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सोमवार की अमावस्या खास जानिए इसका महत्व

Published June 26, 2026
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4 Min Read

सोमवार और अमावस्या का अद्भुत संयोग

ज्योतिष और धर्मशास्त्र में सोमवार और अमावस्या दोनों का विशेष महत्व है। लेकिन जब यह दोनों एक साथ आते हैं, तो यह संयोग और भी अधिक पावन बन जाता है। सोमवार को भगवान शिव की आराधना का दिन माना जाता है, जबकि अमावस्या पितृदोष से मुक्ति और नए कार्यों की शुरुआत के लिए शुभ मानी जाती है।

Contents
सोमवार और अमावस्या का अद्भुत संयोगसोमवार की अमावस्या का धार्मिक महत्व1. भगवान शिव और चंद्रमा का संबंध2. पितृदोष से मुक्ति का अवसर3. नए कार्यों की शुरुआत के लिए शुभइस दिन करने योग्य विशेष पूजन एवं उपाय1. शिव अभिषेक और रुद्राभिषेक2. पितृ तर्पण एवं दान3. मंत्र जाप एवं ध्यानक्या करें और क्या न करेंकरने योग्य कार्यन करने योग्य कार्यइस अमावस्या का लाभ उठाएं

इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि:

  • सोमवार की अमावस्या क्यों है खास?
  • इस दिन कौन-से विशेष पूजन और उपाय किए जाते हैं?
  • कैसे इस दिन का लाभ उठाकर जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है?

सोमवार की अमावस्या का धार्मिक महत्व

1. भगवान शिव और चंद्रमा का संबंध

सोमवार का स्वामी चंद्रमा है, जो मन के कारक ग्रह माने जाते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, चंद्रमा को भगवान शिव ने अपने मस्तक पर धारण किया था, इसलिए सोमवार को शिवजी की पूजा का विशेष महत्व है। अमावस्या के दिन चंद्रमा अदृश्य होते हैं, जिससे मन की चंचलता शांत होती है और ध्यान लगाने में सहायता मिलती है।

2. पितृदोष से मुक्ति का अवसर

अमावस्या को पितृ तिथि भी कहा जाता है। इस दिन पितरों को तर्पण और श्राद्ध करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है। सोमवार की अमावस्या पर यदि शिवजी के साथ पितरों का तर्पण किया जाए, तो कुंडली के पितृदोष से मुक्ति मिल सकती है।

3. नए कार्यों की शुरुआत के लिए शुभ

कई लोग अमावस्या को अशुभ मानते हैं, लेकिन सोमवार की अमावस्या पर शिवजी की कृपा से नए कार्यों की शुरुआत की जा सकती है, खासकर ध्यान, साधना या आध्यात्मिक यात्रा के लिए।

इस दिन करने योग्य विशेष पूजन एवं उपाय

1. शिव अभिषेक और रुद्राभिषेक

  • सुबह स्नान करके साफ वस्त्र धारण करें।
  • शिवलिंग पर दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें।
  • ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करते हुए बेलपत्र, धतूरा और अक्षत अर्पित करें।

2. पितृ तर्पण एवं दान

  • कुशा के आसन पर बैठकर काले तिल, जल और दूध से पितरों को तर्पण दें।
  • ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को काले उड़द की दाल, वस्त्र या अनाज का दान करें।

3. मंत्र जाप एवं ध्यान

इस दिन निम्न मंत्रों का जाप विशेष फलदायी होता है:

  • महामृत्युंजय मंत्र: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
  • शिव चालीसा या शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करें।

क्या करें और क्या न करें

करने योग्य कार्य

  • व्रत रखकर फलाहार करें।
  • शिव मंदिर में दीपक जलाएं।
  • सात्विक भोजन ग्रहण करें और मन को शांत रखें।

न करने योग्य कार्य

  • मांसाहार, मदिरा या तामसिक भोजन से परहेज करें।
  • किसी भी प्रकार का झगड़ा या नकारात्मक विचार न लाएं।

इस अमावस्या का लाभ उठाएं

सोमवार की अमावस्या एक दुर्लभ संयोग है जो आपके जीवन में आध्यात्मिक शांति, पितृदोष से मुक्ति और नई ऊर्जा ला सकता है। इस दिन शिवजी की कृपा पाने के लिए सच्चे मन से पूजा-अर्चना करें और अपने पितरों को याद करें।

ध्यान रखें: ज्योतिषीय सलाह के अनुसार, इस दिन किए गए उपायों का पूरा फल तभी मिलता है जब नियमित रूप से शिव भक्ति जारी रखी जाए।

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