हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। यह भगवान विष्णु को समर्पित एक पवित्र दिन है, जो मनुष्य के पापों का नाश करके मोक्ष प्रदान करता है। वरुथिनी एकादशी चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में आती है और इसे “बरुथिनी एकादशी” भी कहा जाता है। इस व्रत को करने से व्यक्ति को सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है और उसके जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
वरुथिनी एकादशी 2025 : तिथि और शुभ मुहूर्त
- तिथि: 5 अप्रैल 2025 (शनिवार)
- एकादशी प्रारंभ: 4 अप्रैल 2025 को रात 10:15 बजे से
- एकादशी समाप्त: 5 अप्रैल 2025 को रात 11:45 बजे तक
- पारण समय: 6 अप्रैल 2025, सुबह 06:15 से 08:45 तक
वरुथिनी एकादशी का महत्व
शास्त्रों में कहा गया है कि वरुथिनी एकादशी का व्रत करने से मनुष्य को 100 अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य मिलता है। यह व्रत न केवल पापों का नाश करता है, बल्कि मोक्ष प्राप्ति का मार्ग भी प्रशस्त करता है। इस दिन भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और आर्थिक समृद्धि प्राप्त होती है।
वरुथिनी एकादशी व्रत के लाभ
- पापों से मुक्ति और पुण्य की प्राप्ति
- आयु में वृद्धि और स्वास्थ्य लाभ
- धन-धान्य की प्राप्ति और दरिद्रता का नाश
- मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है
वरुथिनी एकादशी व्रत की पूजा विधि
इस व्रत को करने के लिए निम्नलिखित विधि का पालन करना चाहिए:
व्रत से पहले की तैयारी
- दशमी की रात से ही ब्रह्मचर्य का पालन करें।
- सात्विक भोजन करें और मन को शांत रखें।
- रात्रि में भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए सोएं।
एकादशी के दिन की पूजा विधि
- प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
- स्वच्छ वस्त्र धारण करके भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
- तुलसी दल, फूल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
- निम्न मंत्र का जाप करें:
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः”
- पूरे दिन उपवास रखें और केवल फलाहार करें।
- रात्रि में भगवान विष्णु की कथा सुनें या पढ़ें।
व्रत पारण (समापन)
द्वादशी के दिन सुबह स्नान करके ब्राह्मण को भोजन कराएं और दान-दक्षिणा दें। इसके बाद ही स्वयं भोजन ग्रहण करें।
वरुथिनी एकादशी की पौराणिक कथा
एक बार धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा, “हे प्रभु! वरुथिनी एकादशी का क्या महत्व है? कृपया इसकी कथा सुनाएं।” तब श्रीकृष्ण ने यह पावन कथा सुनाई:
प्राचीन काल में मान्धाता नाम के एक राजा थे, जो बहुत धर्मात्मा और प्रजापालक थे। एक बार उनके राज्य में भयंकर अकाल पड़ा। प्रजा दुखी होकर राजा के पास गई। राजा ने ऋषि-मुनियों से इस संकट का हल पूछा। तब महर्षि अंगिरा ने बताया, “हे राजन! चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की वरुथिनी एकादशी का व्रत करने से यह संकट दूर होगा।”
राजा ने विधिपूर्वक व्रत किया और भगवान विष्णु की आराधना की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान ने वरदान दिया और राज्य में फिर से वर्षा हुई। धान्य से भंडार भर गए और प्रजा सुखी हो गई। तभी से यह व्रत संकटों को दूर करने वाला माना जाता है।
वरुथिनी एकादशी व्रत में क्या करें और क्या न करें
क्या करें
- पूरे दिन अन्न ग्रहण न करें।
- भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें।
- गरीबों को दान दें और भोजन कराएं।
- मन में पवित्र विचार रखें।
क्या न करें
- क्रोध, झूठ और हिंसा से दूर रहें।
- तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस आदि) न खाएं।
- किसी का अपमान न करें।
वरुथिनी एकादशी का व्रत भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का सर्वोत्तम अवसर है। इस व्रत को श्रद्धा और विधिपूर्वक करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। आइए, हम सभी इस पावन एकादशी पर भगवान विष्णु की शरण में जाएं और उनकी कृपा प्राप्त करें।
“यदि एकादशी व्रत भक्तिपूर्वक किया जाए, तो वह मनुष्य को सभी पापों से मुक्त कर देता है।”

