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Tulsi Vivah 2025: तुलसी-शालिग्राम विवाह और विष्णु का पाषाण रूप

तुलसी विवाह 2025 में जानें क्यों होता है तुलसी-शालिग्राम का विवाह और कैसे विष्णु जी ने लिया पाषाण रूप

Published July 2, 2026
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4 Min Read

हिंदू धर्म में तुलसी विवाह (Tulsi Vivah) एक अत्यंत पवित्र और भक्तिपूर्ण पर्व है जो कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी या द्वादशी को मनाया जाता है। यह पर्व भगवान विष्णु के पाषाण रूप शालिग्राम जी और माता तुलसी के विवाह के रूप में मनाया जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर क्यों भगवान विष्णु ने पत्थर का रूप धारण किया और तुलसी से विवाह किया? इस लेख में हम इसी रहस्य को समझेंगे।

Contents
तुलसी विवाह की पौराणिक कथावृंदा का जन्म और भगवान विष्णु से श्रापतुलसी का पौधा बनना और विष्णु जी से विवाहतुलसी विवाह का महत्वधार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्ववैज्ञानिक महत्वतुलसी विवाह 2025: तिथि, मुहूर्त और पूजा विधितुलसी विवाह 2025 की तिथिशुभ मुहूर्तपूजा विधिनिष्कर्ष: तुलसी विवाह का संदेश

तुलसी विवाह की पौराणिक कथा

वृंदा का जन्म और भगवान विष्णु से श्राप

पुराणों के अनुसार, तुलसी का जन्म वृंदा नामक एक पवित्र स्त्री के रूप में हुआ था। वृंदा भगवान विष्णु की परम भक्त थीं और उन्होंने असुर राजा जालंधर से विवाह किया था। जालंधर ने अपनी पत्नी के पतिव्रत धर्म के बल पर अमरत्व प्राप्त कर लिया था और देवताओं को परेशान करने लगा।

जब भगवान विष्णु ने देखा कि जालंधर का वध तभी संभव है जब वृंदा का पतिव्रत धर्म भंग हो, तो उन्होंने जालंधर का रूप धारण कर वृंदा के साथ समय बिताया। इससे वृंदा का पतिव्रत भंग हो गया और जालंधर का वध हो सका।

जब वृंदा को सच्चाई का पता चला, तो उन्होंने क्रोधित होकर भगवान विष्णु को पत्थर बन जाने का श्राप दे दिया। इसी श्राप के कारण भगवान विष्णु को शालिग्राम (पाषाण रूप) में पूजा जाने लगा।

तुलसी का पौधा बनना और विष्णु जी से विवाह

वृंदा ने अपने पति की मृत्यु के बाद आत्मदाह कर लिया, लेकिन भगवान विष्णु ने उन्हें वरदान दिया कि वह तुलसी के पौधे के रूप में पृथ्वी पर पूजी जाएंगी और कार्तिक मास में उनका विवाह शालिग्राम (विष्णु के पाषाण रूप) से किया जाएगा।

तुलसी विवाह का महत्व

धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व

  • मोक्ष प्राप्ति: तुलसी विवाह के दिन पूजा-अर्चना करने से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  • पितृ दोष निवारण: इस दिन तुलसी विवाह करने से पितृ दोष समाप्त होता है।
  • वैवाहिक जीवन में सुख: अविवाहित लोगों को अच्छा जीवनसाथी मिलता है और विवाहितों का दांपत्य जीवन सुखमय बनता है।

वैज्ञानिक महत्व

तुलसी का पौधा न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है:

  • वायु शुद्धिकरण: तुलसी हवा को शुद्ध करती है और हानिकारक कीटाणुओं को नष्ट करती है।
  • आयुर्वेदिक गुण: तुलसी का उपयोग कई बीमारियों के इलाज में किया जाता है।

तुलसी विवाह 2025: तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि

तुलसी विवाह 2025 की तिथि

2025 में तुलसी विवाह 10 नवंबर (सोमवार) को मनाया जाएगा। यह कार्तिक शुक्ल द्वादशी के दिन पड़ता है।

शुभ मुहूर्त

  • प्रातःकाल पूजा: 06:30 AM से 08:30 AM
  • मध्याह्न पूजा: 11:30 AM से 01:30 PM

पूजा विधि

  1. सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. तुलसी के पौधे और शालिग्राम जी को गंगाजल से स्नान कराएं।
  3. तुलसी को लाल चुनरी पहनाएं और शालिग्राम जी को पीले वस्त्र पहनाएं।
  4. मंत्रोच्चारण के साथ फेरे लें:

    “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः”

  5. अंत में तुलसी की आरती करें और प्रसाद वितरित करें।

निष्कर्ष: तुलसी विवाह का संदेश

तुलसी विवाह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति और ईश्वर के बीच एक पवित्र बंधन का प्रतीक है। यह हमें सिखाता है कि भक्ति और पवित्रता ही मनुष्य को ईश्वर से जोड़ती है। 2025 के तुलसी विवाह पर इस पर्व को पूरे विधि-विधान से मनाकर अपने जीवन में आध्यात्मिक शांति प्राप्त करें।

“यत्र तुलसी तत्र विष्णुः, यत्र विष्णुस्तत्र लक्ष्मीः”
(जहाँ तुलसी होती है, वहाँ विष्णु विराजमान होते हैं और जहाँ विष्णु होते हैं, वहाँ लक्ष्मी का वास होता है।

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