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पौष पुत्रदा एकादशी कब है महत्व पूजा विधि और कथा

कब है पौष पुत्रदा एकादशी? जानिए इसका महत्व, सरल पूजा विधि और पौराणिक कथा। संतान प्राप्ति और मोक्ष के लिए इस विशेष व्रत का पूरा लाभ उठाएं।

Published July 2, 2026
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4 Min Read

कब है पौष पुत्रदा एकादशी, जानिए महत्व, पूजा विधि और कथा

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, और पौष पुत्रदा एकादशी इनमें से एक पावन तिथि है। यह व्रत संतान प्राप्ति और पुत्र की कामना पूरी करने के लिए किया जाता है। इस लेख में हम जानेंगे कि पौष पुत्रदा एकादशी 2024 कब है, इसका महत्व, पूजा विधि और पौराणिक कथा।

Contents
कब है पौष पुत्रदा एकादशी, जानिए महत्व, पूजा विधि और कथापौष पुत्रदा एकादशी 2024 की तिथिपौष पुत्रदा एकादशी का महत्वपौष पुत्रदा एकादशी पूजा विधिव्रत की तैयारीपूजा विधिमंत्र जापपौष पुत्रदा एकादशी व्रत कथापौष पुत्रदा एकादशी व्रत के नियमपारण विधि (व्रत तोड़ने की विधि)निष्कर्ष

पौष पुत्रदा एकादशी 2024 की तिथि

2024 में पौष पुत्रदा एकादशी 17 जनवरी, बुधवार को मनाई जाएगी।

  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 16 जनवरी 2024 को रात 09:00 बजे
  • एकादशी तिथि समाप्त: 17 जनवरी 2024 को रात 11:36 बजे
  • पारण का समय: 18 जनवरी सुबह 07:12 बजे से 09:22 बजे तक

पौष पुत्रदा एकादशी का महत्व

हिंदू शास्त्रों के अनुसार, पुत्रदा एकादशी का व्रत करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है। यह व्रत विशेष रूप से उन दंपत्तियों के लिए फलदायी है जो संतान प्राप्ति की इच्छा रखते हैं। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और उनसे संतान के लिए आशीर्वाद मांगा जाता है।

  • संतान प्राप्ति की कामना पूरी करने वाला व्रत
  • पितृ दोष से मुक्ति मिलती है
  • मोक्ष की प्राप्ति होती है
  • पारिवारिक सुख-शांति बढ़ती है

पौष पुत्रदा एकादशी पूजा विधि

व्रत की तैयारी

  • एकादशी से एक दिन पहले (दशमी) सात्विक भोजन करें
  • रात्रि में ब्रह्मचर्य का पालन करें
  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें

पूजा विधि

  • स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें
  • घर के मंदिर या पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें
  • भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें
  • तुलसी दल, फूल, फल और मेवे अर्पित करें
  • घी का दीपक जलाएं और धूप दें

मंत्र जाप

इस मंत्र का 108 बार जाप करें:

“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”

या फिर यह श्लोक पढ़ें:

“त्वमेव माता च पिता त्वमेव
त्वमेव बंधुश्च सखा त्वमेव
त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव
त्वमेव सर्वं मम देव देव”

पौष पुत्रदा एकादशी व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, भद्रावती नगर में राजा सुकेतु राज्य करते थे। उनकी कोई संतान नहीं थी। एक दिन ऋषि-मुनियों ने उन्हें पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। राजा और रानी ने पूरी श्रद्धा से यह व्रत किया। कुछ समय बाद रानी गर्भवती हुई और उन्हें एक सुंदर पुत्र की प्राप्ति हुई। इस प्रकार यह व्रत संतान प्राप्ति में सहायक सिद्ध हुआ।

पौष पुत्रदा एकादशी व्रत के नियम

  • व्रत के दिन अन्न ग्रहण न करें
  • फलाहार या दूध से व्रत कर सकते हैं
  • क्रोध, झूठ और हिंसा से बचें
  • पूरे दिन भगवान विष्णु का स्मरण करें
  • रात्रि जागरण कर भजन-कीर्तन करें

पारण विधि (व्रत तोड़ने की विधि)

एकादशी के अगले दिन द्वादशी को सूर्योदय के बाद व्रत तोड़ना चाहिए। पारण करते समय यह बातें याद रखें:

  • सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु की पूजा करें
  • ब्राह्मण को भोजन कराएं और दान दें
  • फिर स्वयं फलाहार या सात्विक भोजन ग्रहण करें

निष्कर्ष

पौष पुत्रदा एकादशी हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण व्रत है जो संतान सुख प्रदान करता है। इस व्रत को श्रद्धा और विधि-विधान से करने पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह न केवल संतान प्राप्ति में सहायक है बल्कि मनुष्य को पापों से मुक्ति और मोक्ष का मार्ग भी दिखाता है।

आशा है यह जानकारी आपके लिए उपयोगी सिद्ध होगी। पौष पुत्रदा एकादशी के इस पावन अवसर पर भगवान विष्णु आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करें।

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