मां दुर्गा का महत्व
नवरात्रि का पावन पर्व हिंदू धर्म में विशेष स्थान रखता है। यह नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-अर्चना का समय होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मां दुर्गा का जन्म कैसे हुआ और उन्हें इतनी अद्भुत शक्तियां कहां से प्राप्त हुईं? इस लेख में हम आपको मां दुर्गा के जन्म की पौराणिक कथा और उनकी शक्तियों के रहस्य से परिचित कराएंगे।
मां दुर्गा का जन्म: देवताओं की प्रार्थना का फल
पुराणों के अनुसार, मां दुर्गा का जन्म एक विशेष उद्देश्य से हुआ था। यह कथा मार्कंडेय पुराण और देवी भागवत पुराण में विस्तार से वर्णित है:
- राक्षस महिषासुर का अत्याचार: महिषासुर ने घोर तपस्या कर ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त किया कि कोई भी देवता, दानव या मनुष्य उसे न मार सके।
- देवताओं की विवशता: वरदान के बाद महिषासुर ने स्वर्ग पर आक्रमण कर दिया और देवताओं को पराजित कर दिया।
- त्रिदेवों का निर्णय: ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने मिलकर एक दिव्य शक्ति की रचना की, जिसमें सभी देवताओं की तेजस्विता समाहित थी।
देवी का प्राकट्य: अमृत से भरा यह श्लोक
जब देवताओं के तेज से मां दुर्गा प्रकट हुईं, तब यह श्लोक गूंजा:
“या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥“
इसका अर्थ है: “जो देवी समस्त प्राणियों में शक्ति रूप में विद्यमान हैं, उन्हें बारंबार नमन है।”
मां दुर्गा को मिली शक्तियों का रहस्य
मां दुर्गा को उनकी अद्वितीय शक्तियां विभिन्न देवताओं से प्राप्त हुई थीं। आइए जानते हैं कि किस देवता ने क्या अर्पित किया:
- शिव जी: त्रिशूल (तीन फनों वाला अस्त्र)
- विष्णु जी: सुदर्शन चक्र
- अग्नि देव: तेजस्वी शक्ति और दिव्य अस्त्र
- वरुण देव: शंख
- वायु देव: धनुष और बाण
महिषासुर वध: धर्म की अधर्म पर विजय
नौ दिनों तक चले भीषण युद्ध के बाद मां दुर्गा ने महिषासुर का वध किया। इसी घटना को विजयादशमी के रूप में मनाया जाता है।
नवरात्रि 2025 में मां दुर्गा की उपासना
नवरात्रि 2025 में मां दुर्गा के इन नौ रूपों की पूजा की जाएगी:
- शैलपुत्री (प्रथम दिन)
- ब्रह्मचारिणी (द्वितीय दिन)
- चंद्रघंटा (तृतीय दिन)
- कुष्मांडा (चतुर्थ दिन)
- स्कंदमाता (पंचम दिन)
- कात्यायनी (षष्ठ दिन)
- कालरात्रि (सप्तम दिन)
- महागौरी (अष्टम दिन)
- सिद्धिदात्री (नवम दिन)
मंत्र साधना: इन मंत्रों से करें आराधना
नवरात्रि में इन मंत्रों का जाप करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं:
“ॐ दुं दुर्गायै नमः” (सामान्य जाप)
“सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणी नमोऽस्तु ते॥” (दुर्गा स्तुति)
मां दुर्गा की शक्ति का दर्शन: आधुनिक युग में प्रासंगिकता
मां दुर्गा की कथा केवल एक पौराणिक घटना नहीं, बल्कि हमारे जीवन के लिए प्रेरणा का स्रोत है:
- शक्ति का संदेश: नारी शक्ति के प्रतीक के रूप में मां दुर्गा हमें सशक्त बनने की प्रेरणा देती हैं।
- धर्म की रक्षा: अधर्म पर धर्म की विजय का संकल्प हमें न्याय के पथ पर चलने को प्रेरित करता है।
- एकता का महत्व: विभिन्न देवताओं की शक्तियों के मिलन से बनी मां दुर्गा हमें एकता का पाठ पढ़ाती हैं।
निष्कर्ष: मां दुर्गा का आशीर्वाद
नवरात्रि 2025 में मां दुर्गा की कृपा पाने के लिए हमें श्रद्धा और भक्ति के साथ उनकी आराधना करनी चाहिए। याद रखें, जैसे मां ने महिषासुर का वध किया था, वैसे ही वे हमारे जीवन के सभी कष्टों और बाधाओं को दूर करने की शक्ति रखती हैं।
“यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धरः।
तत्र श्रीर्विजयो भूतिर्ध्रुवा नीतिर्मतिर्मम॥“
(जहां योगेश्वर श्रीकृष्ण हैं और धनुर्धारी अर्जुन, वहां लक्ष्मी, विजय, समृद्धि और स्थिर नीति निश्चित रूप से रहती है।)
आइए, इस नवरात्रि में मां दुर्गा के चरणों में अपना शीश नवाएं और उनकी असीम कृपा का पात्र बनें।
जय माता दी!

