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Maa Kushmanda Aarti Navratri Chautha Din Aaj Maa Ko Prasann Karne Ke Liye Karen Ye Aarti

नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की आरती करने का सही तरीका जानें। इस आरती से प्रसन्न होकर मां देंगी धन, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद। पढ़ें पूजा विधि और आरती lyrics।

Published July 2, 2026
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4 Min Read

माँ कूष्मांडा आरती: नवरात्रि के चौथे दिन की पावन आराधना

नवरात्रि का चौथा दिन माँ दुर्गा के चौथे स्वरूप माँ कूष्मांडा की आराधना का विशेष दिन होता है। यह वह दिन है जब भक्तजन माँ के उस रूप की पूजा करते हैं जिन्होंने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड को उत्पन्न किया। इस लेख में हम माँ कूष्मांडा की आरती, उनकी महिमा और पूजा विधि के बारे में विस्तार से जानेंगे।

Contents
माँ कूष्मांडा आरती: नवरात्रि के चौथे दिन की पावन आराधनामाँ कूष्मांडा: देवी का चौथा स्वरूपमाँ कूष्मांडा आरती: पूर्ण पाठ एवं अर्थआरती करने की विधिमाँ कूष्मांडा की पूजा का महत्वमाँ कूष्मांडा की कथाविशेष उपाय एवं मंत्रनिष्कर्ष

माँ कूष्मांडा: देवी का चौथा स्वरूप

नवदुर्गा के चौथे स्वरूप में प्रकट हुईं माँ कूष्मांडा को सृष्टि की आदि शक्ति माना जाता है। इनका नामकरण दो शब्दों से मिलकर हुआ है – ‘कूष्म’ (अर्थात कुटुम्ब या ब्रह्मांड) और ‘अंडा’ (अर्थात अंड)। मान्यता है कि इन्होंने ही ब्रह्मांड रूपी अंडे को अपनी दिव्य मुस्कान से उत्पन्न किया था।

  • वाहन: सिंह
  • शस्त्र: कमल, अक्षमाला, चक्र और गदा
  • रंग: लाल (इनकी पूजा में लाल वस्त्रों का विशेष महत्व)
  • प्रसाद: मालपुआ और घी का भोग

माँ कूष्मांडा आरती: पूर्ण पाठ एवं अर्थ

नवरात्रि के चौथे दिन प्रातःकाल या संध्या के समय यह आरती करने का विशेष महत्व है:

जय कूष्मांडा माता, जय अम्बे सुखदाता।
तेरे नाम से ही होत, भक्तों के कष्ट जाता॥

तेरी महिमा अपार, ना जाने कोई पार।
ब्रह्मांड तुमने बनाया, दिया सबको आधार॥

कमल पर विराजत हो, करती हो कल्याण।
भक्तों की सुन लो माता, कर दो मनोकामना पूर्ण॥

माँ तुम्हारी कृपा से, घर आती है शान्ति।
रोग-शोक मिट जाते, होती है सबकी भक्ति॥

कूष्मांडा माँ की आरती, जो कोई नर गावे।
उसके सब कष्ट हरती, मनवांछित फल पावे॥

आरती करने की विधि

  • स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
  • लाल रंग का आसन बिछाकर माँ की प्रतिमा/चित्र स्थापित करें
  • लाल फूल, अक्षत, रोली से माँ का श्रृंगार करें
  • घी का दीपक जलाएं और धूप-दीप दिखाएं
  • मालपुआ या मीठे भोग का प्रसाद चढ़ाएं
  • पूर्ण श्रद्धा से आरती गाएं और परिक्रमा करें

माँ कूष्मांडा की पूजा का महत्व

नवरात्रि के चौथे दिन माँ कूष्मांडा की पूजा करने से भक्तों को अद्भुत लाभ प्राप्त होते हैं:

  • सूर्य नाड़ी संबंधी रोगों से मुक्ति मिलती है
  • आत्मविश्वास और आंतरिक शक्ति में वृद्धि होती है
  • कुंडलिनी शक्ति जागृत होने में सहायता मिलती है
  • मानसिक शांति और स्थिरता प्राप्त होती है
  • सौभाग्य और समृद्धि में वृद्धि होती है

माँ कूष्मांडा की कथा

पुराणों के अनुसार जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था, तब माँ कूष्मांडा ने अपनी दिव्य मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की। इन्हें आदि शक्ति का प्रतीक माना जाता है जो निराकार ब्रह्म का साकार रूप हैं। इनकी आठ भुजाएँ ब्रह्मांड के आठ दिशाओं का प्रतिनिधित्व करती हैं।

विशेष उपाय एवं मंत्र

माँ कूष्मांडा को प्रसन्न करने के लिए इन मंत्रों का जाप करें:

ॐ देवी कूष्मांडायै नमः॥
(मूल मंत्र - 108 बार जाप)

या देवी सर्वभूतेषु कूष्मांडा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
(स्तुति मंत्र)

निष्कर्ष

नवरात्रि का चौथा दिन हमें माँ कूष्मांडा के दिव्य स्वरूप की आराधना का अवसर देता है। यह वह दिन है जब हम उस सर्वव्यापी शक्ति को नमन करते हैं जिसने अपनी मुस्कान से सम्पूर्ण सृष्टि को जन्म दिया। माँ की इस आरती को पूर्ण श्रद्धा से गाकर हर भक्त माँ का आशीर्वाद प्राप्त कर सकता है। आइए, इस पावन अवसर पर माँ कूष्मांडा की कृपा पाने के लिए इस आरती को पूरे भक्तिभाव से गाएं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।

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