भगवान गणेश, जिन्हें विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य कहा जाता है, हर मंगल कार्य में सबसे पहले पूजे जाते हैं। विनायक चतुर्थी का पर्व गणपति की कृपा पाने का सुनहरा अवसर है। जुलाई 2025 की यह चतुर्थी विशेष फलदायी है, क्योंकि यह श्रावण मास के पावन समय में आ रही है। आइए जानें कैसे करें सरल विधि से पूजन और पाएं समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति।
विनायक चतुर्थी जुलाई 2025: तिथि और शुभ मुहूर्त
- तिथि: 27 जुलाई 2025 (रविवार)
- चतुर्थी प्रारंभ: 26 जुलाई को रात 10:42 बजे से
- चतुर्थी समाप्त: 27 जुलाई को रात 08:14 बजे तक
- पूजा का शुभ समय: प्रातः 06:00 बजे से 10:00 बजे तक
- मध्याह्न काल: दोपहर 12:00 बजे से 03:00 बजे तक (विशेष फलदायी)
गणेश आराधना की सरल विधि
1. सुबह की तैयारी
प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें और एक स्वस्तिक बनाएं। लाल या पीले रंग का आसन बिछाकर गणपति की मूर्ति/चित्र स्थापित करें।
2. गणेश आवाहन
कलश स्थापना कर जल, फूल, अक्षत और दूर्वा से गणेश जी का आवाहन करें। इस मंत्र का उच्चारण करें:
“ॐ गं गणपतये नमः” (3 बार)
3. षोडशोपचार पूजन
- आवाहन: “ॐ आवाहयामि” कहते हुए फूल अर्पित करें
- आसन: “ॐ आसनं समर्पयामि” बोलकर पीले वस्त्र बिछाएं
- पाद्य: चरणों में जल अर्पित करें
- अर्घ्य: हाथों पर जल-अक्षत चढ़ाएं
- आचमन: गंगाजल से आचमन करवाएं
- स्नान: पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से अभिषेक करें
- वस्त्र: पीला वस्त्र या मोरपंख अर्पित करें
- यज्ञोपवीत: सूत्र अर्पित करें
- गंध: चंदन का तिलक लगाएं
- पुष्प: लाल गुलाब या दूर्वा चढ़ाएं
- धूप: गुग्गुल या कपूर की धूप दें
- दीप: घी का दीपक जलाएं
- नैवेद्य: मोदक, लड्डू या केले का भोग लगाएं
- ताम्बूल: पान के पत्ते पर सुपारी रखकर अर्पित करें
- आरती: “सुखकर्ता दुखहर्ता” आरती गाएं
- प्रदक्षिणा: 3 बार परिक्रमा करें
विशेष उपाय: संकटों से मुक्ति पाने के लिए
1. दूर्वा से पूजन
21 गांठ वाली दूर्वा को गणपति के ऊपर छिड़कें। मान्यता है कि ऐसा करने से नौकरी, विवाह या धन के संकट दूर होते हैं।
2. सिंदूर चढ़ाने का महत्व
गणेश जी को सिंदूर चढ़ाकर उसे अपनी मांग में लगाएं। ऐसा करने से पारिवारिक कलह समाप्त होती है।
3. संकटनाशक स्तोत्र पाठ
इस श्लोक का 11 बार जाप करें:
“वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥”
विनायक चतुर्थी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती ने गणेश जी को अपने उबटन से बनाया था। एक बार जब वे स्नान कर रही थीं, तो उन्होंने गणेश जी को द्वारपाल बनाकर खड़ा कर दिया। भगवान शिव आए तो गणेश जी ने उन्हें रोक लिया। क्रोधित होकर शिव जी ने उनका सिर काट दिया। पार्वती जी के विलाप पर शिव जी ने हाथी के बच्चे का सिर लगाकर गणेश जी को पुनर्जीवित किया और उन्हें प्रथम पूज्य का वरदान दिया।
विशेष मंत्र और उनका प्रभाव
| मंत्र | जाप संख्या | फल |
|---|---|---|
| ॐ गं गणपतये नमः | 108 | सभी विघ्न दूर |
| ॐ एकदंताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात् | 11 | बुद्धि वृद्धि |
| ॐ श्री गणेशाय नमः | 21 | धन लाभ |
पारंपरिक प्रसाद: मोदक बनाने की विधि
गणेश जी को मोदक अत्यंत प्रिय है। इसे बनाने की सरल विधि:
- 1 कप चावल का आटा और 1/2 कप गुड़ लें
- गुड़ को थोड़े पानी में पिघलाएं
- इसमें नारियल बुरादा और इलायची डालें
- आटे को घी में भूनकर गुड़ मिलाएं
- छोटे-छोटे पेड़े बनाकर भगवान को अर्पित करें
गणपति बप्पा की कृपा पाने का सुनहरा अवसर
विनायक चतुर्थी का यह पावन पर्व जुलाई 2025 में श्रावण मास के पुण्य काल में आ रहा है। इस दिन सच्चे मन से की गई पूजा सभी संकटों को दूर कर देती है। गणेश जी की कृपा से जीवन में सुख-समृद्धि, बुद्धि और समर्पण की भावना आती है। आप सभी को विनायक चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं!
“गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलचारुभक्षणम्।
उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपंकजम्॥”
