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तुलसीदास को राम दर्शन प्रेत और हनुमान जी से

जब तुलसीदास को प्रेत और हनुमान जी के सहयोग से भगवान राम के दर्शन हुए यह अद्भुत घटना जानिए

Published July 2, 2026
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5 Min Read

भक्ति साहित्य के महान स्तंभ गोस्वामी तुलसीदास जी का जीवन भगवान राम की अनन्य भक्ति से ओत-प्रोत था। उनकी सबसे बड़ी इच्छा थी – प्रभु श्रीराम के साक्षात् दर्शन। लेकिन क्या आप जानते हैं कि उन्हें यह दिव्य अनुभव एक प्रेत और हनुमान जी की कृपा से प्राप्त हुआ? यह अद्भुत प्रसंग न केवल भक्ति की शक्ति को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि ईश्वर अपने भक्तों तक पहुँचने के लिए किसी भी मार्ग का उपयोग कर सकते हैं।

Contents
तुलसीदास का प्रारंभिक जीवन और भक्ति की ओर झुकावबाल्यकाल और विवाहपत्नी के वचनों ने बदल दिया जीवनप्रेत की भेंट और हनुमान जी से मिलनचित्रकूट में तपस्याहनुमान जी का आशीर्वादश्रीराम के दर्शन का अद्भुत प्रसंगघाट पर दिव्य दृश्यतुलसीदास का भाव-विभोर होनाराम जी का आशीर्वादइस प्रसंग से मिलने वाली शिक्षाएँभक्ति का चमत्कार

तुलसीदास का प्रारंभिक जीवन और भक्ति की ओर झुकाव

बाल्यकाल और विवाह

  • तुलसीदास जी का जन्म संवत् 1589 (1532 ईस्वी) में हुआ था।
  • बचपन में ही माता-पिता का साया उठ जाने के कारण उनका पालन-पोषण एक साधु ने किया।
  • बड़े होकर उनका विवाह रत्नावली नामक कन्या से हुआ।

पत्नी के वचनों ने बदल दिया जीवन

एक दिन जब तुलसीदास जी अपनी पत्नी के प्रति अत्यधिक आसक्ति में उनके पीछे-पीछे चले गए, तो रत्नावली ने कहा –

“अस्थि चर्म मय देह यह, ता सों ऐसी प्रीति।
नेकु जो होती राम से, तो काहे भव-भीत।”

इन शब्दों ने तुलसीदास के हृदय में गहरा प्रभाव डाला और उन्होंने गृहस्थ जीवन त्यागकर राम-भक्ति का मार्ग अपना लिया।

प्रेत की भेंट और हनुमान जी से मिलन

चित्रकूट में तपस्या

तुलसीदास जी चित्रकूट आए और यहाँ राम-भक्ति में लीन हो गए। एक रात, एक प्रेत उनके पास आया और बोला –

  • “मैं आपका भक्त हूँ और आपकी भक्ति से प्रसन्न होकर आपको एक मंत्र देना चाहता हूँ।”
  • प्रेत ने तुलसीदास को हनुमान जी का विशेष मंत्र दिया और कहा कि इसके जप से हनुमान जी प्रसन्न होंगे।

हनुमान जी का आशीर्वाद

तुलसीदास ने नियमित रूप से मंत्र का जप किया। कुछ समय बाद हनुमान जी प्रकट हुए और उनसे बोले –

“तुम्हारी भक्ति से प्रसन्न होकर मैं तुम्हें वरदान देना चाहता हूँ।”

तुलसीदास ने हाथ जोड़कर कहा – “प्रभु, मुझे केवल श्रीराम के दर्शन चाहिए।”

हनुमान जी ने कहा – “तुम्हें राम के दर्शन अवश्य होंगे। कल सुबह तुम्हें चित्रकूट के घाट पर दो युवक दिखाई देंगे, वे ही श्रीराम और लक्ष्मण हैं।”

श्रीराम के दर्शन का अद्भुत प्रसंग

घाट पर दिव्य दृश्य

अगले दिन प्रातःकाल तुलसीदास जी चित्रकूट के घाट पर पहुँचे। वहाँ उन्होंने देखा कि दो तेजस्वी युवक घोड़ों पर सवार होकर आ रहे हैं।

  • एक युवक का रंग गेहुँआ था और दूसरे का गोरा।
  • वे दोनों धनुष-बाण लिए हुए थे और उनका तेज अद्भुत था।

तुलसीदास का भाव-विभोर होना

तुलसीदास जी समझ गए कि ये श्रीराम और लक्ष्मण हैं। वे भाव-विभोर होकर उनके चरणों में गिर पड़े और “राम-राम” का जाप करने लगे।

“देखि रामु रघुबरु बनहिं आए।
तुलसी सरन सुभाउ सुहाए॥”

राम जी का आशीर्वाद

श्रीराम ने तुलसीदास को उठाया और आशीर्वाद दिया। उन्होंने कहा –

“तुम्हारी भक्ति से प्रसन्न होकर हम तुम्हें दर्शन देने आए हैं। तुम हमारे प्रिय भक्त हो।”

इसके बाद श्रीराम और लक्ष्मण अंतर्धान हो गए, लेकिन तुलसीदास का हृदय अनंत आनंद से भर गया।

इस प्रसंग से मिलने वाली शिक्षाएँ

  • भक्ति की शक्ति: ईश्वर सच्चे भक्त के लिए किसी भी रूप में प्रकट हो सकते हैं।
  • सहायक का महत्व: प्रेत और हनुमान जी ने तुलसीदास को राम तक पहुँचने में मदद की।
  • धैर्य और विश्वास: तुलसीदास ने कभी भी राम के दर्शन की आशा नहीं छोड़ी।

भक्ति का चमत्कार

तुलसीदास जी का यह प्रसंग हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति किसी भी बाधा को पार कर सकती है। भगवान राम ने अपने भक्त के लिए एक प्रेत और हनुमान जी को माध्यम बनाया, यह दर्शाता है कि ईश्वर के मार्ग अज्ञात और अद्भुत होते हैं।

“भक्ति ही सच्चा मार्ग है, जो जीव को परमात्मा से मिलाती है।”

आइए, हम भी तुलसीदास जी की तरह निष्काम भक्ति का मार्ग अपनाएँ और अपने जीवन को धन्य बनाएँ।

॥ श्रीराम जय राम जय जय राम ॥

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