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शिवलिंग पूजा का आरंभ जहां गिरा भगवान शिव का लिंग

जहां भगवान शिव का लिंग गिरा वहीं से शिवलिंग की पूजा शुरू हुई यह पौराणिक कथा जानें और भोलेनाथ के महत्व को समझें

Published July 2, 2026
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4 Min Read

भगवान शिव के लिंग रूप की पूजा हिंदू धर्म में सबसे पवित्र और प्राचीन परंपराओं में से एक है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शिवलिंग की पूजा कैसे शुरू हुई? यह कथा अनादि काल से जुड़ी है, जब भगवान शिव और भगवान विष्णु के बीच एक दिव्य प्रतिस्पर्धा हुई थी। आइए, इस पावन कथा को विस्तार से जानें।

Contents
ब्रह्मा और विष्णु की खोज: कौन है सर्वश्रेष्ठ?ज्योतिर्लिंगों की उत्पत्ति: दिव्य प्रकाश के स्तंभ12 ज्योतिर्लिंगों के नाम और स्थानशिवलिंग पूजा का महत्वशिवलिंग पूजा के लाभशिवलिंग पूजा की सही विधिशिवलिंग से जुड़ी पौराणिक कथाएं1. रावण और कैलाश पर्वत2. भस्मासुर का अहंकारशिवलिंग की पूजा है मोक्ष का मार्ग

ब्रह्मा और विष्णु की खोज: कौन है सर्वश्रेष्ठ?

पुराणों के अनुसार, एक बार ब्रह्मा जी और विष्णु जी के बीच यह विवाद हुआ कि उनमें से श्रेष्ठ कौन है। इस बहस के बीच अचानक एक ज्योतिर्लिंग प्रकट हुआ, जिसका न तो आदि था और न अंत। यह देखकर दोनों देवता चकित रह गए।

  • ब्रह्मा जी ने कमल के रूप में ऊपर की ओर उड़ान भरी, लेकिन लिंग का शीर्ष नहीं ढूंढ पाए।
  • विष्णु जी ने वराह रूप धारण करके नीचे की ओर यात्रा की, लेकिन आधार नहीं मिला।

तभी भगवान शिव प्रकट हुए और बताया कि वे ही अनंत हैं। इस घटना के बाद से ही शिवलिंग की पूजा प्रारंभ हुई।

ज्योतिर्लिंगों की उत्पत्ति: दिव्य प्रकाश के स्तंभ

शिवपुराण में वर्णित है कि जहां-जहां शिवलिंग प्रकट हुए, वहां ज्योतिर्लिंग स्थापित हुए। भारत में 12 ज्योतिर्लिंग हैं, जिनमें से प्रत्येक की अपनी पौराणिक कथा है।

12 ज्योतिर्लिंगों के नाम और स्थान

  • सोमनाथ (गुजरात)
  • मल्लिकार्जुन (आंध्र प्रदेश)
  • महाकालेश्वर (उज्जैन)
  • ओंकारेश्वर (मध्य प्रदेश)
  • केदारनाथ (उत्तराखंड)
  • भीमाशंकर (महाराष्ट्र)
  • विश्वनाथ (वाराणसी)
  • त्र्यंबकेश्वर (नासिक)
  • वैद्यनाथ (झारखंड)
  • नागेश्वर (गुजरात)
  • रामेश्वरम (तमिलनाडु)
  • घृष्णेश्वर (महाराष्ट्र)

शिवलिंग पूजा का महत्व

शिवलिंग न केवल भगवान शिव का प्रतीक है, बल्कि यह ब्रह्मांडीय ऊर्जा का केंद्र भी माना जाता है। इसकी पूजा से मनुष्य को आध्यात्मिक शक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

शिवलिंग पूजा के लाभ

  • मानसिक शांति: शिवलिंग पर जल चढ़ाने से मन शांत होता है।
  • कर्मों का नाश: “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप पापों को धो देता है।
  • सुख-समृद्धि: बिल्व पत्र अर्पित करने से धन लाभ होता है।

शिवलिंग पूजा की सही विधि

शिवलिंग की पूजा करते समय कुछ विशेष नियमों का पालन करना चाहिए:

  1. स्नान: सबसे पहले शिवलिंग को दूध, घी, शहद और गंगाजल से स्नान कराएं।
  2. वस्त्र अर्पण: सफेद या लाल वस्त्र से शिवलिंग को ढकें।
  3. बिल्व पत्र: तीन पत्तियों वाले बिल्व पत्र चढ़ाएं।
  4. धूप-दीप: घी का दीपक जलाएं और धूप दें।
  5. मंत्र जाप: “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का 108 बार जाप करें।

शिवलिंग से जुड़ी पौराणिक कथाएं

1. रावण और कैलाश पर्वत

कहा जाता है कि रावण ने कैलाश पर्वत उठाने का प्रयास किया था, लेकिन भगवान शिव ने अपने पैर के अंगूठे से पर्वत दबा दिया। इससे रावण का अहंकार चूर-चूर हो गया और उसने शिव की आराधना की।

2. भस्मासुर का अहंकार

भस्मासुर ने शिव से वरदान पाया था कि वह जिसके सिर पर हाथ रखेगा, वह भस्म हो जाएगा। उसने स्वयं शिव को ही भस्म करने का प्रयास किया, लेकिन भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर उसे ही नष्ट कर दिया।

शिवलिंग की पूजा है मोक्ष का मार्ग

शिवलिंग की पूजा केवल एक धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि का मार्ग है। जहां भगवान शिव का लिंग गिरा, वहां से ज्योतिर्लिंग की स्थापना हुई और मानवता को एक नया आध्यात्मिक आधार मिला। आइए, हम सभी शिव के इस अनादि स्वरूप को नमन करें और उनकी कृपा पाने का प्रयास करें।

ॐ नमः शिवाय!

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