MSHBMSHBMSHB
  • MSHB.IN
  • Latest News
  • Sarkari Yojana
Reading: Pitru Paksha 2025 पितृ पक्ष पितरों का पर्व सोलह श्राद्ध महत्व
Share
Notification Show More
MSHBMSHB
  • MSHB.IN
  • Latest News
  • Sarkari Yojana
© 2024 MSHB.in. All Rights Reserved.

Pitru Paksha 2025 पितृ पक्ष पितरों का पर्व सोलह श्राद्ध महत्व

पितृ पक्ष 2025 में सोलह श्राद्ध का महत्व जानें और पितरों को श्रद्धांजलि दें इस पवित्र पर्व के अवसर पर।

Published July 2, 2026
Share
6 Min Read

हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व है। यह वह पावन समय होता है जब हम अपने पूर्वजों को याद करते हैं, उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं और उनकी आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध कर्म करते हैं। 2025 में पितृ पक्ष 16 सितंबर से 1 अक्टूबर तक मनाया जाएगा। इस अवधि में सोलह दिनों तक पितरों का तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य किया जाता है।

Contents
पितृ पक्ष क्या है?पितृ पक्ष का धार्मिक महत्वसोलह श्राद्ध का महत्वसोलह श्राद्ध की तिथियाँ और उनका विशेष महत्व (2025)श्राद्ध कर्म की विधिश्राद्ध के लिए आवश्यक सामग्रीश्राद्ध कर्म की स्टेप-बाय-स्टेप विधिश्राद्ध में पढ़े जाने वाले मंत्रतर्पण मंत्रपिंड दान मंत्रपितृ पक्ष में क्या न करें?पितृ पक्ष में दान का महत्वपितृ ऋण से मुक्ति का पर्व

पितृ पक्ष क्या है?

पितृ पक्ष, जिसे महालय पक्ष भी कहा जाता है, हिंदू कैलेंडर के अनुसार भाद्रपद मास की पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन मास की अमावस्या तक चलता है। मान्यता है कि इस दौरान पितृलोक से हमारे पूर्वज धरती पर आते हैं और अपने वंशजों द्वारा दिए गए तर्पण व भोजन को ग्रहण करते हैं।

पितृ पक्ष का धार्मिक महत्व

  • गरुड़ पुराण में कहा गया है कि श्राद्ध कर्म से पितरों की आत्मा को तृप्ति मिलती है।
  • महाभारत में भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को श्राद्ध के महत्व के बारे में बताया था।
  • विष्णु पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति श्राद्ध कर्म नहीं करता, उसके पितृ उससे रुष्ट हो जाते हैं।

सोलह श्राद्ध का महत्व

पितृ पक्ष के सोलह दिनों में अलग-अलग तिथियों पर विशेष श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। प्रत्येक तिथि का अपना महत्व होता है और विशेष पूर्वजों के लिए श्राद्ध किया जाता है।

सोलह श्राद्ध की तिथियाँ और उनका विशेष महत्व (2025)

तिथि दिन महत्व
पूर्णिमा श्राद्ध 16 सितंबर जिन पितरों का निधन पूर्णिमा को हुआ हो
प्रतिपदा श्राद्ध 17 सितंबर अकाल मृत्यु प्राप्त जनों का श्राद्ध
द्वितीया श्राद्ध 18 सितंबर दादा-दादी, नाना-नानी का श्राद्ध
तृतीया श्राद्ध 19 सितंबर माता के परिवार के पितरों का श्राद्ध
चतुर्थी श्राद्ध 20 सितंबर जिनकी मृत्यु हथियार से हुई हो
पंचमी श्राद्ध 21 सितंबर माता-पिता का श्राद्ध
षष्ठी श्राद्ध 22 सितंबर जिनकी मृत्यु दुर्घटना में हुई हो
सप्तमी श्राद्ध 23 सितंबर संन्यासियों का श्राद्ध
अष्टमी श्राद्ध 24 सितंबर कुंवारों व साधुओं का श्राद्ध
नवमी श्राद्ध 25 सितंबर मातृ पक्ष का श्राद्ध (माता के लिए)
दशमी श्राद्ध 26 सितंबर पिता के लिए श्राद्ध
एकादशी श्राद्ध 27 सितंबर जिन्होंने तपस्या की हो
द्वादशी श्राद्ध 28 सितंबर ब्राह्मणों व विद्वानों का श्राद्ध
त्रयोदशी श्राद्ध 29 सितंबर जिनकी मृत्यु विष से हुई हो
चतुर्दशी श्राद्ध 30 सितंबर अकाल मृत्यु प्राप्त जनों का श्राद्ध
अमावस्या श्राद्ध (सर्वपितृ अमावस्या) 1 अक्टूबर सभी पितरों का श्राद्ध

श्राद्ध कर्म की विधि

श्राद्ध कर्म को सही विधि से करने पर ही पितरों को तृप्ति मिलती है। आइए जानते हैं श्राद्ध करने की सरल विधि:

श्राद्ध के लिए आवश्यक सामग्री

  • कुशा (दूब घास)
  • तिल, जौ, चावल
  • गंगाजल
  • दूध, दही, घी, शहद
  • पितरों का पसंदीदा भोजन
  • पीपल का पत्ता

श्राद्ध कर्म की स्टेप-बाय-स्टेप विधि

  1. सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. पितरों का आवाहन करते हुए उनके नाम का उच्चारण करें।
  3. कुशा के आसन पर बैठकर तर्पण करें (जल, तिल, अक्षत अर्पित करें)।
  4. पिंड दान करें (चावल, दूध, घी से बने पिंड अर्पित करें)।
  5. ब्राह्मण को भोजन कराएँ और दक्षिणा दें।
  6. अंत में पितरों से आशीर्वाद माँगें।

श्राद्ध में पढ़े जाने वाले मंत्र

श्राद्ध कर्म में कुछ विशेष मंत्रों का उच्चारण किया जाता है। ये मंत्र संस्कृत में हैं और इनका सही उच्चारण आवश्यक है:

तर्पण मंत्र

“ॐ अस्य श्री विष्णोराज्ञया प्रवर्तमानस्य अद्य ब्रह्मणो द्वितीयपरार्धे श्री श्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कलियुगे कलिप्रथमचरणे जम्बूद्वीपे भारतवर्षे भरतखण्डे आर्यावर्तान्तर्गते (अपना स्थान बोलें) अमुकगोत्रस्य (अपना गोत्र बोलें) अमुकशर्मणः (अपना नाम बोलें) पितृपक्षे अमुकतिथौ (तिथि बोलें) अमुकवासरे (वार बोलें) अमुकनक्षत्रे (नक्षत्र बोलें) अमुकराशिस्थिते सूर्ये अमुकराशिस्थिते चन्द्रे अमुकनामधेयानां पितृपितामहप्रपितामहानां मातामहादीनां च सपत्नीकानां आवाहयामि स्थापयामि संस्मरामि तृप्तिं कुरुत स्वधा नमः॥”

पिंड दान मंत्र

“ॐ पितृभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः। ये च इहागताः पितरो ये च इह नागताः। तेभ्यः स्वधा नमोऽस्तु।”

पितृ पक्ष में क्या न करें?

पितृ पक्ष में कुछ कार्य वर्जित माने गए हैं। इनका पालन करने से पितर प्रसन्न होते हैं:

  • मांस-मदिरा का सेवन न करें।
  • नए कार्य (विवाह, गृहप्रवेश) शुरू न करें।
  • पेड़-पौधों की कटाई न करें।
  • किसी को अपशब्द न कहें।

पितृ पक्ष में दान का महत्व

पितृ पक्ष में दान करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। कुछ प्रमुख दान इस प्रकार हैं:

  • गौ दान: गाय का दान सर्वोत्तम माना गया है।
  • वस्त्र दान: जरूरतमंदों को वस्त्र दान करें।
  • अन्न दान: गरीबों को भोजन कराएँ।
  • तिल दान: तिल का दान पितृ दोष शांति के लिए उत्तम है।

पितृ ऋण से मुक्ति का पर्व

पितृ पक्ष हमें याद दिलाता है कि हमारे पूर्वजों ने हमारे लिए जो कुछ किया, उसका ऋण हम श्राद्ध कर्म से चुका सकते हैं। यह पर्व केवल रीति-रिवाज नहीं, बल्कि पितरों के प्रति हमारी कृतज्ञता का प्रतीक है। 2025 के पितृ पक्ष में अपने पितरों का श्राद्ध करके उन्हें तृप्त करें और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।

“पितृदेवो भव” – हमारे पितर ही हमारे देवता हैं।

You Might Also Like

Religion: अध्यात्म के बिना मानव जीवन अधूरा

Navratri Day 3 Chandraghanta Devi Puja Ka Rahasya

Jai Dev Jai Dev Jai Mangal Murti Lyrics जयदेव जयदेव जय मंगलमूर्ति

Ganga Saptami 2025 मां गंगा स्तोत्रम पाठ से पाप मुक्ति

Shabari Jayanti 2025: शबरी ने पशु बलि के खिलाफ बड़ा कदम उठाया

Share

Latest News

Hanuman Chalisa: हनुमान चालीसा पाठ का सही समय और विधि
Religion Spirituality July 2, 2026
राधा कृष्णा का युगल रूप हैं बांके बिहारी
Religion Spirituality July 2, 2026
Kheer Bhawani Temple: कश्मीर के चमत्कारी खीर भवानी मंदिर की परंपराएं
Religion Spirituality July 2, 2026
Durga Puja 2025 आज से शुरू जानें कल्पारंभ पूजा का शुभ मुहूर्त
Religion Spirituality July 2, 2026

You Might also Like

Mauni Amavasya 2025: मौनी अमावस्या महत्व कथा शुभ मुहूर्त

July 2, 2026

कालरात्रि और मां काली में समानता क्या है? | Similarity Between Kalaratri and Maa Kali

July 2, 2026

Pitru Paksha 2025: पंडित न हो तो पिंडदान कैसे करें? जानें नियम

July 2, 2026
MshbMshb

MSHB.in is your reliable source for the latest news in Government Schemes, Sarkari Yojana, Govt Jobs, Spirituality, lifestyle, and more.

Quick Link

  • MSHB.IN
  • About Us
  • Blogs
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Terms and Conditions
  • My Bookmarks
  • Contact Us

Category

  • Religion
  • Latest News
  • Sarkari Yojana

Recent Post

  • Hanuman Chalisa: हनुमान चालीसा पाठ का सही समय और विधि
  • राधा कृष्णा का युगल रूप हैं बांके बिहारी
  • Kheer Bhawani Temple: कश्मीर के चमत्कारी खीर भवानी मंदिर की परंपराएं
© 2025 MSHB. All Rights Reserved. | Website Designed By Dinox Tech HTML sitemap
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?