रकार के संकट से रक्षा प्रदान करते हैं। आइए इस पावन अवसर पर हम सभी भक्ति भाव से बाबा काल भैरव का स्मरण करें और उनकी कृपा प्राप्त करें।

काल भैरव की जय! हर हर महादेव!

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