मासिक शिवरात्रि हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। यह दिन भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। सितंबर 2025 की मासिक शिवरात्रि भक्तों के लिए एक पावन अवसर है, जिसमें शिवजी की कृपा पाने के लिए विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है।
क्यों मनाते हैं मासिक शिवरात्रि?
- शिव पुराण के अनुसार, इस दिन भगवान शिव ने समुद्र मंथन से निकले विष का पान किया था।
- इस तिथि पर शिवलिंग की पूजा करने से सभी पापों का नाश होता है।
- मासिक शिवरात्रि व्रत रखने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
सितंबर 2025 मासिक शिवरात्रि: शुभ मुहूर्त और तिथि
तिथि: 12 सितंबर 2025 (शुक्रवार)
चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 11 सितंबर को रात 10:15 बजे
चतुर्दशी तिथि समाप्त: 12 सितंबर को रात 11:45 बजे
शुभ पूजा समय: प्रातः 5:30 बजे से 8:30 बजे तक
क्या करें इस दिन?
- प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- शिवलिंग या शिवजी की मूर्ति को गंगाजल से स्नान कराएं।
- दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें।
मासिक शिवरात्रि पूजा विधि
स्टेप 1: संकल्प लें
सर्वप्रथम पूजा स्थल पर बैठकर संकल्प लें:
“मम सर्वपापक्षयपूर्वक शिवप्रीत्यर्थं मासिक शिवरात्रि व्रतमहं करिष्ये।”
स्टेप 2: शिवलिंग अभिषेक
शिवलिंग पर निम्नलिखित चीजों से अभिषेक करें:
- दूध: पवित्रता के लिए
- दही: समृद्धि के लिए
- शहद: आरोग्य के लिए
- गंगाजल: पापनाश के लिए
स्टेप 3: शिव आरती और मंत्र जाप
अभिषेक के बाद निम्न मंत्रों का जाप करें:
“ॐ नमः शिवाय” (108 बार)
“महामृत्युंजय मंत्र” (11 बार)
मासिक शिवरात्रि व्रत कथा
प्राचीन काल में एक गरीब शिकारी था। एक बार मासिक शिवरात्रि के दिन वह जंगल में भटक गया। रात को वह एक बेल के पेड़ पर चढ़कर बैठ गया और अनजाने में बेलपत्र नीचे गिरते रहे। नीचे एक शिवलिंग था, जिस पर ये पत्र गिरे। इससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसे दर्शन दिए और उसके जीवन को धन्य कर दिया।
मासिक शिवरात्रि पर विशेष उपाय
- रुद्राक्ष धारण करें: इस दिन रुद्राक्ष की माला पहनने से शिव कृपा प्राप्त होती है।
- दान करें: गरीबों को भोजन, वस्त्र या अनाज दान करें।
- जागरण करें: रात्रि में शिव भजन-कीर्तन करते हुए जागरण करना शुभ होता है।
मासिक शिवरात्रि का पर्व भक्तों के लिए भगवान शिव की कृपा पाने का सुनहरा अवसर है। सितंबर 2025 की मासिक शिवरात्रि पर श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और शिवजी की असीम कृपा प्राप्त होती है।
“हर हर महादेव, शंभो शंकर गंगाधार।
जय भोले नाथ, जय भोले नाथ॥”
