हनुमानजी का क्रोधित स्वरूप: एक दिव्य रहस्य
हिंदू धर्म में भगवान हनुमानजी को शक्ति, भक्ति और संयम का प्रतीक माना जाता है। उनका सामान्य रूप शांत, विनम्र और करुणामय दिखाई देता है। लेकिन कुछ तस्वीरों और मूर्तियों में हनुमानजी को अत्यंत क्रोधित देखा जाता है। उनकी आँखें लाल, मुखमंडल तेजस्वी और शरीर से प्रचंड ऊर्जा निकलती हुई प्रतीत होती है।
यह स्वरूप देखकर अक्सर भक्तों के मन में सवाल उठता है – “आखिर हनुमानजी इतने गुस्से में क्यों हैं?” और “इस तस्वीर को बनाने वाला कौन है?” आइए, इस रहस्य को समझने का प्रयास करते हैं।
हनुमानजी के क्रोधित स्वरूप की पौराणिक कथा
1. लंका दहन: असुरों के अहंकार का अंत
रामायण में एक प्रसंग है जब हनुमानजी ने लंका को आग लगा दी थी। रावण ने सीताजी का हरण किया और हनुमानजी को पूँछ में आग लगाकर अपमानित किया। तब हनुमानजी ने अपने क्रोधित रूप में लंका को जलाकर राख कर दिया। यह घटना उनके रक्षक स्वभाव को दर्शाती है – जहाँ अन्याय होता है, वहाँ हनुमानजी क्रोधित होकर धर्म की स्थापना करते हैं।
2. अहिरावण का वध: भक्ति की शक्ति
एक अन्य कथा के अनुसार, जब राम-लक्ष्मण को अहिरावण ने पाताल लोक में बंदी बना लिया, तब हनुमानजी ने महाबली रूप धारण किया। उन्होंने पंचमुखी स्वरूप में अहिरावण का वध किया। इस रूप में उनका क्रोध अधर्म के विरुद्ध था, न कि व्यक्तिगत प्रतिशोध के लिए।
कौन बनाता है हनुमानजी की क्रोधित तस्वीरें?
आजकल सोशल मीडिया पर हनुमानजी की तेजस्वी और क्रोधित मूर्तियाँ खूब वायरल होती हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा कि इन तस्वीरों को बनाने वाले कलाकार कौन हैं?
- पारंपरिक मूर्तिकार: दक्षिण भारत के कुछ मंदिरों में हनुमानजी का वीर रूप दिखाया जाता है। इन मूर्तियों को शिल्पियों की पीढ़ियों ने बनाया है।
- डिजिटल आर्टिस्ट: आजकल कई कलाकार भगवान के दिव्य रूपों को डिजिटल पेंटिंग्स के जरिए दर्शाते हैं। इनमें से कुछ क्रोधित हनुमान की तस्वीरें बनाकर प्रसिद्ध हुए हैं।
- भक्त-कलाकार: कुछ लोगों को हनुमानजी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और वे उनके दिव्य स्वरूप को कैनवास पर उतार देते हैं।
हनुमानजी का क्रोध किसके लिए है?
हनुमानजी का क्रोध कभी भी सामान्य जनों के लिए नहीं होता। यह तो केवल:
- असुरों के अहंकार को चूर-चूर करने के लिए
- धर्म की रक्षा के लिए
- भक्तों की रक्षा के लिए
जैसा कि हनुमान चालीसा में कहा गया है:
“भूत पिशाच निकट नहिं आवै, महावीर जब नाम सुनावै।”
क्या हनुमानजी का क्रोधित रूप डरावना है?
कुछ लोगों को लगता है कि हनुमानजी का यह रूप भय उत्पन्न करता है, लेकिन वास्तव में यह भक्तों के लिए आश्वासन है। इस रूप का संदेश है:
- अन्याय का अंत: जहाँ भी अधर्म होगा, हनुमानजी उसे समाप्त करेंगे।
- भक्त की रक्षा: जो भी श्रीराम का भक्त है, हनुमानजी उसकी सुरक्षा करेंगे।
- आध्यात्मिक शक्ति: यह रूप हमें आंतरिक शक्ति प्रदान करता है।
हनुमानजी के क्रोधित रूप की पूजा का महत्व
कई भक्त हनुमानजी के वीर रूप की पूजा करते हैं, विशेषकर:
- शनिवार और मंगलवार: इन दिनों हनुमानजी की पूजा का विशेष महत्व है।
- संकटमोचन अष्टक: इस स्तोत्र के पाठ से हनुमानजी प्रसन्न होते हैं।
- हनुमान बाहुक: तुलसीदासजी द्वारा रचित इस स्तोत्र में हनुमानजी की महिमा वर्णित है।
क्रोध में छिपी है करुणा
हनुमानजी का क्रोधित रूप उनकी दिव्य लीला का हिस्सा है। यह हमें याद दिलाता है कि बुराई के सामने डटकर खड़े होना चाहिए। जिस प्रकार हनुमानजी ने रामभक्ति के लिए लंका जलाई, उसी प्रकार हमें भी धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए।
अंत में, यही प्रार्थना है:
“जय हनुमान ज्ञान गुन सागर, जय कपीश तिहुँ लोक उजागर।”

