क्या होता है खरमास और कब-कब लगता है? जानिए इस दौरान क्या करना शुभ और लाभकारी
हिंदू धर्म में माह के विशेष समय को खरमास या मलमास कहा जाता है। यह वह अवधि होती है जब सूर्य देवता धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं। इस समय को शुभ कार्यों के लिए अशुभ माना जाता है, लेकिन भक्ति और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। आइए, विस्तार से जानते हैं कि खरमास 2025 कब लगेगा, इसका महत्व और इस दौरान क्या करना चाहिए।
खरमास क्या होता है?
खरमास संस्कृत के दो शब्दों “खर” (गधा) और “मास” (महीना) से मिलकर बना है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में सूर्य देवता एक गधे पर सवार होकर यात्रा करते हैं, इसलिए इसे खरमास कहा जाता है। यह समय लगभग एक महीने तक रहता है और इसमें मांगलिक कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है।
- खरमास को मलमास या अधिकमास भी कहा जाता है।
- इस दौरान सूर्य देव की गति मंद हो जाती है, इसलिए इसे अशुभ समय माना जाता है।
- लेकिन यह समय भक्ति, व्रत और दान के लिए अत्यंत शुभ होता है।
खरमास 2025: कब लगेगा?
साल 2025 में खरमास 16 दिसंबर से शुरू होकर 14 जनवरी 2026 तक रहेगा। इस दौरान सूर्य देव धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेंगे। यह समय विशेष रूप से भगवान विष्णु और शिव की आराधना के लिए उत्तम माना जाता है।
खरमास के दौरान क्या न करें?
खरमास के समय कुछ कार्यों को करने से बचना चाहिए क्योंकि इन्हें अशुभ माना जाता है:
- विवाह, मुंडन, गृहप्रवेश जैसे मांगलिक कार्य न करें।
- नए व्यवसाय या नौकरी की शुरुआत टालें।
- बड़े निवेश या खरीदारी से बचें।
- अनावश्यक यात्राएं न करें।
खरमास में क्या करें? शुभ और लाभकारी उपाय
खरमास का समय आध्यात्मिक उन्नति के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। इस दौरान निम्नलिखित कार्य करने से आपको पुण्य और मानसिक शांति प्राप्त होगी:
1. भगवान विष्णु और शिव की आराधना
खरमास में भगवान विष्णु और शिवजी की पूजा विशेष फलदायी होती है। निम्न मंत्रों का जाप करें:
- विष्णु मंत्र: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
- शिव मंत्र: “ॐ नमः शिवाय”
2. दान-पुण्य करें
इस समय दान करने से कई गुना पुण्य प्राप्त होता है। निम्न चीजों का दान करना शुभ माना जाता है:
- गरीबों को कंबल, अनाज, वस्त्र दान दें।
- गाय को हरा चारा खिलाएं।
- तिल और गुड़ का दान करें।
3. व्रत और उपवास रखें
खरमास में व्रत रखने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। आप निम्न व्रत कर सकते हैं:
- एकादशी व्रत: विष्णु भगवान की कृपा पाने के लिए।
- सोमवार व्रत: शिवजी को प्रसन्न करने के लिए।
- सूर्य अर्घ्य: प्रतिदिन सूर्य को जल चढ़ाएं।
4. पूजा-पाठ और सत्संग
इस समय भजन-कीर्तन और धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना लाभकारी होता है। आप निम्न कार्य कर सकते हैं:
- भागवत कथा या रामचरितमानस का पाठ सुनें।
- नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करें।
- संतों के प्रवचन सुनें और सत्संग में भाग लें।
5. पितृ तर्पण और श्राद्ध
यदि आपके परिवार में किसी की मृत्यु हुई है, तो खरमास में पितृ तर्पण करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे पितृ दोष शांत होता है।
निष्कर्ष
खरमास 2025 का समय 16 दिसंबर से 14 जनवरी तक रहेगा। यह अवधि मांगलिक कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं है, लेकिन भक्ति, दान और साधना के लिए बेहद फलदायी है। इस दौरान भगवान विष्णु और शिव की आराधना करें, दान-पुण्य करें और व्रत रखकर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करें। याद रखें, खरमास में किए गए शुभ कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है।
आशा है कि यह जानकारी आपके लिए लाभकारी साबित होगी। हरि ओम!
