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Mokshada Ekadashi 2025 आज मोक्षदा एकादशी पर मिलेगी श्रीहरि विष्णु की कृपा

मोक्षदा एकादशी 2025 पर श्रीहरि विष्णु की कृपा पाने के लिए इन पावन मंत्रों का जाप करें। मोक्ष, धन और सुख की प्राप्ति के लिए जानें पूजा विधि और महत्व।

Published July 2, 2026
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5 Min Read

मोक्षदा एकादशी 2025: श्रीहरि विष्णु की असीम कृपा पाने का पावन अवसर

मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोक्षदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। यह वर्ष 2025 में [तिथि] को मनाई जाएगी। इस दिन व्रत रखकर श्रीहरि विष्णु के विशेष मंत्रों का जाप करने से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है और जीवन के सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है। आइए जानें इस पावन तिथि की महिमा, पूजा विधि और मोक्ष प्रदान करने वाले मंत्रों के बारे में।

Contents
मोक्षदा एकादशी 2025: श्रीहरि विष्णु की असीम कृपा पाने का पावन अवसरमोक्षदा एकादशी का महत्वमोक्षदा एकादशी की पौराणिक कथामोक्षदा एकादशी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्तमोक्षदा एकादशी व्रत विधिव्रत की तैयारीव्रत का दिनमोक्षदा एकादशी के विशेष मंत्र1. मोक्षदा एकादशी मूल मंत्र2. विष्णु गायत्री मंत्र3. मोक्ष प्रदान करने वाला मंत्रमोक्षदा एकादशी व्रत के लाभमोक्षदा एकादशी की विशेष पूजा सामग्रीमोक्षदा एकादशी पर विशेष सावधानियांमोक्षदा एकादशी व्रत कथा का श्रवणमोक्षदा एकादशी के बाद का दिन (द्वादशी)निष्कर्ष

मोक्षदा एकादशी का महत्व

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष स्थान है। मोक्षदा एकादशी को सभी एकादशियों में सर्वोत्तम माना गया है क्योंकि यह मनुष्य को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति दिलाती है। पद्म पुराण में वर्णित कथा के अनुसार, इस व्रत के प्रभाव से राजा युधिष्ठिर ने अपने पूर्वजों को मोक्ष दिलाया था।

मोक्षदा एकादशी की पौराणिक कथा

कथा के अनुसार, गोकुल नगर में वैखानस नामक एक राजा रहते थे। एक रात उन्हें स्वप्न में अपने पूर्वजों को नरक में कष्ट भोगते देखा। विद्वानों ने बताया कि मोक्षदा एकादशी का व्रत करने से ही उनकी मुक्ति संभव है। राजा ने विधि-विधान से व्रत किया और अपने पितरों को मोक्ष दिलाया।

मोक्षदा एकादशी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त

  • एकादशी तिथि प्रारंभ: [तिथि और समय]
  • एकादशी तिथि समाप्त: [तिथि और समय]
  • पारण का समय: [तिथि और समय]
  • उदयातिथि: [हाँ/नहीं]

मोक्षदा एकादशी व्रत विधि

व्रत की तैयारी

  • दशमी की रात से ही ब्रह्मचर्य का पालन करें
  • सात्विक भोजन ग्रहण करें और मन को शांत रखें
  • रात्रि में भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए सोएं

व्रत का दिन

  • प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें
  • स्वच्छ वस्त्र धारण कर पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें
  • भगवान विष्णु की मूर्ति या शालिग्राम स्थापित करें
  • धूप, दीप, फल, फूल और तुलसी दल से पूजा अर्चना करें

मोक्षदा एकादशी के विशेष मंत्र

इस दिन निम्नलिखित मंत्रों का जाप करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है:

1. मोक्षदा एकादशी मूल मंत्र

“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”

इस मंत्र का 108 बार जाप करने से सभी पापों का नाश होता है।

2. विष्णु गायत्री मंत्र

“ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णु प्रचोदयात्”

3. मोक्ष प्रदान करने वाला मंत्र

“ॐ नमो नारायणाय श्रीमते वासुदेवाय स्वाहा”

मोक्षदा एकादशी व्रत के लाभ

  • मोक्ष की प्राप्ति: इस व्रत से जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है
  • पितृ दोष निवारण: पूर्वजों को मोक्ष मिलता है
  • कष्टों से मुक्ति: जीवन के सभी संकट दूर होते हैं
  • धन-समृद्धि: भगवान विष्णु की कृपा से घर में सुख-शांति आती है

मोक्षदा एकादशी की विशेष पूजा सामग्री

  • तुलसी दल (बिना तोड़े गिरे हुए पत्ते)
  • केले के पत्ते
  • श्रीखंड चंदन
  • पीले फूल और आंकड़े के फूल
  • दीपक के लिए शुद्ध घी

मोक्षदा एकादशी पर विशेष सावधानियां

  • क्रोध, झूठ और किसी का अपमान करने से बचें
  • दिन भर ब्रह्मचर्य का पालन करें
  • सूर्यास्त के बाद अन्न ग्रहण न करें
  • व्रत के दिन चावल का सेवन वर्जित है

मोक्षदा एकादशी व्रत कथा का श्रवण

व्रत के दिन मोक्षदा एकादशी व्रत कथा का पाठ या श्रवण अवश्य करना चाहिए। यह कथा पढ़ने-सुनने मात्र से ही पुण्य की प्राप्ति होती है। कथा के अंत में भगवान विष्णु की आरती करके प्रसाद वितरण करें।

मोक्षदा एकादशी के बाद का दिन (द्वादशी)

द्वादशी को सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर ब्राह्मण को भोजन कराएं और दान-दक्षिणा दें। इसके बाद ही स्वयं भोजन ग्रहण करें। दान में निम्न वस्तुएं देना शुभ माना जाता है:

  • तिल, गुड़ और कंबल का दान
  • दीपक दान
  • भगवद्गीता का दान

निष्कर्ष

मोक्षदा एकादशी भगवान विष्णु को प्रसन्न करने का सर्वोत्तम अवसर है। इस दिन श्रद्धा भाव से व्रत रखकर उपरोक्त मंत्रों का जाप करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह व्रत न केवल हमें बल्कि हमारे पूर्वजों को भी मुक्ति दिलाता है। आइए, हम सभी इस पावन एकादशी पर भगवान नारायण की शरण में जाएं और उनकी असीम कृपा प्राप्त करें।

श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेवा।

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