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Kartik Purnima 2025: कार्तिक पूर्णिमा क्यों है त्रिपुरारी पूर्णिमा

कार्तिक पूर्णिमा 2025 को त्रिपुरारी पूर्णिमा क्यों कहते हैं? जानिए इस पावन दिन की पौराणिक कथा, महत्व और पूजा विधि। इस दिन के व्रत और रीति-रिवाज़ों के बारे में सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करें।

Published July 2, 2026
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4 Min Read

कार्तिक पूर्णिमा 2025: त्रिपुरारी पूर्णिमा की पावन कथा और महत्व

हिंदू धर्म में कार्तिक पूर्णिमा का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। यह पर्व केवल चंद्रमा की पूर्णता का प्रतीक नहीं, बल्कि दैवीय कृपा और आत्मशुद्धि का अवसर है। 2025 में यह पावन तिथि 12 नवंबर को मनाई जाएगी। इस लेख में जानिए क्यों इसे त्रिपुरारी पूर्णिमा कहते हैं, इससे जुड़ी पौराणिक कथा और स्नान-दान के नियम।

Contents
कार्तिक पूर्णिमा 2025: त्रिपुरारी पूर्णिमा की पावन कथा और महत्वत्रिपुरारी पूर्णिमा नाम का रहस्यत्रिपुरासुर वध की पौराणिक कथाराक्षस की तपस्या और वरदानअत्याचार और देवताओं की पीड़ाशिवजी की विजयकार्तिक पूर्णिमा का धार्मिक महत्वपापों से मुक्ति का द्वारविशेष पूजा विधान2025 में कार्तिक पूर्णिमा का मुहूर्तआधुनिक समय में प्रासंगिकतापर्यावरण संरक्षण का संदेशनिष्कर्ष

त्रिपुरारी पूर्णिमा नाम का रहस्य

शास्त्रों में इस दिन को “त्रिपुरारी पूर्णिमा” नाम देने के पीछे एक रोचक कारण है:

  • त्रिपुरासुर नामक राक्षस ने तीन पुरों (लोहा, चाँदी और सोने के नगर) का निर्माण कर स्वर्ग पर आक्रमण किया था
  • देवताओं की प्रार्थना पर भगवान शिव ने इसी दिन त्रिपुरासुर का वध किया
  • शिवजी के इस विजयोत्सव को “त्रिपुरारी” (त्रिपुर के शत्रु) के रूप में मनाया जाता है

त्रिपुरासुर वध की पौराणिक कथा

राक्षस की तपस्या और वरदान

पुराणों के अनुसार, तारकासुर के पुत्र त्रिपुरासुर ने कठोर तप कर ब्रह्माजी को प्रसन्न किया। वरदान में उसने तीन अद्भुत पुरों (नगरों) की माँग की जो:

  • पृथ्वी, आकाश और पाताल में विचरण कर सकें
  • केवल एक ही बाण से तीनों नष्ट होने पर ही उसकी मृत्यु हो
  • 1000 वर्षों तक कोई उसे पराजित न कर सके

अत्याचार और देवताओं की पीड़ा

वरदान पाकर त्रिपुरासुर ने तीनों लोकों में आतंक मचा दिया:

  • ऋषि-मुनियों के यज्ञों को भंग किया
  • देवताओं को स्वर्ग से खदेड़ दिया
  • पृथ्वीवासियों पर अमानवीय अत्याचार किए

शिवजी की विजय

सभी देवता भगवान विष्णु के पास गए। विष्णुजी ने बताया कि केवल महादेव ही इस राक्षस का वध कर सकते हैं। कार्तिक पूर्णिमा के दिन:

  • शिवजी ने अर्धचन्द्राकार रथ पर सवार होकर युद्ध किया
  • विश्वकर्मा द्वारा निर्मित दिव्य धनुष से एक ही बाण छोड़ा
  • बाण ने तीनों पुरों को भेदकर त्रिपुरासुर का अंत किया

कार्तिक पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

पापों से मुक्ति का द्वार

इस दिन के संबंध में स्कन्द पुराण में वर्णित है:

  • कार्तिक स्नान से सभी युगों के पाप धुल जाते हैं
  • गंगा स्नान करने वाला व्यक्ति “ऋषि कोटि तप” का फल पाता है
  • दीपदान करने से पितृगण की आत्मा को शांति मिलती है

विशेष पूजा विधान

इस दिन निम्न कर्मों का विशेष महत्व है:

  • प्रभात स्नान: ब्रह्ममुहूर्त में गंगाजल युक्त जल से स्नान
  • तुलसी पूजा: तुलसी के पौधे में दीपक जलाकर 108 परिक्रमा
  • मंत्र जाप: “ॐ नमः शिवाय” या “ॐ ह्रीं क्लीं सौः” का उच्चारण

2025 में कार्तिक पूर्णिमा का मुहूर्त

ज्योतिषियों के अनुसार, 2025 में यह पर्व निम्न समय पर मनाया जाएगा:

  • पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 11 नवंबर 2025, रात 09:42 बजे
  • पूर्णिमा तिथि समाप्त: 12 नवंबर 2025, रात 11:24 बजे
  • स्नान-दान का शुभ मुहूर्त: 12 नवंबर, प्रातः 05:38 से 07:21 तक

आधुनिक समय में प्रासंगिकता

पर्यावरण संरक्षण का संदेश

इस पर्व की कुछ परंपराएं आज भी प्रेरणादायक हैं:

  • नदियों की शुद्धता बनाए रखने का संकल्प
  • तुलसी पूजा के माध्यम से वृक्षारोपण को प्रोत्साहन
  • दीपदान से प्रकाश प्रदूषण रहित उत्सव मनाना

निष्कर्ष

कार्तिक पूर्णिमा अंधकार पर प्रकाश, अधर्म पर धर्म और अज्ञान पर ज्ञान की विजय का प्रतीक है। 2025 में इस पावन अवसर पर हम सभी को:

  • आत्मशुद्धि के लिए स्नान-ध्यान करना चाहिए
  • पितृगणों की मुक्ति हेतु दान-पुण्य करना चाहिए
  • शिवजी के त्रिपुरारी रूप का स्मरण कर अहंकार त्यागना चाहिए

जैसे शिवजी ने त्रिपुरासुर के अहंकार को चूर-चूर किया, वैसे ही हमें अपने अंदर के राक्षसी विकारों को समाप्त करना चाहिए। यही इस पर्व का सच्चा संदेश है।

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