हिंदू धर्म में रंभा तृतीया का विशेष महत्व है। यह व्रत मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा सौभाग्य और पति की दीर्घायु के लिए रखा जाता है। इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा का विधान है। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने से सुहागिनों को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है और कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर मिलता है।
रंभा तृतीया व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार देवी पार्वती ने भगवान शिव से पूछा कि “हे प्रभु, मेरे समान सौभाग्यवती स्त्री को कौन-सा व्रत करना चाहिए?” तब भगवान शिव ने उन्हें रंभा तृतीया व्रत का विधान बताया। इस व्रत को करने से स्त्रियों को सुख-समृद्धि और पति का साथ मिलता है।
रंभा तृतीया 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त
रंभा तृतीया 2025 की तिथि और शुभ समय निम्नलिखित है:
- तिथि: 1 जून 2025, रविवार
- तृतीया तिथि प्रारंभ: 31 मई 2025, शाम 06:15 बजे
- तृतीया तिथि समाप्त: 1 जून 2025, शाम 08:30 बजे
- पूजा का शुभ मुहूर्त: प्रातः 06:00 बजे से 10:30 बजे तक
रंभा तृतीया व्रत की पूजा विधि
इस व्रत को करने के लिए निम्नलिखित विधि का पालन करें:
सामग्री तैयार करें
- शिव-पार्वती की मूर्ति या चित्र
- फूल, फल, धूप, दीप
- गंगाजल, दूध, शहद, घी
- कुमकुम, चावल, रोली
- मिठाई और नैवेद्य
पूजा विधि
- सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
- शिव-पार्वती की मूर्ति स्थापित करें।
- भगवान शिव को जल, दूध, शहद और घी से अभिषेक करें।
- फिर इस मंत्र का उच्चारण करें:
“ॐ नमः शिवाय, जगत्पतये, देवदेव महेश्वराय नमः॥”
- देवी पार्वती को सिंदूर, चुनरी और फल अर्पित करें।
- आरती करके प्रसाद वितरित करें।
रंभा तृतीया व्रत के लाभ
- वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
- पति की दीर्घायु और स्वास्थ्य लाभ मिलता है।
- कुंवारी कन्याओं को योग्य वर की प्राप्ति होती है।
- घर में सुख-समृद्धि आती है।
निष्कर्ष
रंभा तृतीया व्रत एक पावन पर्व है जो स्त्रियों के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। इस व्रत को श्रद्धा और विधि-विधान से करने पर भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त होती है। आप सभी को रंभा तृतीया 2025 की हार्दिक शुभकामनाएं!
यह लेख पौराणिक मान्यताओं और शास्त्रों पर आधारित है। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान को करने से पहले अपने कुलगुरु या विद्वान पंडित से परामर्श अवश्य लें।
