संकष्टी चतुर्थी दिसंबर 2025: साल की अंतिम संकष्टी, जानिए शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
हिंदू धर्म में संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व है। यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित है और मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से सभी संकटों का नाश होता है। दिसंबर 2025 में मनाई जाने वाली संकष्टी चतुर्थी साल की अंतिम संकष्टी होगी, जिसका महत्व और भी बढ़ जाता है। आइए जानते हैं इस पावन अवसर का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और कथा।
संकष्टी चतुर्थी का महत्व
संकष्टी चतुर्थी हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है। यह व्रत विशेष रूप से भगवान गणेश को समर्पित है, जिन्हें विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता माना जाता है। इस व्रत को करने से व्यक्ति के जीवन से सभी प्रकार के संकट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का वास होता है।
- संकष्टी का अर्थ है “संकटों को हरने वाली”।
- इस दिन गणपति की पूजा से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
- यह व्रत विशेष रूप से चंद्र दर्शन के बाद किया जाता है।
दिसंबर 2025 में संकष्टी चतुर्थी की तिथि और शुभ मुहूर्त
दिसंबर 2025 में संकष्टी चतुर्थी 15 दिसंबर, सोमवार को मनाई जाएगी। इस दिन चतुर्थी तिथि का समय निम्नलिखित है:
- चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 14 दिसंबर 2025 को रात 10:15 बजे
- चतुर्थी तिथि समाप्त: 15 दिसंबर 2025 को रात 08:30 बजे
- चंद्रोदय समय: 15 दिसंबर को रात 08:45 बजे (लगभग)
व्रत का पारण चंद्र दर्शन के बाद ही किया जाता है, इसलिए चंद्रोदय समय का विशेष महत्व है।
संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि
संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखने वाले भक्तों को निम्नलिखित विधि से पूजा करनी चाहिए:
- प्रातःकाल सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें।
- साफ वस्त्र धारण करके भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
- लाल चंदन, फूल, दूर्वा और मोदक का भोग लगाएं।
- गणेश जी के मंत्रों का जाप करें: “ॐ गं गणपतये नमः”
- संकष्टी चतुर्थी की कथा पढ़ें या सुनें।
- शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करें।
संकष्टी चतुर्थी की कथा
संकष्टी चतुर्थी से जुड़ी एक पौराणिक कथा प्रचलित है। कहा जाता है कि एक बार माता पार्वती ने भगवान गणेश से कहा कि जो भक्त तुम्हारी चतुर्थी का व्रत करेगा, उसके सभी कष्ट दूर होंगे। तभी से यह व्रत संकष्टी चतुर्थी के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इस दिन गणेश जी की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
संकष्टी चतुर्थी के लिए विशेष सुझाव
इस पावन व्रत को करते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें:
- व्रत के दिन पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करें।
- क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।
- गरीबों को भोजन या दान अवश्य दें।
- पूजा में तुलसी दल का प्रयोग न करें (गणेश पूजन में वर्जित)।
संकष्टी चतुर्थी का आध्यात्मिक महत्व
यह व्रत न केवल भौतिक संकटों को दूर करता है, बल्कि आत्मिक शुद्धि का भी मार्ग प्रशस्त करता है। गणेश जी बुद्धि और विवेक के देवता हैं, इसलिए इस दिन उनकी आराधना करने से मनुष्य को सही निर्णय लेने की शक्ति प्राप्त होती है।
निष्कर्ष
दिसंबर 2025 की यह संकष्टी चतुर्थी साल की अंतिम संकष्टी होगी, जिसका विशेष महत्व है। इस पावन अवसर पर भक्ति भाव से गणपति बप्पा की आराधना करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का वास होता है। आशा है कि इस लेख में दी गई जानकारी आपके लिए उपयोगी सिद्ध होगी। गणपति बप्पा मोरया!
