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Mokshada Ekadashi December 2025 तिथि शुभ मुहूर्त पूजा विधि

मोक्षदा एकादशी 2025 की तिथि शुभ मुहूर्त और पूजा विधि जानें इस पावन दिन पर मोक्ष प्राप्ति के लिए महत्वपूर्ण जानकारी

Published July 2, 2026
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4 Min Read

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोक्षदा एकादशी कहा जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस एकादशी के दिन गीता जयंती भी मनाई जाती है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था।

Contents
मोक्षदा एकादशी 2025: तिथि और शुभ मुहूर्तमोक्षदा एकादशी का शुभ मुहूर्तमोक्षदा एकादशी व्रत कथामोक्षदा एकादशी व्रत विधिव्रत से पहले की तैयारीपूजा विधिपारण विधि (व्रत तोड़ने का तरीका)मोक्षदा एकादशी व्रत के लाभमोक्षदा एकादशी और गीता जयंती का संबंधनिष्कर्ष

मोक्षदा एकादशी 2025: तिथि और शुभ मुहूर्त

साल 2025 में मोक्षदा एकादशी 18 दिसंबर, गुरुवार को मनाई जाएगी।

  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 17 दिसंबर 2025, रात 09:14 बजे
  • एकादशी तिथि समाप्त: 18 दिसंबर 2025, रात 11:39 बजे
  • पारण समय (व्रत तोड़ने का समय): 19 दिसंबर, सुबह 07:12 से 09:21 बजे तक
  • व्रत का पालन: 18 दिसंबर को (उदया तिथि के अनुसार)

मोक्षदा एकादशी का शुभ मुहूर्त

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05:12 से 06:06 बजे
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:07 से 12:51 बजे

मोक्षदा एकादशी व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार महाराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा, “हे प्रभु! मार्गशीर्ष मास की शुक्ल एकादशी का क्या महत्व है?” तब श्रीकृष्ण ने बताया कि इस एकादशी का नाम मोक्षदा है, क्योंकि यह मोक्ष प्रदान करने वाली है।

कथा के अनुसार, गोकुल नगरी में वैखानस नामक एक राजा रहते थे। एक रात उन्होंने स्वप्न में देखा कि उनके पिता नरक में पीड़ित हैं। राजा ने महर्षि पर्वत से इसका कारण पूछा। ऋषि ने बताया कि उनके पिता ने पूर्व जन्म में पाप कर्म किए थे, इसलिए उन्हें यह दुख भोगना पड़ रहा है। ऋषि ने राजा को मोक्षदा एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। राजा और उनकी पत्नी ने विधि-विधान से व्रत किया, जिससे उनके पिता को मोक्ष मिल गया।

मोक्षदा एकादशी व्रत विधि

व्रत से पहले की तैयारी

  • दशमी की रात से ही सात्विक भोजन ग्रहण करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
  • एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • घर के मंदिर या पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।

पूजा विधि

  1. सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और पीले वस्त्र पहनें।
  2. भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर को स्थापित करें और उन्हें तुलसी दल, फल, फूल अर्पित करें।
  3. दीपक जलाकर इस मंत्र का जाप करें:

    “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”

  4. गीता जयंती के दिन श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करें या सुनें।
  5. रात में भजन-कीर्तन करें और हरि कथा सुनें।

पारण विधि (व्रत तोड़ने का तरीका)

  • द्वादशी के दिन सुबह स्नान करके भगवान विष्णु की पूजा करें।
  • ब्राह्मण या गरीबों को भोजन, फल, दक्षिणा दान करें।
  • इसके बाद ही अन्न ग्रहण करें।

मोक्षदा एकादशी व्रत के लाभ

  • इस व्रत से पितृ दोष और कालसर्प दोष का निवारण होता है।
  • जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  • भगवान विष्णु की कृपा से धन, समृद्धि और सुख-शांति मिलती है।

मोक्षदा एकादशी और गीता जयंती का संबंध

मोक्षदा एकादशी के दिन ही गीता जयंती मनाई जाती है। महाभारत के युद्ध के दौरान भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कुरुक्षेत्र में गीता का उपदेश दिया था। इसलिए इस दिन गीता पाठ करने का विशेष महत्व है। गीता में बताए गए कर्मयोग, भक्तियोग और ज्ञानयोग का अनुसरण करने से मनुष्य जीवन के सभी दुखों से मुक्त हो जाता है।

निष्कर्ष

मोक्षदा एकादशी एक पावन व्रत है जो मनुष्य को पापों से मुक्ति दिलाकर मोक्ष प्रदान करता है। इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा करने और गीता का पाठ करने से जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति मिलती है। आप सभी को मोक्षदा एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएं!

|| हरि ओम तत्सत ||

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