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वट पूर्णिमा व्रत 2018: पवित्र वट वृक्ष की पूजा और इसके आध्यात्मिक लाभ
हिंदू धर्म में वट पूर्णिमा का विशेष महत्व है। यह पर्व ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है, जिसे वट सावित्री व्रत भी कहते हैं। 2018 में यह पर्व 28 मई को पड़ रहा है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए वट वृक्ष की पूजा करती हैं। आइए जानें किन पवित्र स्थलों पर इस दिन विशेष पूजा होती है और इस व्रत के क्या फायदे हैं।
वट पूर्णिमा का पौराणिक महत्व
पौराणिक कथा के अनुसार, सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से छीनकर वापस ले लिए थे। इसी दिन उन्होंने वट वृक्ष के नीचे तपस्या की थी। तभी से यह परंपरा चली आ रही है।
- वट वृक्ष को त्रिमूर्ति का प्रतीक माना जाता है – ब्रह्मा (जड़), विष्णु (तना) और शिव (शाखाएं)
- इस दिन वट वृक्ष के नीचे बैठकर “ॐ नमो भगवते सत्यवान सावित्री पतये स्वाहा” मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है
- वट वृक्ष की परिक्रमा करते हुए धागा लपेटने की परंपरा है
वट पूर्णिमा पर विशेष पूजा के प्रमुख स्थल
1. प्रयागराज, उत्तर प्रदेश
त्रिवेणी संगम के निकट स्थित वट वृक्ष इस दिन भक्तों से भर जाता है। यहां की पूजा को अत्यंत फलदायी माना जाता है।
2. वृंदावन, उत्तर प्रदेश
बांके बिहारी मंदिर के पास स्थित प्राचीन वट वृक्ष के नीचे विशेष आयोजन होता है।
3. उज्जैन, मध्य प्रदेश
महाकालेश्वर मंदिर परिसर में स्थित वट वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व है।
4. गया, बिहार
विष्णुपद मंदिर के निकट स्थित वट वृक्ष के दर्शन को पितृ दोष निवारक माना जाता है।
वट पूर्णिमा व्रत के आध्यात्मिक लाभ
1. पति की दीर्घायु का वरदान
शास्त्रों में कहा गया है कि सच्चे मन से यह व्रत करने वाली स्त्रियों को सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद मिलता है।
2. संतान सुख की प्राप्ति
वट वृक्ष की पूजा से संतान संबंधी कष्ट दूर होते हैं और संतान सुख की प्राप्ति होती है।
3. कुंडली के दोषों का निवारण
- शनि दोष शांत होता है
- कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है
- पितृ दोष का प्रभाव कम होता है
4. आर्थिक समृद्धि
वट वृक्ष को धन का प्रतीक माना जाता है। इसकी पूजा से घर में लक्ष्मी का वास होता है।
वट पूर्णिमा व्रत की विधि
इस दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए। पूजा के लिए निम्न सामग्री तैयार करें:
- लाल वस्त्र
- हल्दी, कुमकुम, चावल
- फूल, फल और मिठाई
- धूप, दीप और कलश
वट वृक्ष के नीचे बैठकर सावित्री-सत्यवान की कथा सुनें और सूत लपेटते हुए परिक्रमा करें। अंत में ब्राह्मण को दान देकर व्रत पूरा करें।
वट पूर्णिमा 2018 का शुभ मुहूर्त
28 मई 2018 को पूर्णिमा तिथि सुबह 07:39 बजे से शुरू होकर 29 मई को 04:29 बजे तक रहेगी। पूजा का शुभ समय सुबह 06:00 से 10:30 बजे तक है।
निष्कर्ष
वट पूर्णिमा का पर्व हमें प्रकृति से जुड़ने और पारंपरिक मूल्यों को संजोने का अवसर देता है। यह न सिर्फ आध्यात्मिक बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि वट वृक्ष पर्यावरण संरक्षण में अहम भूमिका निभाता है। इस पावन पर्व पर वट वृक्ष की पूजा कर हम प्रकृति और ईश्वर दोनों का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।
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