कजरी तीज 2025: तिथि, मुहूर्त, व्रत विधि और पौराणिक महत्व
हिंदू धर्म में तीज का पर्व विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं के लिए समर्पित है। इनमें कजरी तीज का विशेष स्थान है, जो भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। यह व्रत सौभाग्य, संतान सुख और पति की दीर्घायु के लिए रखा जाता है। आइए जानते हैं 2025 में कजरी तीज कब है, इसका शुभ मुहूर्त, व्रत विधि और पौराणिक महत्व।
कजरी तीज 2025 की तिथि और मुहूर्त
- तिथि: 15 अगस्त 2025, शुक्रवार
- तृतीया तिथि प्रारंभ: 14 अगस्त 2025 को रात 10:32 बजे
- तृतीया तिथि समाप्त: 15 अगस्त 2025 को रात 08:14 बजे
- व्रत का शुभ मुहूर्त: सुबह 06:12 बजे से शाम 07:45 बजे तक
ध्यान रखें: उपरोक्त समय भारतीय मानक समय (IST) के अनुसार है। स्थानीय पंचांग के अनुसार तिथि और मुहूर्त में अंतर हो सकता है।
कजरी तीज का धार्मिक महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, कजरी तीज का संबंध माता पार्वती और भगवान शिव के पुनर्मिलन से है। कहा जाता है कि इसी दिन माता पार्वती ने 108वें जन्म में कठोर तपस्या कर शिव को पति रूप में प्राप्त किया था। यह व्रत सुहागिनों के लिए सोलह श्रृंगार का प्रतीक है और इसे “बूढ़ी तीज” भी कहते हैं।
कजरी तीज के प्रमुख रीति-रिवाज
- कजरी गीत: महिलाएं झूला झूलते हुए मनमोहक कजरी गीत गाती हैं।
- सिंधारा देना: सास अपनी बहू को वस्त्र, मिठाई और श्रृंगार सामग्री भेंट करती हैं।
- नीरजा पूजन: इस दिन नीम की पूजा कर उसकी डालियों से झूला बनाया जाता है।
कजरी तीज व्रत विधि (विस्तृत विवरण)
व्रत से एक दिन पहले की तैयारी
- स्नानादि से निवृत्त होकर घर की साफ-सफाई करें।
- पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
- मिट्टी से शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाएं या कलश स्थापित करें।
व्रत के दिन की पूजा विधि
- सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
- साफ वस्त्र पहनकर पूजा स्थल पर बैठें।
- कलश पर रोली से स्वस्तिक बनाएं और मौली बांधें।
- निम्न मंत्र से आह्वान करें: “ॐ नमः शिवायै नमः”
- शिव-पार्वती को धूप, दीप, फल, फूल और बेलपत्र अर्पित करें।
- कथा सुनने के बाद आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
व्रत का पारण (समापन)
अगले दिन सुबह स्नान के बाद ब्राह्मण या किसी सुहागिन को सिंधारा (उपहार) देकर ही व्रत तोड़ें। इस दिन सात्विक भोजन ही ग्रहण करें।
कजरी तीज की विशेष कथा
पुराणों में वर्णित है कि एक बार माता पार्वती ने अपने पिता के घर जाकर कजरी तीज का व्रत रखा। उन्होंने नीम के पेड़ के नीचे बैठकर शिव की आराधना की। प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और पति के रूप में वरदान दिया। तभी से यह व्रत पति की दीर्घायु के लिए रखा जाने लगा।
कजरी तीज के विशेष उपाय
- इस दिन नीम की पत्तियों का सेवन करने से स्वास्थ्य लाभ मिलता है।
- व्रत के समय “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।
- पति-पत्नी साथ बैठकर पूजा करें तो वैवाहिक जीवन सुखमय रहता है।
निष्कर्ष
कजरी तीज का पर्व हमें सौभाग्य, धैर्य और समर्पण का संदेश देता है। यह न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि सामाजिक सद्भाव का भी प्रतीक है। 2025 में यह पर्व 15 अगस्त को मनाया जाएगा। सही विधि से व्रत रखकर आप भी माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त कर सकती हैं।
शिव-पार्वती की कृपा से आपका वैवाहिक जीवन सुखद और समृद्धिशाली हो, यही हमारी कामना है। हर हर महादेव!
