षटतिला एकादशी हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण व्रत है जो माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु की आराधना और पापों के नाश के लिए किया जाता है। इस दिन व्रत रखकर पूजा-अर्चना करने के बाद षटतिला एकादशी की कथा सुनने का विशेष महत्व है। इस लेख में हम आपको इस पावन एकादशी की विधि, महत्व और पौराणिक कथा के बारे में विस्तार से बताएंगे।
षटतिला एकादशी 2025 की तिथि और मुहूर्त
- तिथि: 28 जनवरी 2025 (मंगलवार)
- एकादशी प्रारंभ: 27 जनवरी को रात 10:15 बजे से
- एकादशी समाप्त: 28 जनवरी को रात 08:35 बजे तक
- पारण समय: 29 जनवरी सुबह 07:15 से 09:30 तक
षटतिला एकादशी व्रत की विधि
इस व्रत को करने के लिए निम्नलिखित विधि का पालन करें:
- प्रातः सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें।
- स्वच्छ वस्त्र धारण करके भगवान विष्णु की पूजा करें।
- तिल, जल, फल, फूल, धूप-दीप से विधिवत आरती करें।
- दिन भर उपवास रखें और केवल फलाहार ग्रहण करें।
- शाम को दीपदान करें और कथा सुनें या पढ़ें।
- अगले दिन सुबह दान-पुण्य करके व्रत का पारण करें।
विशेष सामग्री
- तिल: तिल का उपयोग पूजा, दान और भोजन में किया जाता है।
- गंगाजल: पूजा में गंगाजल का छिड़काव शुभ माना जाता है।
- तुलसी दल: भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित करना चाहिए।
षटतिला एकादशी का महत्व
पद्म पुराण के अनुसार, षटतिला एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह व्रत निम्नलिखित लाभ प्रदान करता है:
- पितृ दोष से मुक्ति
- आर्थिक समृद्धि
- स्वास्थ्य लाभ
- मनोकामनाओं की पूर्ति
षटतिला एकादशी की पौराणिक कथा
एक बार की बात है, एक ब्राह्मणी थी जो नियमित रूप से व्रत-उपवास करती थी, लेकिन कभी दान-पुण्य नहीं करती थी। उसकी इस आदत से भगवान विष्णु अप्रसन्न हो गए। एक दिन, भगवान ने एक बूढ़ी महिला का रूप धारण करके उसके घर आकर दान मांगा।
ब्राह्मणी ने कहा, “मेरे पास देने के लिए कुछ भी नहीं है।” यह सुनकर भगवान ने उसे श्राप दिया कि तुम्हारी सारी पुण्याई नष्ट हो जाएगी। श्राप से डरी ब्राह्मणी ने क्षमा मांगी और मार्गदर्शन मांगा।
तब भगवान ने उसे षटतिला एकादशी का व्रत करने और तिल का दान करने का उपदेश दिया। ब्राह्मणी ने ऐसा ही किया और उसके सभी पाप धुल गए। इस प्रकार, यह कथा हमें दान और भक्ति का महत्व सिखाती है।
कथा का मूल संदेश
- व्रत के साथ दान-पुण्य भी आवश्यक है।
- तिल का महत्व पाप नाशक और पुण्यवर्धक है।
- भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए निष्ठा आवश्यक है।
षटतिला एकादशी पर विशेष मंत्र
इस दिन निम्न मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है:
"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः"
इसके अलावा, विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी किया जा सकता है।
निष्कर्ष
षटतिला एकादशी का व्रत हमें आध्यात्मिक और सांसारिक सुख प्रदान करता है। इस दिन पूजा-अर्चना के बाद कथा सुनने से व्रत का पूर्ण फल मिलता है। हमें इस व्रत को श्रद्धा और निष्ठा से करना चाहिए ताकि भगवान विष्णु की कृपा हम पर बनी रहे।
हरि ॐ तत्सत्।
