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माघ पूर्णिमा 2025: कल है पावन पर्व, जानिए इसकी महिमा और पूजन विधि
भारतीय संस्कृति में पूर्णिमा के दिन का विशेष धार्मिक महत्व होता है, और माघ मास की पूर्णिमा तो सबसे पवित्र मानी जाती है। 16 फरवरी 2025, रविवार को मनाए जाने वाले इस पर्व में गंगा स्नान, दान-पुण्य और भगवान विष्णु की आराधना का विधान है। आइए जानते हैं क्यों है यह तिथि इतनी खास और कैसे करें इसकी पूजा…
माघ पूर्णिमा 2025 का शुभ मुहूर्त
- पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 15 फरवरी 2025 को रात 09:57 बजे
- पूर्णिमा तिथि समाप्त: 16 फरवरी 2025 को रात 11:44 बजे
- स्नान दान का श्रेष्ठ समय: 16 फरवरी सुबह 05:30 से 07:30 तक
क्यों कहते हैं इसे ‘माघी पूर्णिमा’?
हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ मास की पूर्णिमा पर सूर्य देव मकर राशि से कुंभ राशि में प्रवेश करते हैं। पुराणों में इसे “देवताओं का दिन” कहा गया है। इस दिन गंगा तट पर किया गया स्नान 10 हजार अश्वमेध यज्ञ के बराबर फल देता है।
माघ पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
1. पापों से मुक्ति का द्वार
स्कंद पुराण में वर्णित है कि इस दिन गंगा जल में स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं। कहते हैं स्वयं देवगण इस दिन पृथ्वी पर आकर पुण्य कर्म करते हैं।
2. त्रिदेवों का आशीर्वाद
- ब्रह्मा जी – सृष्टि का आशीर्वाद
- विष्णु जी – पालन शक्ति का वरदान
- शिव जी – संहार के भय से मुक्ति
3. पितृ तर्पण का विशेष अवसर
इस दिन तिल और जल से पितरों का तर्पण करने से वे प्रसन्न होकर वंश की रक्षा करते हैं। गरुड़ पुराण में इसका विस्तृत वर्णन मिलता है।
माघ पूर्णिमा पूजन विधि
सुबह की रीति
- प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठें
- स्नान से पूर्व तिल के उबटन से शरीर शुद्धि करें
- गंगाजल मिले जल से स्नान करें (न हो तो “ॐ गंगायै नमः” मंत्र जपें)
- सूर्य को अर्घ्य देते हुए इस मंत्र का उच्चारण करें:
“ॐ सूर्याय नमः, ॐ सप्तसुरभये नमः”
पूजा सामग्री
- लाल वस्त्र (विष्णु भगवान को अर्पित करें)
- तिल, खीर, गुड़ (दान हेतु)
- पीले पुष्प, चंदन, धूप-दीप
- सत्यनारायण कथा पुस्तक
विशेष पूजा विधान
घर के मंदिर में विष्णु जी की मूर्ति या शालिग्राम स्थापित करें। “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र से आवाहन करें। तिल के लड्डू या खीर का भोग लगाएं। संध्या समय दीपदान अवश्य करें।
माघ पूर्णिमा के 5 विशेष दान
- तिल दान: काले तिल किसी ब्राह्मण को दें (पितृ दोष शांति हेतु)
- वस्त्र दान: नए वस्त्र दान से लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं
- अन्न दान: गरीबों को गेहूं/चावल दान करें
- घृत दान: शुद्ध घी दान से आयु बढ़ती है
- स्वर्ण दान: सोना दान करने से महापापों से मुक्ति मिलती है
माघ पूर्णिमा व्रत कथा
पद्म पुराण के अनुसार, सतयुग में एक गरीब ब्राह्मण ने इस दिन विष्णु जी का व्रत रखा था। संध्या समय उसने अपने घर आए अतिथि (विष्णु के रूप में) को भोजन कराया। प्रसन्न होकर भगवान ने उसे अगले जन्म में चक्रवर्ती सम्राट बनने का वरदान दिया।
आधुनिक जीवन में माघ पूर्णिमा
यदि आप व्यस्तता के कारण पूर्ण विधि न कर पाएं, तो ये सरल उपाय करें:
- घर पर ही गंगाजल छिड़क कर स्नान करें
- मोबाइल/लैपटॉप पर विष्णु सहस्रनाम सुनें
- ऑनलाइन किसी गरीब छात्र की फीस जमा कर दान करें
- पौधारोपण कर पृथ्वी दान का पुण्य लें
निष्कर्ष
माघ पूर्णिमा का पर्व हमें प्रकृति और ईश्वर के साथ जुड़ने का अवसर देता है। 16 फरवरी 2025 को इस पावन तिथि पर थोड़ा समय निकालकर पूजा-अर्चना अवश्य करें। याद रखें, श्रद्धा से किया गया छोटा सा भी पुण्य कर्म, भगवान को अति प्रिय होता है।
आप सभी को माघ पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं! माघ स्नान की जय! हरि ओम!
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