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Tulsi Vivah 2025: तुलसी विवाह में पढ़ें ये आरती विष्णु प्रिया प्रसन्न होंगी

Published June 26, 2026
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5 Min Read

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Contents
तुलसी विवाह 2025: विष्णु प्रिया को प्रसन्न करने वाली आरतीतुलसी विवाह का महत्वतुलसी विवाह 2025 की तिथि और मुहूर्ततुलसी विवाह पूजन विधिपूजन सामग्रीपूजन विधितुलसी विवाह की विशेष आरतीतुलसी आरतीआरती के बाद यह मंत्र पढ़ेंतुलसी विवाह की कथातुलसी विवाह के लाभनिष्कर्ष

तुलसी विवाह 2025: विष्णु प्रिया को प्रसन्न करने वाली आरती

हिंदू धर्म में तुलसी विवाह का विशेष महत्व है। यह पावन पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के प्रिय शालिग्राम रूप का विवाह तुलसी जी के साथ किया जाता है। तुलसी विवाह 2025 में भी भक्तों द्वारा यह पर्व पूरे विधि-विधान से मनाया जाएगा। इस लेख में हम आपको तुलसी विवाह के दौरान पढ़ी जाने वाली विशेष आरती बता रहे हैं, जिसे पढ़ने से माता तुलसी और भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं।

तुलसी विवाह का महत्व

शास्त्रों में तुलसी को विष्णु प्रिया कहा गया है। मान्यता है कि तुलसी विवाह के दिन भगवान विष्णु और तुलसी जी का विवाह करवाने से घर में सुख-समृद्धि आती है तथा सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

  • तुलसी विवाह से पितृ दोष दूर होता है
  • विवाहित जोड़ों को सुखी दांपत्य जीवन की प्राप्ति होती है
  • घर में तुलसी पूजन से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है
  • इस दिन तुलसी आरती का विशेष महत्व है

तुलसी विवाह 2025 की तिथि और मुहूर्त

तुलसी विवाह 2025 10 नवंबर, सोमवार को मनाया जाएगा। इस दिन एकादशी तिथि का प्रारंभ 09 नवंबर को रात 09:57 बजे से होगा जो 10 नवंबर को रात 11:48 बजे तक रहेगा। विवाह के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 06:36 से 08:47 तक रहेगा।

तुलसी विवाह पूजन विधि

तुलसी विवाह का पूजन विशेष विधि-विधान से किया जाता है। आइए जानते हैं कैसे करें तुलसी विवाह का पूजन:

पूजन सामग्री

  • तुलसी का पौधा
  • शालिग्राम शिला
  • मोली, चावल, फूल
  • दीपक, धूप
  • नारियल, फल
  • सुगंधित इत्र

पूजन विधि

  1. सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
  2. तुलसी के पौधे के पास चौकी बिछाएं
  3. शालिग्राम को तुलसी के समक्ष स्थापित करें
  4. तुलसी को सुहाग की सामग्री अर्पित करें
  5. विवाह की समस्त रस्में पूरी करें
  6. तुलसी आरती करें और प्रसाद वितरित करें

तुलसी विवाह की विशेष आरती

तुलसी विवाह के दिन निम्न आरती का पाठ करने से माता तुलसी अत्यंत प्रसन्न होती हैं। यह आरती संस्कृत और हिंदी में है जिसे भक्तिभाव से गाना चाहिए:

तुलसी आरती

जय तुलसी माता, मैया जय तुलसी माता
भक्त जनों की पूजा, स्वीकारो हे माता॥

तुम हो विष्णु प्रिया राधा, तुम हो हरि की प्राण
शालिग्राम पत्नी तुम्हीं, करो हम पर कृपा दान॥

तुम्हारी महिमा अपार, वेद पुराणों में गाई
तुम्हें नमन करें देवता, तुम हो सबकी रक्षकाई॥

जो नर तुम्हारी आरती, नित्य प्रातः शाम गावे
उसके घर में सुख-शांति, कभी दुःख न आवे॥

जय तुलसी माता, मैया जय तुलसी माता
भक्त जनों की पूजा, स्वीकारो हे माता॥

आरती के बाद यह मंत्र पढ़ें

“वृन्दा वृन्दावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी।
पुष्पसारा नन्दनीय तुलसी कृष्णजीवनी॥
एतभामांगलिकानि सर्वनाशं विनाशय।
नमस्तुलसि देवि नमो नमो विष्णुप्रिये नमो नमः॥”

तुलसी विवाह की कथा

पुराणों में तुलसी विवाह से जुड़ी एक रोचक कथा वर्णित है। तुलसी जी का पूर्व जन्म में नाम वृंदा था। वह जालंधर नामक दैत्य की पत्नी थी। अपने पति के लिए उसने कठोर तप किया था। भगवान विष्णु ने जालंधर का वध किया तो वृंदा ने उन्हें श्राप दिया कि वे पत्थर के हो जाएं। बाद में वृंदा ने अपने प्राण त्याग दिए और तुलसी के रूप में प्रकट हुईं। भगवान विष्णु ने उन्हें वरदान दिया कि वे शालिग्राम के रूप में उनसे विवाह करेंगे।

तुलसी विवाह के लाभ

  • मोक्ष की प्राप्ति: तुलसी विवाह में भाग लेने वाले को मोक्ष की प्राप्ति होती है
  • पारिवारिक सुख: परिवार में प्रेम और सद्भाव बढ़ता है
  • आरोग्य लाभ: तुलसी पूजन से स्वास्थ्य लाभ मिलता है
  • धन समृद्धि: घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है

निष्कर्ष

तुलसी विवाह 2025 का यह पावन पर्व भक्ति और श्रद्धा के साथ मनाएं। इस लेख में बताई गई आरती और पूजन विधि का पालन करने से भगवान विष्णु और माता तुलसी की विशेष कृपा प्राप्त होगी। तुलसी जी का विवाह मनुष्य को भक्ति और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। इस पवित्र अवसर पर तुलसी आरती का पाठ अवश्य करें और भगवान विष्णु तथा उनकी प्रिया तुलसी का आशीर्वाद प्राप्त करें।

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